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Home World क्या है डूरंड लाइन विवाद? अफगान-पाक की 2611 किमी लंबी सरहद क्यों सुलग रही है, जानें

क्या है डूरंड लाइन विवाद? अफगान-पाक की 2611 किमी लंबी सरहद क्यों सुलग रही है, जानें

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क्या है डूरंड लाइन विवाद? अफगान-पाक की 2611 किमी लंबी सरहद क्यों सुलग रही है, जानें
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन विवाद. इमेज एआई से बनाई गई है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हालात अब पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं. डूरंड लाइन (Durand Line) पर शुरू हुई झड़प अब ‘खुली जंग’  (ओपन वॉर) में बदल गई है. दोनों तरफ से भारी बमबारी, हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई हो रही है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो इसे ‘ओपन वॉर’ करार दे दिया है. आइए समझते हैं कि आखिर 2,611 किमी लंबी यह सरहद क्यों सुलग रही है और अब तक क्या-क्या हुआ.

डूरंड लाइन: आखिर इस बॉर्डर पर झगड़ा क्यों है?

इस पूरे फसाद की जड़ ‘डूरंड लाइन’ है. यह 2,611 किमी लंबी वह सीमा रेखा है जिसे 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान खींचा गया था. पाकिस्तान इसे अपनी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान की कोई भी सरकार (चाहे वो पिछली हो या अब की तालिबान सरकार) इसे मानने को तैयार नहीं है. अफगानिस्तान का कहना है कि यह रेखा उनके देश को बांटती है. यही वजह है कि यहां अक्सर गोलीबारी और तनाव बना रहता है.

कैसे शुरू हुआ ताजा विवाद? 

ताजा झड़प तब शुरू हुई जब काबुल ने पाकिस्तान पर अफगान इलाके में घुसकर आम नागरिकों पर हवाई हमले करने का आरोप लगाया.

26 फरवरी (9 रमजान): रात 8:00 बजे अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने पाकिस्तान की इस ‘जुर्रत’ का जवाब देने के लिए जवाबी कार्रवाई शुरू की.

अफगानिस्तान का दावा: अफगान सेना ने पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान जैसे इलाकों में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों को निशाना बनाया.

नुकसान का आंकड़ा: अफगान रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. उन्होंने 2 बेस और 19 चौकियों पर कब्जा करने का दावा किया है. साथ ही एक टैंक को तबाह करने और भारी मात्रा में हथियार जब्त करने की बात कही है. इस लड़ाई में अफगानिस्तान ने अपने 8 मुजाहिदीन के शहीद होने और 11 के घायल होने की जानकारी दी है.

पाकिस्तान का पलटवार: ऑपरेशन ‘गजब लिल हक’

पाकिस्तान ने भी इन दावों पर चुप्पी तोड़ी और ‘गजब लिल हक’ नाम से एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया.

पाकिस्तानी मीडिया (एआरवाई और जियो न्यूज) के अनुसार: पाकिस्तान का दावा है कि उन्होंने 133 अफगान तालिबान लड़ाकों को मार गिराया है और 200 से ज्यादा घायल हैं. उन्होंने तालिबान की 27 चौकियों को तबाह करने और 9 पर कब्जे का दावा किया है.

रक्षा मंत्री की चेतावनी: ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब पानी सिर से ऊपर निकल चुका है. उन्होंने तालिबान पर आतंकवाद एक्सपोर्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब हमारे बीच ‘ओपन वॉर’ है. उन्होंने कहा कि तालिबान शासन के खिलाफ ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ शुरू कर दिया है.

भारत पर मढ़ा दोष: बिना सबूत लगाए गंभीर आरोप

हमेशा की तरह, पाकिस्तान ने अपनी अंदरूनी सुरक्षा की विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश की. फ्रांस 24 को दिए इंटरव्यू में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि दिल्ली और काबुल मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ ‘प्रॉक्सि वॉर’ (छद्म युद्ध) लड़ रहे हैं. हालांकि, जब पत्रकार ने सबूत मांगे, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था. उन्होंने बस इतना कहा कि भारत इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा.

बड़े नेताओं ने क्या कहा?

हामिद करजई (पूर्व राष्ट्रपति): उन्होंने पाकिस्तानी हवाई हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि अफगान अपनी धरती की रक्षा करना जानते हैं. उन्होंने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह बमबारी के बजाय अच्छे पड़ोसी की तरह रहना सीखे.

जबीहुल्लाह मुजाहिद (तालिबान प्रवक्ता): उन्होंने पाकिस्तान के हमलों को ‘कायरतापूर्ण’ बताया और कहा कि डूरंड लाइन पर उनके ‘मंसूरी कोर’ और ‘खालिद बिन वलीद कोर’ के सैनिक डटे हुए हैं.

आतंकवाद का बिजनेस और अंदरूनी राजनीति: निर्वासित अफगान सांसद मरियम सोलेमानखिल ने एक इंटरव्यू (एनआई) में पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने खुद तालिबान जैसे गुट बनाए और आतंकवाद को एक बिजनेस की तरह इस्तेमाल किया, जो अब खुद उन पर भारी पड़ रहा है. मरियम का कहना है कि इस लड़ाई में सिर्फ पश्तून और बलूच लोग मर रहे हैं, जबकि पाकिस्तान के पंजाबी इलाकों पर कोई आंच नहीं आ रही. उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि पाकिस्तान इस लड़ाई का बहाना बनाकर IMF (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) से और ज्यादा मदद मांगने की फिराक में है.

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अभी क्या हैं हालात?

सीमा पर अभी भी भारी तनाव है. तोरखम गेट और आसपास के इलाकों में दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं. पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि फिलहाल उनका तालिबान सरकार से कोई सीधा संपर्क नहीं है और वे मध्यस्थता के लिए दूसरे देशों की मदद लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है. काबुल में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, जिससे लग रहा है कि यह संघर्ष अभी और खिंच सकता है.

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