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400 साल बाद बंद हो रही पोस्टल सर्विस, 30 दिसंबर होगा आखिरी दिन, केवल यादों में रह जाएगा लाल बक्सा

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400 साल बाद बंद हो रही पोस्टल सर्विस, 30 दिसंबर होगा आखिरी दिन, केवल यादों में रह जाएगा लाल बक्सा
डेनमार्क की पोस्टल सर्विस 400 साल बाद 30 दिसंबर 2025 से चिट्ठियां पहुंचाना बंद कर देगी.

Denmark’s postal service will stop after 400 years: डिजिटल युग में तकनीक ने संचार के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है. ई-मेल, मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन सेवाओं ने जहां दुनिया को तेज और सुविधाजनक बना दिया है, वहीं पारंपरिक डाक व्यवस्था धीरे-धीरे हाशिये पर चली गई है. कभी जो चिट्ठियां भावनाओं, सूचनाओं और आधिकारिक संदेशों का सबसे भरोसेमंद माध्यम हुआ करती थीं, आज उनकी जगह डिजिटल विकल्पों ने ले ली है. इसी बदलते समय की तस्वीर डेनमार्क में देखने को मिल रही है, जहां सदियों पुरानी डाक परंपरा अब इतिहास बनने जा रही है. डेनमार्क की सरकारी डाक सेवा पोस्टनॉर्ड (PostNord) 30 दिसंबर तक पत्रों की डिलीवरी पूरी तरह बंद करने जा रही है. 

पोस्टनॉर्ड ने डाक सेवा को बंद करने की वजह पत्रों की संख्या में 90 प्रतिशत की भारी गिरावट को बताया है. 30 दिसंबर को लगभग 400 साल पुरानी पत्र वितरण की परंपरा का अंत हो जाएगा. स्वीडन और डेनमार्क की डाक सेवाओं के विलय के बाद 2009 में गठित पोस्टनॉर्ड ने इस साल की शुरुआत में ही घोषणा कर दी थी कि डेनमार्क में वह 1,500 कर्मचारियों की छंटनी करेगी. इसके साथ ही करीब 1,500 लाल रंग के पोस्ट बॉक्स के भी हटाएगी. कंपनी का कहना है कि डेनमार्क समाज में बढ़ती डिजिटलाइजेशन के चलते यह फैसला लिया गया है.

1624 से हो रही थी पोस्टल सर्विस

डेनमार्क में 1624 से डाक सेवा के तहत पत्रों की डिलीवरी की जा रही थी, लेकिन देश में पत्र भेजने की संख्या में करीब 90 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है. पोस्टनॉर्ड ने अपने बयान में कहा कि ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन के कारण पत्र भेजने की मांग में तेज गिरावट आई है, जिससे कंपनी अब पार्सल डिलीवरी पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है. डेनमार्क दुनिया के सबसे अधिक डिजिटल देशों में शामिल है.

बचे पोस्ट बॉक्स हुए नीलाम

इस महीने की शुरुआत में लाल रंग के पोस्ट बॉक्स बिक्री के लिए रखे गए थे और महज तीन घंटे के भीतर करीब 1,000 पोस्ट बॉक्स बिक गए. अच्छी स्थिति वाले पोस्ट बॉक्स की कीमत 235 पाउंड रखी गई थी, जबकि ज्यादा घिसे हुए बॉक्स 176 पाउंड में बेचे गए. इसके अलावा जनवरी में 200 और पोस्ट बॉक्स की नीलामी की जाएगी. 

हालांकि डेनमार्क में भले ही पोस्टनॉर्ड बंद हो रहा है, लेकिन यह कंपनी स्वीडन में अपनी सेवाएं जरूर जारी रखेगी. पोस्टनॉर्ड ने कहा है कि डेनमार्क में इस्तेमाल नहीं किए गए डाक टिकटों का तय समय के अंदर रिफंड किया जाएगा.

दूसरी कंपनी देगी सेवा

वैसे डेनमार्क में ऐसा भी नहीं है कि अब कोई कंपनी डाक सेवा नहीं देगी. एक अन्य डेनिश कंपनी ‘डाओ’ (Dao) के जरिए लोग अपने पत्र भेज सकेंगे, जो पहले से ही देश में पत्र वितरण का काम कर रही है. हालांकि डाओ का कहना है कि उसके शोध के मुताबिक 18 से 34 वर्ष की उम्र के लोग अन्य आयु वर्गों की तुलना में दो से तीन गुना ज्यादा पत्र भेजते हैं. डेनमार्क के कानून के अनुसार देश में पत्र भेजने का विकल्प बना रहना जरूरी है. इसका मतलब यह है कि यदि भविष्य में डाओ भी पत्र वितरण बंद कर देती है, तो डेनमार्क सरकार किसी अन्य कंपनी को यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए बाध्य होगी.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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