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Home World अमेरिका ने ईरान से कैसे बचाया अपना पायलट? ट्रंप, CIA और यूएस आर्मी ने किया गजब का खेल

अमेरिका ने ईरान से कैसे बचाया अपना पायलट? ट्रंप, CIA और यूएस आर्मी ने किया गजब का खेल

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अमेरिका ने ईरान से कैसे बचाया अपना पायलट? ट्रंप, CIA और यूएस आर्मी ने किया गजब का खेल
बचाए गए अमेरिकी पायलट की सांकेतिक तस्वीर. फोटो- एआई जेनरेटेड.

US Rescued Missing Pilot in Iran: ईरान में अमेरिकी लड़ाकू विमान गिराए जाने के बाद शुरू हुई एक हाई-रिस्क सैन्य कहानी सफल रही. अमेरिकी सेना ने भीषण गोलीबारी और दुश्मन के दबाव के बीच अपने पायलट को सुरक्षित निकाल लिया. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया कि युद्ध जैसे हालात में “कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू” (CSAR) मिशन कितने अहम और चुनौतीपूर्ण होते हैं. लेकिन अमेरिका ने अपने पायलट को बचाया कैसे? इस लापता पायलट की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है. इन्हें अलग-अलग रिपोर्ट्स में एयरमैन और कर्नल के रूप में भी बताया गया है. 

शुक्रवार को ईरान ने एक अमेरिकी एफ-15 ई (ईगल स्ट्राइक) लड़ाकू विमान को मार गिराया था, जिसके बाद उसके दो क्रू मेंबर ईरानी क्षेत्र में फंस गए. एक तो किसी तरह बच गया, लेकिन दूसरा पायलट फंस गया था.  ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन पायलटों को जिंदा पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया. 

माना जा रहा था कि अगर पायलट पकड़ में आ जाते, तो ईरान उन्हें अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत में दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता था. इसके लिए ईरान ने 60,000 डॉलर का ईनाम भी रखा था. इस लापता पायलट की तलाश में ईरान के कबीलाई इलाकों के लोग लगे हुए थे. उनका एक वीडियो भी सामने आया था. 

लेकिन, इस बीच अमेरिका ने तेजी दिखाते हुए एक सफल और सीक्रेट रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस मिशन की सफलता की पुष्टि की. उन्होंने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे साहसी बचाव अभियानों में से एक बताया और कहा कि पायलट अब पूरी तरह सुरक्षित है. 

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बचाए गए पायलट की एक प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो- एआई जेनरेटेड.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा

हमने उसे ढूंढ लिया! मेरे प्यारे अमेरिकियों, पिछले कुछ घंटों में संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने हमारे एक अद्भुत क्रू मेंबर अधिकारी के लिए, जो कि एक बेहद सम्मानित कर्नल भी हैं, अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक को अंजाम दिया है. और मुझे आपको यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि वह अब पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं!

उन्होंने आगे बताया कि यह पायलट ईरान के खतरनाक पहाड़ी इलाकों में दुश्मन की रेखाओं के पीछे थे, जहां दुश्मन लगातार उसका पीछा कर रहे थे और हर घंटे उसके करीब पहुंच रहे थे. लेकिन चमत्कारी खोज और बचाव अभियान चलाते हुए सैन्य इतिहास में पहली बार दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग, दुश्मन के गहरे इलाकों से सुरक्षित निकाला गया है.

सीआईए ने की शुरुआत, ट्रंप ने दी मंजूरी

यह ऑपरेशन ईरान के देहदाश्त इलाके में अंजाम दिया गया, जहां रातभर अमेरिकी स्पेशल फोर्स और IRGC के बीच मुठभेड़ चलती रही. अमेरिकी सेना की विशेष CSAR टीम पहले से ही इस तरह के संभावित हालात के लिए तैनात थी. जैसे ही विमान गिरने की खबर मिली, टीम ने तुरंत पायलट की लोकेशन ट्रैक करनी शुरू कर दी.

सीबीएस न्यूज के अनुसार, सीआईए ने इस अभियान को चलाने के लिए ईरान के अंदर एक भ्रामक सूचना फैलाई, जिसमें कहा गया कि अमेरिकी सेना ने पायलट को खोज लिया है और उसे देश से बाहर निकालने के लिए जमीनी रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस दौरान CIA ने अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए उस क्रू सदस्य को एक पहाड़ी दरार (क्रेविस) में ट्रैक किया. यह इलाका ईरान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद के पहाड़ी क्षेत्र में है. 

पायलट के पास मौजूद सैटेलाइट-लिंक्ड रेडियो सिग्नल इस मिशन में बेहद अहम साबित हुआ. इसी सिग्नल के जरिए उसकी सटीक स्थिति का पता लगाया गया. इस बीच पायलट भी जमीन पर लगातार अपनी लोकेशन बदलते हुए ईरानी सुरक्षा बलों से बचता रहा.

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अमेरिका का ईरान में ‘मिशन पायलट बचाओ’.

दो दिनों तक एक पिस्तौल की बदौलत बचा अमेरिकी पायलट

वह करीब दो दिनों तक छिपकर खुद को सुरक्षित रखने में कामयाब रहा. CIA ने उसकी सटीक लोकेशन पेंटागन और व्हाइट हाउस के साथ साझा की, जिसके बाद राष्ट्रपति ने तुरंत रेस्क्यू मिशन का आदेश दिया. CIA लगातार रियल-टाइम जानकारी देती रही. ट्रंप ने अपने मैसेज में बताया कि उनके निर्देश पर, अमेरिकी सेना ने उसे वापस लाने के लिए दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस दर्जनों विमानों को भेजा.

अमेरिकी अधिकारियों और व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, इस खतरनाक सैन्य अभियान के दौरान बमबारी और भारी हथियारों का इस्तेमाल कर ईरानी सैनिकों को उस इलाके से दूर रखा गया, जहां अधिकारी के छिपे होने की आशंका थी. फंसे रहने के दौरान उसके पास अपनी सुरक्षा के लिए सिर्फ एक पिस्तौल थी.

ईरान की कोशिशों को अमेरिकी सेना ने किया नेस्तनाबूत

ईरान की ओर से भी पायलट को पकड़ने के लिए हरसंभव कोशिश की गई. इलाके में घेराबंदी कर दी गई थी और स्थानीय लोगों व मिलिशिया को भी उसकी तलाश में लगा दिया गया. एयर एंड स्पेस फोर्सेज मैगजीन की एक रिपोर्ट्स में दावा है कि IRGC के जवान पायलट के काफी करीब पहुंच गए थे, लेकिन अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन ने एयरमैन की रक्षा करते हुए उन पर हमला किया, वे सभी पायलट के तीन किलोमीटर के दायरे में आ गए थे.

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने 160वीं स्पेशल ऑपरेशंस एविएशन रेजिमेंट (नाइट स्टॉकर्स) को भी मैदान में उतारा. हेलीकॉप्टरों के जरिए कमांडो टीम ने इलाके में उतरकर पायलट को बाहर निकाला. हालांकि इस दौरान अमेरिकी हेलीकॉप्टरों को नुकसान भी पहुंचा और कुछ सैनिकों के घायल होने की खबर है. हालांकि, इसकी पूरी जानकारी अभी साझा नहीं की गई है. ट्रंप ने भी बताया कि बचाए गए पायलट को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वह जल्द ही पूरी तरह ठीक हो जाएंगे.

अमेरिका ने खुद तबाह किए अपने जहाज

रेस्क्यू टीम को बाहर निकालने के लिए भेजे गए दो ट्रांसपोर्ट विमान ईरान के एक दूरदराज के बेस से उड़ान नहीं भर सके. अधिकारियों के अनुसार, दुश्मन के हाथ लगने से बचाने के लिए उन विमानों को नष्ट कर दिया गया और कमांडो को निकालने के लिए तीन अतिरिक्त विमान भेजे गए. वहीं, बचाए गए अधिकारी को इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया. इन तीनों रेस्क्यू विमानों ने ईरान से कुवैत तक उड़ान भरी और वे एक-दूसरे के थोड़े अंतर पर थे. 

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एक सफल ऑपरेशन

पूरे घटनाक्रम को अमेरिकी अधिकारियों ने फिल्मी लेकिन बेहद खतरनाक मिशन करार दिया है, जिसमें हर पल जोखिम था, लेकिन आखिरकार अमेरिका अपने सैनिक को दुश्मन के कब्जे में जाने से पहले ही वापस लाने में सफल रहा. ट्रंप ने सफल ऑपरेशन के बाद कहा कि हम कभी भी किसी अमेरिकी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ेंगे!

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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