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Home World भारत हमला करने वाला है… भयभीत पाकिस्तानी प्रेसिडेंट जरदारी बोले; हम बातचीत को तैयार

भारत हमला करने वाला है… भयभीत पाकिस्तानी प्रेसिडेंट जरदारी बोले; हम बातचीत को तैयार

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भारत हमला करने वाला है… भयभीत पाकिस्तानी प्रेसिडेंट जरदारी बोले; हम बातचीत को तैयार
पाकिस्तान के प्रेसिडेंट आसिफ अली जरदारी. फोटो- एक्स (@AdvSafiullahPSF).

India Preparing to Attack Pakistan: पाकिस्तान इस समय अफगानिस्तान के साथ एक युद्ध जैसे हालात में है, लेकिन उसे भारत का डर सता रहा है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि इंडिया पाकिस्तान पर एक और अटैक करने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, उन्होंने बातचीत की टेबल पर बैठने की अपील की है. लेकिन उन्होंने बाद में चेतावनी भरे अंदाज में यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान टकराव के लिए तैयार है. भारत ने पिछले साल पहलगाम टेरर अटैक, जिसमें 26 मासूम भारतीय मारे गए थे, के बाद पाकिस्तान के ऊपर ऑपरेशन सिंदूर किया था. इस 4 दिन की झड़प में उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा था. हालांकि, पाकिस्तान की रिक्वेस्ट के बाद भारत ने सीजफायर का ऐलान किया था.

पाकिस्तानी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए जरदारी ने भारत की ओर सैन्य चेतावनियों से भरे कई उत्तेजक बयान दिए, लेकिन साथ ही कश्मीर मुद्दे पर बातचीत की मेज पर लौटने की भी अपील की. जरदारी ने कहा, ‘भारत के नेता कह रहे हैं कि वे एक और युद्ध की तैयारी कर रहे हैं. क्षेत्रीय शांति का आजीवन समर्थक होने के नाते मैं इसकी सिफारिश नहीं करूंगा. मेरा संदेश (भारत को) है कि युद्ध के माहौल से हटकर सार्थक वार्ता की मेज पर आएं, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा का यही एकमात्र रास्ता है.

गीदड़भभकी और फिर कश्मीर का समर्थन

अपने संबोधन के दौरान जरदारी ने पाकिस्तान को एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन साथ ही संघर्ष के परिणामों को लेकर भारत को गीदड़भभकी देने की भी कोशिश की. उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु देश है और उस जिम्मेदारी के महत्व को समझता है. साथ ही, हम ऐसा देश हैं जो आवश्यकता पड़ने पर अपनी रक्षा करता है.’ अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा. उनके अनुसार, जब तक कश्मीर के लोगों को आजादी नहीं मिल जाती, इस क्षेत्र में सुरक्षा और शांति नहीं आ सकती. 

जल सिंधु निलंबन पर भी किया कमेंट

अपने संबोधन के दौरान जरदारी ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले की भी आलोचना की. उन्होंने इसे ‘साफ-साफ जल-आतंकवाद’ बताया और आरोप लगाया कि भारत सरकार पानी के प्रवाह को राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रही है. नई दिल्ली ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही पाकिस्तान के लिए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. इसके बाद भारत ने अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल करने के लिए डैम और अन्य प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में तेजी लाई है. 

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भाषण के दौरान होती रही नारेबाजी

राष्ट्रपति के रूप में संसद के संयुक्त अधिवेशन को जरदारी का यह नौवां संबोधन था. उनके भाषण के दौरान पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पीटीआई के सांसदों ने जोरदार हंगामा और नारेबाजी की, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई. विरोध कर रहे सदस्यों ने ‘गो जरदारी गो’ और ‘खान को रिहा करो’ जैसे नारे लगाए. वे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को रिहा करने के नारे लगा रहे थे. पाकिस्तान के पीस बोर्ड में भागीदारी पर भी लगातार आपत्तियां जताई जाती रहीं. प्रदर्शन के दौरान ‘जाली पीस बोर्ड छोड़ो’ जैसे नारे लगाए गए. दरअसल, पाकिस्तान की जनता फिलिस्तीन मुद्दे पर इजरायल के रुख को लेकर पहले से ही नाराज है.

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अस्थिर पाकिस्तान हालातों से निपटने की कर रहा कोशिश

पाकिस्तान अक्सर बातचीत की अपील के साथ भारत को लेकर आक्रामक बयानबाजी भी करता है. ऐसे बयान अक्सर पाकिस्तान के भीतर की अस्थिरता और सुरक्षा समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए दिए जाते हैं. इस्लामाबाद इस समय गंभीर घरेलू और क्षेत्रीय चुनौतियों से जूझ रहा है. एक ओर वह अफगानिस्तान के साथ क्षेत्रीय संघर्ष में उलझा हुआ है, वहीं दूसरी ओर ईरान में बदले हालातों के बाद देश के अंदर शिया आबादी ने अमेरिकी एंबेसी और यूएन ऑफिसेज को निशाना बनाया है. इसको दबाने के लिए पाकिस्तान सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की है, जिनमें अलग-अलग रिपोर्ट्स में 22-33 लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट्स हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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