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Home World दुबई से आया खास दोस्त! ये 5 वजहें बताती हैं क्यों UAE भारत के लिए बेहद अहम है?

दुबई से आया खास दोस्त! ये 5 वजहें बताती हैं क्यों UAE भारत के लिए बेहद अहम है?

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दुबई से आया खास दोस्त! ये 5 वजहें बताती हैं क्यों UAE भारत के लिए बेहद अहम है?
PM Modi And UAE Crown Prince Sheikh Hamdan

UAE Crown Prince Visit India: दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद अल मकतूम 8 और 9 अप्रैल को भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर होंगे. विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस दौरान शेख हमदान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे, साथ ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी उनकी बैठक निर्धारित है. इस यात्रा के दौरान वे एक उच्चस्तरीय व्यापार गोलमेज सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे, जिसका उद्देश्य भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाना है.

भारत सरकार ने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. दुबई के साथ भारत के बहुआयामी रिश्तों को गति देने की दिशा में यह यात्रा निर्णायक साबित हो सकती है.

भारत-UAE व्यापारिक रिश्तों में ऐतिहासिक प्रगति

भारत और यूएई के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) 18 फरवरी 2022 को एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था. इस समझौते के तीन साल 18 फरवरी 2025 को पूरे हो गए हैं. यह समझौता 1 मई 2022 से प्रभावी हुआ और इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.

जहां 2020-21 में द्विपक्षीय व्यापार 43.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 83.7 बिलियन डॉलर हो गया. केवल अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच ही व्यापार 71.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इसका सीधा संकेत है कि दोनों देशों का लक्ष्य — 2030 तक गैर-तेल व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाना — अब वास्तविकता के करीब पहुंच रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि भारत का गैर-तेल निर्यात भी इस समझौते के बाद तेजी से बढ़ा है. वित्त वर्ष 2023-24 में यह 27.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो कि CEPA लागू होने के बाद 25.6% की औसत वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है.

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रणनीतिक मोर्चों पर बढ़ता सहयोग

भारत और यूएई के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं. पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक और भू-राजनीतिक क्षेत्रों में भी दोनों देशों का सहयोग मजबूत हुआ है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, हाल ही में भारत, श्रीलंका और यूएई ने मिलकर श्रीलंका में एक ऊर्जा हब विकसित करने पर सहमति जताई है. यह साझेदारी खास इसलिए है क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की मौजूदगी और प्रभाव को संतुलित करने के लिहाज से भारत के लिए यह रणनीतिक रूप से अहम कदम है.

इसके अलावा, यूएई को खाड़ी क्षेत्र में भारत का एक उदार और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है. यूएई की नीति कट्टरपंथ से दूर रहने की है, जो उसे भारत के और करीब लाती है. दोनों देशों के साझा हित, समावेशी विचारधारा और सहिष्णुता के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ने रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाया है.

धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक समावेश का प्रतीक

यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंधों में नई गति आई है. भारतीय समुदाय के प्रति उनके दृष्टिकोण और समर्थन ने भारत में उनके प्रति सम्मान को और बढ़ाया है. अबू धाबी में एक भव्य हिंदू मंदिर और एक सिख गुरुद्वारा को मंजूरी देना इस बात का प्रमाण है कि यूएई धार्मिक विविधता और सह-अस्तित्व को सम्मान देता है.

भारतीय प्रवासियों की भूमिका

भारत और यूएई के संबंधों का सबसे मजबूत आधार जन-जन का जुड़ाव है. यूएई में भारतीय प्रवासी सबसे बड़ा जातीय समूह हैं. वहां की कुल आबादी का लगभग 30% हिस्सा भारतीय मूल के लोगों से बना है. वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार, करीब 35 लाख भारतीय यूएई में रह रहे हैं, जिनमें से 20% अबू धाबी में और बाकी दुबई व अन्य उत्तरी अमीरात में बसे हुए हैं.

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ये प्रवासी न केवल यूएई की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं, बल्कि भारत के लिए भी बेहद अहम हैं. 2022 में, यूएई में रहने वाले भारतीयों ने भारत को लगभग 20 बिलियन डॉलर की धनराशि भेजी थी, जो देश की विदेशी मुद्रा भंडार और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण योगदान है.

भारत-यूएई रिश्तों का भविष्य

शेख हमदान की भारत यात्रा प्रतीकात्मक रूप से और व्यावहारिक रूप से दोनों स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. यह यात्रा न सिर्फ राजनीतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी, बल्कि व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और सांस्कृतिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में भी नई दिशा प्रदान करेगी. भारत और यूएई के रिश्ते आज एक ऐसे मुकाम पर हैं जहां आपसी विश्वास, साझा हित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण इन संबंधों को वैश्विक मंच पर और भी सशक्त बना रहे हैं.

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