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Home World पाकिस्तान, चीन, रूस और यूएस के मुकाबले डिफेंस पर कितना पैसा खर्च कर रहा भारत? 2026 के बजट से कितना असर?

पाकिस्तान, चीन, रूस और यूएस के मुकाबले डिफेंस पर कितना पैसा खर्च कर रहा भारत? 2026 के बजट से कितना असर?

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पाकिस्तान, चीन, रूस और यूएस के मुकाबले डिफेंस पर कितना पैसा खर्च कर रहा भारत? 2026 के बजट से कितना असर?
टॉप कंट्रीज का रक्षा बजट.

Defence Budget of India US Pakistan Russia China Compare: लगातार बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और विश्वभर में संघर्ष के बीच देश अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहे हैं, जिससे सैन्य शक्ति की होड़ और तेज हो गई है. दुनिया के सबसे ताकतवर देश अपनी सेना पर भारी भरकम खर्च भी करते हैं. विश्व की नंबर 1 ताकत अमेरिका है, जो अपनी आर्मी के लिए सबसे बड़ा बजट जारी करता है. वहीं रूस और चीन भी कम नहीं है. 1 फरवरी 2026 को भारत ने अपना बजट जारी कर दिया. 15% से अधिक की बढ़ोतरी के बाद, भारत का सेना बजट 7 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है. ऐसे में एक तुलनात्मक अध्ययन के रूप में हम अमेरिका, रूस, चीन और पाकिस्तान के बजट के साथ भारत को देख रहे हैं.

ग्लोबल फायरपावर (Global Firepower) ने इसी संदर्भ में 2026 के लिए सैन्य शक्ति रैंकिंग जारी की थी, जिसमें 145 देशों की सेनाओं की पारंपरिक क्षमता का आकलन 60 से अधिक मानकों के आधार पर किया गया है. हर देश को एक पावर इंडेक्स (PwrIndx) स्कोर दिया गया. इस स्कोर में कम अंक वाला देश अपनी पारंपरिक सैन्य ताकत में ज्यादा सक्षम माना जाता है. ग्लोबल फायरपावर के अनुसार, आदर्श PwrIndx स्कोर 0.0000 होता है, जिसे वर्तमान कैलकुलेश मेथड में हासिल करना पॉसिबल नहीं है. इसलिए जितना कम स्कोर होगा, देश की सैन्य क्षमता उतनी ही अधिक मानी जाती है.

टॉप 10 में कौन-कौन से देश हैं?

इस रैंकिंग में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ने 0.0741 के PwrIndx स्कोर के साथ दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी है और वह 2005 से शीर्ष पर बना हुआ है. उसके बाद रूस (0.0791) और चीन (0.0919) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. भारत (PwrIndx 0.1346) चौथे स्थान पर है और दक्षिण कोरिया (0.1642) पांचवें स्थान पर है. पिछले वर्ष की तरह शीर्ष पांच की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं आया है.

फ्रांस ने 2025 के सातवें स्थान से एक स्थान ऊपर उठकर छठा स्थान हासिल किया है, जबकि जापान भी सातवें स्थान पर पहुंच गया. यूनाइटेड किंगडम (UK) आठवें स्थान पर खिसक गया, जबकि तुर्किये (Turkey) नौवें और इटली (Italy) दसवें स्थान पर बने हैं. पाकिस्तान की रैंकिंग में गिरावट जारी है. वह 2024 में नौवें, 2025 में बारहवें और अब 14वें स्थान पर है. उसके PwrIndx स्कोर 0.2626 दर्ज हुआ है. वहीं जर्मनी ने उल्लेखनीय उछाल दिखाया है, वह 2024 में 19वें स्थान पर था और अब 12वें स्थान पर पहुंच गया है, जो उसकी सैन्य क्षमताओं में सुधार को दर्शाता है. यूरोप में डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद अंतर स्पष्ट साफ नजर आ रहा है.

अमेरिका: वैश्विक सैन्य वर्चस्व बनाए रखने की तैयारी

अमेरिका पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश है. 2026 के लिए लगभग 901 अरब डॉलर का बजट स्वीकृत हो चुका है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने 2027 के लिए इसे बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव दिया है. इतना बड़ा बजट सिर्फ सैनिक वेतन या हथियार खरीद तक सीमित नहीं होता. इसमें दुनिया भर में सैन्य ठिकाने, एडवांस फाइटर जेट, एयरक्राफ्ट कैरियर, मिसाइल डिफेंस सिस्टम अंतरिक्ष और साइबर युद्ध क्षमताएं शामिल हैं. अमेरिका का रक्षा बजट कई देशों के कुल रक्षा खर्च से भी कई गुना बड़ा है. वह सिर्फ अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि वैश्विक सैन्य उपस्थिति बनाए रखने पर खर्च करता है.

चीन: कम प्रतिशत, लेकिन विशाल असर

चीन ने 2025 के लिए अपना रक्षा बजट 249 अरब डॉलर रखा है. यह अमेरिका से काफी कम दिखता है, लेकिन अहम बात यह है कि यह चीन के GDP का 1.5% से भी कम है. ओआरएफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की रणनीति अलग है. वह अपनी सेना को छोटा लेकिन ज्यादा तकनीकी बनाना चाहता है. वह घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत कर सस्ते में आधुनिक हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. चीन नौसेना और मिसाइल ताकत पर जोर दे रहा है. यानी चीन कम प्रतिशत खर्च करके भी अपनी सेना को तेज़ी से आधुनिक बना रहा है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और हथियारों का बड़ा हिस्सा देश में ही बनता है.

रूस: युद्धकालीन अर्थव्यवस्था की झलक

रूस ने 2025 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर 145 अरब डॉलर कर दिया है, जो उसके GDP का लगभग 6% से अधिक बैठता है. यह कोल्ड वॉर के बाद सबसे ऊँचे स्तरों में से एक है. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि यूक्रेन युद्ध ने रूस की प्राथमिकताएं बदल दी हैं. अब सामाजिक क्षेत्रों की तुलना में सेना को ज्यादा पैसा मिल रहा है. अर्थव्यवस्था पर दबाव के बावजूद सैन्य खर्च कम नहीं किया जा रहा रूस का मॉडल ‘पहले सेना, बाद में बाकी’ जैसा नजर आता है. रूस का सुरक्षा व्यय (Defence + National Security) मिलाकर बजट का लगभग 41% बनाता है.

पाकिस्तान: कमजोर अर्थव्यवस्था, मजबूत सैन्य प्राथमिकता

पाकिस्तान का रक्षा बजट करीब 11 अरब डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब ₹72–73 हजार करोड़) के आसपास बैठती है. रकम छोटी लग सकती है, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था की हालत को देखें तो यह बड़ा बोझ है. स्थिति कुछ ऐसी है कि महंगाई और कर्ज संकट के बावजूद रक्षा बजट में बढ़ोतरी हो रही है. लेकिन इसके बजट का बड़ा हिस्सा वेतन और पेंशन में चला जाता है. अगर सैन्य पेंशन और कुछ अन्य मदों को जोड़ दें तो कुल रक्षा बोझ भारतीय मुद्रा में लगभग ₹94 हजार करोड़ होता है. आधुनिक हथियारों की खरीद की क्षमता सीमित है, फिर भी पाकिस्तान में सेना का महत्व आर्थिक तंगी से भी ऊपर रखा जाता है.

इन चारों देशों में तुलनात्मक डिफेंस स्पेंडिंग को इस टेबल में देख सकते हैं

रक्षा बजट तुलना (Defence Budget Comparison)

देश / सालस्थानीय बजटअनुमानित USD बजट% GDP
अमेरिका (2026)901 अरब डॉलर3% से ज्यादा
अमेरिका (2027 प्लान)1.5 ट्रिलियन डॉलर (प्रस्तावित)
चीन (2025)1.81 ट्रिलियन युआन249 अरब डॉलर1.5% से कम
रूस (2025)13.5 ट्रिलियन रूबल145 अरब डॉलर6.30%
पाकिस्तान (2025–26)2.55 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये11.2 अरब डॉलर1.6-1.7%
भारत (2025)6.81 लाख करोड़ रुपये78.7 अरब डॉलर1.90%
भारत (2026)7.85 लाख करोड़ रुपये90.5 अरब डॉलर2.0%+

भारत का 2026 रक्षा बजट और इसका महत्व

वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और अपनी बढ़ती सैन्य क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए भारत ने भी बजट 2026–27 में अपने रक्षा खर्च को बढ़ाया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया, जिसमें से 2.19 लाख करोड़ रुपये आधुनिकरण (कैपिटल आउटले) के लिए रखा गया है. यह पिछले साल की तुलना में लगभग 22% की ज्यादा है.

भारत: 2026 के बजट से आत्मनिर्भरता का प्लान

भारत का2026-27 का बजट आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat), तेजी से खरीद प्रक्रिया, आधुनिक हथियार प्रणालियों, नेटवर्क आधारित क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा उद्योग को समर्थन देने पर केंद्रित है. इस बढ़े हुए बजट के समक्ष, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह खर्च भारत को इंडो-पैसेफिक में स्ट्रेटजिक बैलेंस बनाने में मदद करेगा और उसकी पोजिशन को मजबूत करेगा.

2026 के शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकतें (ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के आधार पर)

संयुक्त राज्य अमेरिका- 0.0741

रूस- 0.0791

चीन- 0.0919

भारत- 0.1346

दक्षिण कोरिया- 0.1642

फ्रांस- 0.1798

जापान- 0.1876

यूनाइटेड किंगडम- 0.1881

तुर्किये- 0.1975

इटली- 0.2211

नोट: PwrIndx 0.0000 सैद्धांतिक रूप से अधिकतम सैन्य शक्ति को दर्शाता है, जिसे वास्तविक जीवन में हासिल करना संभव नहीं माना जाता. इसी कारण कम अंक बेहतर शक्ति संकेत करते हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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