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Home World लंदन में खुला फिलिस्तीन का दूतावास, राजदूत ने शेयर कीं फोटोज और कहा; इससे ये 5 चीजें हुईं हासिल

लंदन में खुला फिलिस्तीन का दूतावास, राजदूत ने शेयर कीं फोटोज और कहा; इससे ये 5 चीजें हुईं हासिल

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लंदन में खुला फिलिस्तीन का दूतावास, राजदूत ने शेयर कीं फोटोज और कहा; इससे ये 5 चीजें हुईं हासिल
लंदन में फिलिस्तीन दूतावास का उद्घाटन हुआ. फोटो- एक्स (@hzomlot)

Embassy Of Palestine In London: लंदन में सोमवार को फिलिस्तीन राज्य के दूतावास का औपचारिक उद्घाटन किया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है. यह पहल गाजा में बीते दो वर्षों से चले आ रहे तनावपूर्ण हालात के बाद ब्रिटेन और फिलिस्तीन के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है. इस मौके पर लंदन में रह रहे फिलिस्तीनी समुदाय ने उत्सव और भावनात्मक एकजुटता के साथ इस उपलब्धि का स्वागत किया. ब्रिटेन में फिलिस्तीन के राजदूत हुसाम जोमलोत ने दूतावास भवन के बाहर लगी आधिकारिक पट्टिका का अनावरण किया और इसे फिलिस्तीनी जनता के लिए एक यादगार और ऐतिहासिक पल बताया.

राजदूत जोमलोत ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर उद्घाटन समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि यह दूतावास ब्रिटिश धरती पर फिलिस्तीन की मौजूदगी का प्रतीक है. उन्होंने इसे शांति, दृढ़ता (सुमूद), सम्मान और न्याय व स्वतंत्रता के लिए फिलिस्तीनी लोगों के लंबे संघर्ष का प्रतिबिंब बताया. उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि फिलिस्तीन न केवल मौजूद है, बल्कि हर चुनौती के बावजूद कायम रहेगा.

पश्चिमी लंदन स्थित इस मिशन के बाहर एकत्र लोगों को संबोधित करते हुए जोमलोत ने कहा कि नए साल की शुरुआत इस तरह के ऐतिहासिक क्षण के साथ होना गर्व की बात है. उनके अनुसार, यह कदम न सिर्फ ब्रिटेन-फिलिस्तीन संबंधों को मजबूती देता है, बल्कि फिलिस्तीनी जनता की आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता की दशकों पुरानी आकांक्षा को भी नया बल प्रदान करता है.

गौरतलब है कि यह घटनाक्रम सितंबर 2025 में ब्रिटेन द्वारा फिलिस्तीन राज्य को औपचारिक मान्यता दिए जाने के बाद सामने आया है. उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई अन्य देशों के साथ मिलकर फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देने की घोषणा की थी, जिसे पश्चिमी देशों की नीति में एक अहम बदलाव के तौर पर देखा गया था. हालांकि इजरायल इस कदम का पूरी तरह विरोध करता रहा है. वह गाजा में हमास को सबसे बड़ा दुश्मन मानता है और 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमले के बाद से उसके समूल विनाश पर जुटा हुआ है. 

लंबे समय से संघर्ष में है फिलिस्तीन

फिलिस्तीन पश्चिम एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है, जिसकी पहचान हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक महत्व से जुड़ी हुई है. यरुशलम, गाजा और वेस्ट बैंक जैसे इलाके यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों, तीनों के लिए पवित्र माने जाते हैं. 1949 में इजरायल की स्थापना के बाद से फिलिस्तीन का सवाल अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बन गया. फिलिस्तीनी जनता लंबे समय से एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र की मांग करती आ रही है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन भी मिला है.

हाल के दशकों में फिलिस्तीन संघर्ष, कब्जे, हिंसा और मानवीय संकट का पर्याय बन गया है, खासकर गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में. इसके बावजूद फिलिस्तीनी समाज ने अपनी पहचान, संस्कृति और आत्मनिर्णय की आकांक्षा को बनाए रखा है, जिसे वे “सुमूद” यानी दृढ़ता के रूप में परिभाषित करते हैं. कई देशों द्वारा फिलिस्तीन राज्य को मान्यता दिया जाना इस संघर्ष में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जाता है और अब ब्रिटेन में दूतावास खुलना फिलिस्तीनी जनता की स्वतंत्रता व न्याय की उम्मीदों से जोड़कर देखा जा रहा है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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