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Home World भारतीय युद्धपोत INS सह्याद्रि क्यों पहुंचा जापान, हिंद-प्रशांत महासागर में बढ़ी हलचल!

भारतीय युद्धपोत INS सह्याद्रि क्यों पहुंचा जापान, हिंद-प्रशांत महासागर में बढ़ी हलचल!

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भारतीय युद्धपोत INS सह्याद्रि क्यों पहुंचा जापान, हिंद-प्रशांत महासागर में बढ़ी हलचल!
भारतीय युद्धपोत INS सह्याद्रि जापान के योकोसुका पहुंचा. इमेज सोर्स है- @IndianEmbTokyo

INS Sahyadri Arrives At Yokosuka Japan: हिंद-प्रशांत के समंदर में भारत और जापान फिर साथ आए हैं. दोस्ती और भरोसे की ये मिसाल JAIMEX-25 (Japan-India Maritime Exercise 2025) है, जो इन दिनों जापान के तट पर चल रहा है. इस अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भारत का युद्धपोत INS सह्याद्रि जापान के योकोसुका बंदरगाह पहुंच गया है. यह वही इलाका है, जहां दोनों देशों की नौसेनाएं हर कुछ सालों में एक-दूसरे के साथ अभ्यास करती हैं, ताकि समुद्री सुरक्षा और सहयोग मजबूत हो सके.

INS Sahyadri Arrives At Yokosuka Japan: योकोसुका में INS सह्याद्रि का स्वागत

जैसे ही INS सह्याद्रि योकोसुका पहुंचा, वहां भारतीय नौसेना के अधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत हुआ. भारतीय दूतावास ने एक्स (ट्विटर) पर जानकारी दी कि एक समारोह में आर. मधु सूदन, चार्ज ‘डी’ अफेयर्स (भारतीय दूतावास, टोक्यो) और रियर एडमिरल यामागुची नोबोहिसा, चीफ ऑफ स्टाफ (जेएमएसडीएफ योकोसुका डिस्ट्रिक्ट) ने INS सह्याद्रि का स्वागत किया. कैप्टन रजत कुमार की कमान में चल रहा यह जहाज इस बार के जापान-भारत समुद्री अभ्यास, JAIMEX-25 में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है. नीचे आप जापान में भारतीय दूतावास के आधिकारिक ट्विटर पेज के द्वारा पोस्ट को देख सकते हैं.

जापान की नौसेना ने क्या कहा

जापान की Self Defense Fleet की वेबसाइट पर इस अभ्यास को लेकर लिखा गया कि 16 से 17 अक्टूबर तक JS Asahi, JS Omi और एक पनडुब्बी ने Kyushu के पश्चिम में भारतीय नौसेना के फ्रिगेट INS सह्याद्रि के साथ जापान-भारत द्विपक्षीय अभ्यास ‘JAIMEX-25’ किया. इस दौरान जापानी थल सेना (JGSDF) की सेकंड आर्टिलरी ब्रिगेड और वायुसेना (JASDF) की वेस्टर्न एयर कंट्रोल एंड वॉर्निंग विंग ने भी समर्थन दिया.” जापान की नौसेना के मुताबिक, भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पड़ोसी देश हैं, जो समान मूल्यों को साझा करते हैं. इसलिए दोनों अब रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के तहत अपने सहयोग को और गहरा कर रहे हैं.

अभ्यास का मकसद क्या है

जापानी नौसेना ने कहा कि यह उच्च-स्तरीय संयुक्त अभ्यास हमारी सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने और भारतीय नौसेना के साथ तालमेल मजबूत करने का एक मौका है.साथ ही बताया गया कि भविष्य में जापान की नौसेना (JMSDF) मल्टीलैट्रल अभ्यासों के जरिए साझा रक्षा सहयोग को और बढ़ाएगी. इसका मकसद है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था को बनाए रखना.

INS सह्याद्रि- भारत का ताकतवर स्टील्थ युद्धपोत

INS सह्याद्रि भारतीय नौसेना का गर्व है. यह नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) का हिस्सा है, जिसका मुख्यालय विशाखापत्तनम में है. यह पोत हवा, सतह और पानी के नीचे से आने वाले खतरों को पहचानने और खत्म करने में सक्षम है.

इस युद्धपोत की खासियतें हैं कि इसका कैपेसिटी डिस्प्लेसमेंट लगभग 6,800 टन है और यह करीब 32 नॉट (लगभग 60 किलोमीटर प्रति घंटा) की अधिकतम गति से चल सकता है; इसे बराक-1 और श्टिल-1 मिसाइलों के साथ-साथ ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइलों और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चरों से सुसज्जित किया गया है, और यह एक मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर ले जाने में भी सक्षम है. INS सह्याद्रि भारत में बनी शिवालिक कैटेगरी के स्टील्थ फ्रिगेट्स में से एक है. इसी सीरीज में दो और जहाज हैं INS शिवालिक और INS सतपुड़ा. इन सभी को मझगांव डॉक लिमिटेड ने तैयार किया है. यह भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का बड़ा उदाहरण है.

भारत-जापान की मजबूत होती साझेदारी

भारत और जापान के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ा है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, “रणनीतिक मामलों पर बढ़ती एकजुटता के चलते दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में तेजी आई है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए यह साझेदारी बेहद अहम है.” यानि अब भारत और जापान केवल दोस्त नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा सुरक्षा भागीदार बन चुके हैं.

जापान की नई प्रधानमंत्री और मोदी का संदेश

इस बीच जापान में एक और बड़ी खबर आई कि साने ताकाइची देश की नई प्रधानमंत्री चुनी गईं. भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक्स पर बधाई दी. उन्होंने लिखा कि साने ताकाइची, जापान के प्रधानमंत्री चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई. मैं भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं. हमारे गहरे होते संबंध हिंद-प्रशांत और उससे आगे शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं.

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