[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home World हिंद महासागर में संयोग या चीन का प्रयोग! कोलंबो पोर्ट पर एक ही दिन पहुंचे भारत-पाकिस्तान के वॉरशिप

हिंद महासागर में संयोग या चीन का प्रयोग! कोलंबो पोर्ट पर एक ही दिन पहुंचे भारत-पाकिस्तान के वॉरशिप

0
हिंद महासागर में संयोग या चीन का प्रयोग! कोलंबो पोर्ट पर एक ही दिन पहुंचे भारत-पाकिस्तान के वॉरशिप
भारत और पाकिस्तान के वॉरशिप. फोटो- एक्स.

India Pakistan Warships Sri Lanka: हिंद महासागर में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच श्रीलंका एक बार फिर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का केंद्र बनता दिख रहा है. 1 जून को ऐसा दुर्लभ घटनाक्रम देखने को मिला, जब भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज एक ही दिन श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर पहुंच गए. श्रींलका नौसेना के अनुसार, 1 जून को पाकिस्तान नौसेना के दो युद्धपोत पीएनएस तैमूर, पीएनएस असलात और पनडुब्बी पीएनएस/एम हैंगोर कोलंबो पहुंचे. लगभग उसी समय भारतीय नौसेना का लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस ऐरावत भी कोलंबो बंदरगाह पहुंचा. 

एक ही समय में भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. खासकर तब, जब पाकिस्तान के बेड़े में चीन निर्मित अत्याधुनिक पनडुब्बी भी शामिल हो. ऐसे में यह सिर्फ नौसैनिक दौरा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और समुद्री कूटनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है.

भारत का मिशन क्या था?

भारतीय नौसेना के अनुसार, आईएनएस ऐरावत का दौरा नियमित ‘ऑपरेशनल टर्नअराउंड’ का हिस्सा था. इसका उद्देश्य ईंधन भरना, रसद लेना और कुछ निर्धारित गतिविधियों को पूरा करना था. श्रीलंका नेवी ने बताया कि भारतीय नौसैनिक श्रीलंका नौसेना के साथ कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे. इसके साथ ही सभी क्रू मेंबर श्रीलंका के हिस्टोरिक जगहों पर भी घूमने जाएंगे. 

‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘महासागर’ नीति का हिस्सा

आईएनएस ऐरावत 1 जून से 4 जून तक कोलंबो में रहेगा. इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर आई.पी. पाटिल श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. भारत इस यात्रा को अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘महासागर’ नीति से जोड़कर देख रहा है. इंडियन नेवी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि यह बंदरगाह आगमन भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी की पुष्टि करता है.

पाकिस्तान का बेड़ा क्यों पहुंचा कोलंबो?

दूसरी ओर पाकिस्तान का नौसैनिक समूह भी आधिकारिक तौर पर सद्भावना यात्रा और रसद आपूर्ति के लिए कोलंबो पहुंचा. पाकिस्तानी नौसैनिक समूह में पीएनएस तैमूर, पीएनएस असलात और पनडुब्बी पीएनएस/एम हैंगोर शामिल जहाजों की कमान क्रमशः कैप्टन नेमत सईद खान, कैप्टन नादिर मतीन अफरीदी और कैप्टन उजैर फारूक के हाथों में है. इस बेड़े में शामिल सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया नई पनडुब्बी पीएनएस/एम हैंगोर ने.

यह पनडुब्बी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह हाल ही में चीन द्वारा पाकिस्तान को उपलब्ध कराई गई हैंगोर-श्रेणी की उन्नत पनडुब्बियों में शामिल है. रिपोर्टों के अनुसार, यह पनडुब्बी बाबर-3 क्रूज मिसाइल दागने में सक्षम है और चीन से पाकिस्तान की ओर अपनी पहली समुद्री यात्रा पर थी. कोलंबो में ठहराव उसके मार्ग का हिस्सा था. चीन में निर्मित नई पीढ़ी की पनडुब्बी को पाकिस्तान की समुद्री शक्ति बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

पाकिस्तान का आधिकारिक मिशन क्या है?

पाकिस्तानी नौसेना के मुताबिक यह यात्रा सद्भावना दौरे और रसद आपूर्ति का हिस्सा है. जहाजों को ईंधन और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी. इसके अलावा पाकिस्तानी नौसेना के अधिकारी और नाविक श्रीलंका के विभिन्न स्थलों का दौरा करेंगे. श्रीलंका नौसेना के साथ संयुक्त गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी. श्रीलंकाई नौसेना ने बताया है कि पाकिस्तान का यह बेड़ा पश्चिमी समुद्री तट के पास एक ‘पैसेज एक्सरसाइज’ में भी हिस्सा लेगा. इस तरह दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.

असली कहानी चीन से जुड़ी है?

इस पूरे घटनाक्रम को केवल भारत-पाकिस्तान प्रतिस्पर्धा के नजरिए से नहीं देखा जा सकता. इसके पीछे चीन की दीर्घकालिक हिंद महासागर रणनीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. पिछले एक दशक में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने आर्थिक और सामरिक प्रभाव का तेजी से विस्तार किया है.

पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका का हंबनटोटा पोर्ट और क्षेत्र के अन्य रणनीतिक समुद्री ठिकाने इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माने जाते हैं. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी इसी समुद्री दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है, जिससे चीन को अरब सागर तक सीधी पहुंच मिलती है.

इसके साथ ही चीन के हैंगोर क्लास सबमरीन पर भी भारत की नजर रहेगी. चीन पाकिस्तान को 8 हैंगोर क्लास पनडुब्बी दे रहा है. इसमें पीएनएस/एम हैंगोर के साथ पीएनएस गाजी भी शामिल है. गाजी उसी नाम वाली पनडुब्बी है, जिसे भारत ने 1971 के युद्ध के दौरान डुबोया था.

ये भी पढ़ें:- ‘सीजफायर का मतलब कम गोलीबारी’, ट्रंप की अलबेली परिभाषा; कहा- US सैनिक मरे तो फिर बदल जाएगी स्थिति  

श्रीलंका क्यों कर रहा है दोनों देशों की मेजबानी?

कोलंबो बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक पर स्थित है. एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते इसके आसपास से गुजरते हैं. यही वजह है कि भारत, चीन और पाकिस्तान तीनों इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं.

श्रीलंका लंबे समय से एक संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश करता रहा है. एक तरफ भारत उसका सबसे निकटतम पड़ोसी, प्रमुख आर्थिक साझेदार और सुरक्षा सहयोगी है. दूसरी तरफ श्रीलंका चीन और पाकिस्तान के साथ भी अपने संबंध बनाए रखना चाहता है.

यही वजह है कि कोलंबो ने भारतीय और पाकिस्तानी दोनों नौसैनिक जहाजों का स्वागत किया है. इससे श्रीलंका यह संदेश देना चाहता है कि वह क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा में किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़ा होने की बजाय संतुलन बनाए रखना चाहता है.

ये भी पढ़ें:- UN इतिहास में पहली बार… सुरक्षा परिषद चुनाव में किर्गिस्तान जीता, जर्मनी हारा; भारत को चेतावनी 

भारत के लिए क्या संकेत हैं?

भारत के दृष्टिकोण से देखें तो आईएनएस ऐरावत की यात्रा सामान्य नौसैनिक गतिविधि थी, लेकिन उसी समय पाकिस्तान की उन्नत पनडुब्बी का कोलंबो पहुंचना क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को नया आयाम देता है. विशेष रूप से तब, जब पाकिस्तान की समुद्री क्षमताओं के आधुनिकीकरण में चीन की सीधी भूमिका दिखाई दे रही है. हिंद महासागर में चीन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में बदलते जियो पॉलिटिकल सिनारियो में भारत को और भी सतर्क रहने की जरूरत है.

Previous article समस्तीपुर: बंद चीनी मिल और हवाई अड्डे को चालू करने की मांग तेज, 15 जून को प्रदर्शन
Next article महिला और पुरुष शौचालय पर ताला, देसरी स्टेशन पर यात्रियों को भारी दिक्कत
Avatar Of Anant Narayan Shukla
अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel