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Home World फारस की खाड़ी में भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले, ईरान क्यों मचा रहा तबाही?

फारस की खाड़ी में भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले, ईरान क्यों मचा रहा तबाही?

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फारस की खाड़ी में भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले, ईरान क्यों मचा रहा तबाही?
ईरान कर रहा मिसाइल और ड्रोन हमला, फोटो- पीटीआई

Iran Attack: कई वर्षों से ईरान की सरकार चेतावनी देती रही है कि यदि उसे अपने अस्तित्व पर खतरा महसूस होगा, तो वह पश्चिम एशिया को मिसाइलों और ड्रोन हमलों से दहला देगी. इस चेतावनी का आज तक दिखाई देने वाला असर क्षेत्र में गंभीर हिंसा के रूप में सामने आया है. अमेरिका और इजराइल की ओर से बीते शनिवार को युद्ध शुरू करने और ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की घोषणा के बाद ईरान ने इजराइल, फारस की खाड़ी में ऊर्जा सुविधाओं, क्षेत्रीय अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूतावासों को निशाना बनाते हुए हजारों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. इसके साथ ही तुर्की और अजरबैजान के क्षेत्रों पर भी मिसाइलें और ड्रोन हमले किए गए हैं.

क्या है हमले के पीछे ईरान की मंशा?

सवाल उठता है कि इजराइल और अमेरिकी के अलावा ईरान अन्य इलाकों में क्यों भीषण हमला कर रहा है. ईरान की मूल रणनीति युद्ध के विस्तार के खतरों के बारे में डर पैदा करना है, ताकि अमेरिका के सहयोगी देश उस पर इतना दबाव डालें कि वह ईरान में अभियान रोक दे. एक लंबा संघर्ष, साथ ही अमेरिकी और इजराइली सैनिकों की जानमाल की हानि भी ईरान के पक्ष में काम कर सकती है. हमले के पीछे ईरान की शायद यहीं मंशा है. हालांकि इसमें समस्या यह भी है कि पड़ोसियों पर हमला करने की रणनीति उलटी भी पड़ सकती है.

क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करने के साथ खौफ पैदा करने का प्रयास

यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम की उप निदेशक एली गेरानमायेह ने कहा “ईरान इस अमेरिकी सैन्य अभियान की लागत बढ़ा रहा है और इसे शुरू से ही क्षेत्रीय रंग दे रहा है, जैसा कि उसने वादा किया था कि अगर अमेरिका ईरान के साथ फिर से युद्ध शुरू करता है तो वह ऐसा करेगा.” ईरान के नेताओं का मानना ​​है कि जानमाल का नुकसान पहुंचाकर और ऊर्जा उत्पादन को बाधित करके तेल और गैस की कीमतों को बढ़ाकर, अमेरिका के सहयोगी या देश में असंतुष्ट जनता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव डालेगी कि वे अपनी नीतियों में ढील दें. गेरानमायेह ने कहा कि ट्रंप अप्रत्याशित हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा लगता है कि वह “बातचीत के जरिए समझौता करने के बजाय अपनी मांगों के सामने बिना शर्त आत्मसमर्पण” के लिए दबाव डाल रहे हैं.

ईरान कर रहा है जोरदार पलटवार

अमेरिका और इजराइल के मुकाबले कम हथियार होने के बावजूद, ईरान ने इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागना जारी रखा है, जिसमें 11 लोग मारे गए हैं और लाखों इजरायलियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. खाड़ी अरब देशों में और भी अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि अमेरिका-इजराइल अभियान में ईरान में 1,045 लोगों की जान गयी है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच हुई कई वार्ताओं के विफल होने के बाद अमेरिका और इजराइल ने यह हमला किया.

क्या चाहता है अमेरिका?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा है कि ईरान पर हमले के लिए उनके पास चार बड़े उद्देश्य हैं.

  1. ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना
  2. उसकी नौसेना को खत्म करना
  3. उसे परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना.
  4. यह सुनिश्चित करना है कि वह सहयोगी सशस्त्र समूहों का समर्थन करना जारी न रख सके.

इस मकसद के साथ अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, लेकिन ईरान की प्रतिक्रिया ने सबको चौंका दिया. तेहरान ने पूरे क्षेत्र में किसी को भी नहीं बख्शा, यहां तक ​​कि ओमान पर भी हमला किया, जिसने परमाणु वार्ता के दौरान मध्यस्थता की थी और दशकों से ईरान के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखा है, क्योंकि उसने 1970 के दशक में दिवंगत सुल्तान काबूस बिन सईद को एक विद्रोह को दबाने में मदद की थी.

ओमान, सऊदी अरब और खाड़ी देशों पर ईरानी हमला

पिछले सप्ताह, जब अमेरिका ने क्षेत्र में युद्धपोतों का जमावड़ा किया, तो ओमान के विदेश मंत्री परमाणु वार्ता को जारी रखने के अंतिम प्रयास में वाशिंगटन गए. इसके बाद ओमान इस संघर्ष में घसीटा गया. ओमान के बंदरगाह और उसके तट के पास स्थित जहाजों को ईरानी मिसाइलों द्वारा निशाना बनाया गया. ओमान का दुक्म बंदरगाह यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत को तैनाती से पहले रसद संबंधी सहायता प्रदान कर रहा था. सऊदी अरब जिसने 2023 से तेहरान के साथ तनावमुक्त संबंध बनाए थे, इस सप्ताह भी ईरान के निशाने पर आया. विशेष रूप से उसकी रास तनुरा रिफाइनरी पर हमला किया गया. कतर और संयुक्त अरब अमीरात भी ईरानी हमलों की चपेट में रहे. (इनपुट भाषा)

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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