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Home World ठुकरा दिया US का स्वास्थ्य समझौता, अमेरिका ने 40 गुना छोटे देश से ऐसा क्या मांग लिया?

ठुकरा दिया US का स्वास्थ्य समझौता, अमेरिका ने 40 गुना छोटे देश से ऐसा क्या मांग लिया?

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ठुकरा दिया US का स्वास्थ्य समझौता, अमेरिका ने 40 गुना छोटे देश से ऐसा क्या मांग लिया?
घाना ने डेटा प्राइवेसी का हवाला देते हुए अमेरिकी समझौता रद्द किया. फोटो- कैनवा.

Ghana Rejects US Health Deal: घाना ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित स्वास्थ्य समझौते को अस्वीकार कर दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण डेटा की गोपनीयता को लेकर चिंता है. घाना अब इस मुद्दे पर नए सिरे से बातचीत करना चाहता है ताकि उसके नागरिकों की संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रह सके.

समझौते में क्या थी आपत्ति

एपी की रिपोर्ट के अनुसार, घाना के डेटा संरक्षण आयोग के कार्यकारी निदेशक अर्नोल्ड कावारपुओ ने बताया कि प्रस्तावित समझौते में ऐसे प्रावधान थे, जिनसे अमेरिकी संस्थाओं को घाना के स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील डेटा तक व्यापक पहुंच मिल सकती थी. उन्होंने कहा कि यह पहुंच सामान्य जरूरत से कहीं ज्यादा थी और इसमें पर्याप्त सुरक्षा उपाय भी नहीं थे.

अमेरिका का क्या कहना है?

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि मंत्रालय आमतौर पर द्विपक्षीय (दो देशों के बीच) वार्ता की जानकारी सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत करने के प्रयास जारी हैं.

‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत समझौते

रिपोर्ट के अनुसार, युनाइटेड स्टेट्स ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत 30 से ज्यादा देशों के साथ इस तरह के स्वास्थ्य समझौते किए हैं. इनमें ज्यादातर अफ्रीकी देश शामिल हैं. इन समझौतों के तहत अमेरिका उन देशों को आर्थिक मदद देने की पेशकश करता है, जिनकी स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर है या जिन्हें हालिया फंडिंग कटौती से नुकसान हुआ है.

मदद के साथ शर्तों पर सवाल, अफ्रीकी देशों ने जताई चिंता

इन समझौतों का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना और बीमारियों से लड़ने में मदद करना है. हालांकि, कई देशों ने डेटा साझा करने की शर्तों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इससे उनके नागरिकों की निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है. जिम्बॉब्वे पहले ही इस समझौते को ठुकरा चुका है. वहीं जाम्बिया ने भी समझौते के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई है, हालांकि वहां अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

इस फैसले के बाद यह साफ है कि अफ्रीकी देश अब विदेशी समझौतों में डेटा सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं और किसी भी समझौते से पहले अपनी शर्तों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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घाना कितना छोटा है; क्षेत्रफल और इकॉनमी के लिहाज से 

घाना, अमेरिका की तुलना में काफी छोटा है.ो इसका क्षेत्रफल लगभग 238,535 वर्ग किलोमीटर (या 92,099 वर्ग मील) है, जो लगभग यूएस के ओरेगन राज्य के बराबर है. यूएस का क्षेत्रफल 3.8 मिलियन वर्ग मील है, जो घाना से लगभग 40 गुना बड़ा है. अर्थव्यवस्था के लिहाज से देखें, तो नॉमिनल जीडीपी के आधार पर आर्थिक तुलना करें, तो 2026 में अमेरिका की जीडीपी लगभग 28.8 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है. वहीं, 2026 में घाना की जीडीपी लगभग 82.3 बिलियन डॉलर हो सकती है. इसका मतलब है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था घाना से लगभग 350 गुना बड़ी है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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