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Home World एप्स्टीन का शिकार बनी महिलाओं को मिलेगा इतना मुआवजा, कोर्ट ने दी प्रारंभिक मंजूरी

एप्स्टीन का शिकार बनी महिलाओं को मिलेगा इतना मुआवजा, कोर्ट ने दी प्रारंभिक मंजूरी

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एप्स्टीन का शिकार बनी महिलाओं को मिलेगा इतना मुआवजा, कोर्ट ने दी प्रारंभिक मंजूरी
जेफ्री एप्स्टीन ने अपनी गर्लफ्रेंड घिसलीन मैक्सवेल के साथ मिलकर लड़कियों को शिकार बनाया था.

Epstein Victims Compensation: जेफ्री एप्स्टीन द्वारा 2008 से यौन शोषण का शिकार हुईं करीब 75 महिलाओं को 7.25 करोड़ डॉलर के उस मुआवजा कोष से सहायता जारी की सकती है. यह बैंक ऑफ अमेरिका ने पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों के साथ समझौते के तहत स्थापित किया है. केस लड़ रहे वकीलों ने इस बात की जानकारी साझा की.

यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जेड एस राकोफ ने बृहस्पतिवार को इस समझौते को प्रारंभिक मंजूरी दे दी और अंतिम मंजूरी के लिए 27 अगस्त को सुनवाई तय की है. उन्होंने वकीलों को यह भी निर्देश दिया कि वे शुक्रवार तक उन प्रकाशनों की विस्तृत सूची पेश करें, जिनके जरिए एप्स्टीन के पीड़ितों को इस मुआवजा कोष की जानकारी दी जा सके. न्यायाधीश ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ‘कोई भी पीड़िता सहायता से वंचित न रह जाए.’

पीड़ित महिलाओं ने दायर किया था केस

एप्स्टीन द्वारा यौन शोषण का शिकार हुई महिलाओं के वकीलों ने बैंक के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि जून 2008 से लेकर जुलाई 2019 की शुरुआत तक बैंक ने उससे जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि इस दौरान एपस्टीन लगातार लड़कियों और महिलाओं का शोषण कर रहा था. 

वकील और जज क्या बोले?

बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान वकील डेविड बोइस ने कहा कि पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों का अनुमान है कि 60 से 75 महिलाएं दावे पेश करेंगी, जिनके आधार पर वे इस समझौता कोष से मुआवजा पाने की पात्र होंगी. उन्होंने यह भी कहा, ‘संभव है कि कुछ पीड़ित अब भी हमारी पहचान में नहीं आई हों.’

न्यायाधीश राकोफ ने कहा, ‘जेफ्री एप्स्टीन के जघन्य अपराधों का शिकार हुई पीड़िताओं की पीड़ा को कम नहीं किया जा सकता लेकिन वे उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं से न्यायोचित मुआवजा पाने की हकदार हैं, जिन्होंने जानबूझकर, लापरवाही से या किसी अन्य अवैध तरीके से उसके यौन अपराधों में सहयोग किया.’

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क्या था एपस्टीन से जुड़ा मामला?

एपस्टीन को 6 जुलाई 2019 को यौन अपराधों के आरोपों में गिरफ्तारी किया गया था. एप्स्टीन की अगस्त 2019 में मैनहैटन की एक संघीय जेल में मौत हो गई, जिसे आत्महत्या करार दिया गया. उसके खिलाफ महिलाओं, खासकर अंडरएज गर्ल्स के साथ यौन अपराधों की जांच चल रही है. यह सारे  अपराध 1990 से 2005 तक किए गए. 

इनमें विश्व भर के बड़े नेता और ताकतवर लोग शामिल थे. लड़कियों के साथ इन अपराधों को उसके निजी द्वीप- लिटिल सेंट जेम्स अंजाम दिया गया. यह कैरिबियन सागर में स्थित अमेरिकी वर्जिन द्वीप समूह का हिस्सा है. यहां पर एपस्टीन के प्राइवेट जेट- लोलिता एक्सप्रेस के जरिए लोग जाते थे. 

2005 में पहली बार यह मामला सामने आया, जब एक 14 साल की लड़की ने एपस्टीन के खिलाफ केस किया. उसके बाद तीन साल तक यह मामला चला और 2009 में उसे 18 महीने की सजा सुनाई गई, हालांकि, 13 महीने बाद ही वह रिहा हो गया. 

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अब तक जारी किए गए लाखों दस्तावेज

2017 में एक बार फिर एपस्टीन का मामला खुला. यह मी टू मूवमेंट की वजह से चर्चा में आया था.इसमें वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पूर्व प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन जैसों का भी नाम आया. बड़े नाम आने के बाद पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो अब तक चल रही है.  

इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने जनवरी 2026 के अंत तक 30 लाख से अधिक दस्तावेज जारी किए हैं. इन फाइलों में 2,000 से अधिक वीडियो और 1,80,000 तस्वीरें शामिल हैं, इससे उसके अपराधों के व्यापक दायरे का अंदाजा लगाया जा सकता है. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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