परमाणु संकट पर IAEA प्रमुख का बयान, ईरान का यूरेनियम हटाना आसान नहीं

IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी ने कहा कि तकनीकी दिक्कतों के बावजूद ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को दूसरी जगह भेजा जा सकता है. इसी मुद्दे पर ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत में सबसे बड़ा पेंच फंसा हुआ है.

By Amitabh Kumar | June 2, 2026 6:56 AM

राफेल ग्रोसी ने कहा कि ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजना आसान काम नहीं होगा, क्योंकि इसमें कई तकनीकी चुनौतियां हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह काम संभव है. वहीं, ईरान और अमेरिका के बीच इस मुद्दे को लेकर बातचीत भी लगातार जारी है. अल जजीरा से बातचीत में ग्रोसी ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को दूसरी जगह ले जाना “मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं.” उन्होंने बताया कि यह इस तरह से रखी गई है कि इसका सुरक्षित एक जगह से दूसरी ले जाना काफी चुनौतीपूर्ण होगा.

अनुमान है कि ईरान के पास करीब 440 किलोग्राम यूरेनियम है, जिसे लगभग 60 प्रतिशत तक संवर्धित (Enriched) किया गया है. यह स्तर परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाले 90 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम के काफी करीब माना जाता है, इसलिए इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है.

संवर्धित यूरेनियम गैस के रूप में मौजूद

ग्रोसी ने कहा कि यह प्रक्रिया आसान नहीं है, क्योंकि संवर्धित यूरेनियम गैस के रूप में मौजूद है और बेहद संवेदनशील के अलावा खतरनाक सामग्री मानी जाती है. ऐसे में इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बड़ी तकनीकी चुनौती है. उन्होंने बताया कि यूरेनियम को कम संवर्धित रूप में बदलने यानी “डाउनब्लेंडिंग” जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी परमाणु वार्ता में IAEA सीधे तौर पर शामिल नहीं है. एजेंसी की भूमिका निगरानी और सत्यापन की है.

IAEA ईरान और अमेरिका के संपर्क में

IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी ने कहा कि एजेंसी ईरान और अमेरिका, दोनों के साथ अलग-अलग संपर्क में है. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश बातचीत को सफल और व्यावहारिक बनाने की है, ताकि दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते का रास्ता आसान हो सके.

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डोनाल्ड ट्रंप की क्या है मांग?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर मांग की है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ दे. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसे “न्यूक्लियर डस्ट” बताया. उन्होंने कहा कि या तो इसे अमेरिका को सौंपकर नष्ट किया जाए या फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में खत्म किया जाए.