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Home World 2026 के पहले ही दिन कंडोम, गर्भ निरोधक गोली और IUD पर बढ़ा 13% टैक्स, चीन का मकसद पैसा नहीं, कुछ और

2026 के पहले ही दिन कंडोम, गर्भ निरोधक गोली और IUD पर बढ़ा 13% टैक्स, चीन का मकसद पैसा नहीं, कुछ और

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2026 के पहले ही दिन कंडोम, गर्भ निरोधक गोली और IUD पर बढ़ा 13% टैक्स, चीन का मकसद पैसा नहीं, कुछ और
चीन ने 1 जनवरी 2026 से बर्थ कंट्रोल प्रोडक्ट्स पर 13% टैक्स लगाया.

China 13% Tax on Birth Control Products: नए साल की शुरुआत में चीन सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने चीनी समाज में बहस को तेज कर दिया है. एक ओर सरकार घटती आबादी और गिरती जन्म दर से निपटने के उपाय खोज रही है, तो दूसरी ओर उसने गर्भनिरोधक साधनों पर टैक्स लगाकर लोगों को चौंका दिया है. गुरुवार, 1 जनवरी 2026 से चीन में कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां और इंट्रायूटेरिन डिवाइस (IUD) जैसे साधनों पर 13 प्रतिशत वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) लागू कर दिया गया है. यह पहली बार है जब पिछले तीन दशकों में इन उत्पादों से टैक्स छूट हटाई गई है.

यह बदलाव ऐसे समय में लागू हुआ है, जब चीन गंभीर जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है. आबादी घट रही है और जन्म दर कई वर्षों से लगातार नीचे जा रही है. नए VAT कानून के तहत सभी गर्भनिरोधक उत्पादों पर 13 प्रतिशत की मानक दर लागू होगी. हालांकि, चाइल्डकेयर, विवाह-परिचय सेवाएं और बुजुर्ग देखभाल जैसी गतिविधियों को टैक्स से छूट दी गई है, ताकि जन्म दर बढ़ाने की नीति को समर्थन मिल सके.

कीमतों की बात करें तो कंडोम आमतौर पर 40 से 60 युआन में मिलते हैं, जबकि एक महीने की गर्भनिरोधक गोलियों की कीमत 50 से 130 युआन के बीच होती है. गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि इस टैक्स से सालाना करीब 5 अरब युआन की अतिरिक्त आय होगी, जो चीन के कुल बजट के मुकाबले बेहद मामूली है.

एक-बच्चा नीति से तीन बच्चों तक: बदलती रणनीति

यह टैक्स दरअसल 2024 में पारित नए VAT कानून का हिस्सा है, जिसके जरिए चीन अपनी कर व्यवस्था को आधुनिक और अधिक स्पष्ट बनाना चाहता है. 1993 में जब VAT व्यवस्था लागू हुई थी, तब गर्भनिरोधक साधनों को टैक्स से इसलिए मुक्त रखा गया था, क्योंकि उस समय चीन सख्ती से एक-बच्चा नीति लागू कर रहा था. सरकार मुफ्त या रियायती दरों पर जन्म नियंत्रण के साधन उपलब्ध कराती थी. उसी दौर में जबरन गर्भपात, नसबंदी और तय सीमा से अधिक बच्चों को पहचान पत्र न मिलने जैसे कठोर कदम भी देखने को मिले थे.

आज हालात इसके ठीक उलट हैं. एक-बच्चा नीति को 2015 में खत्म किया गया, 2021 में तीन बच्चों की अनुमति दी गई और अब वही सरकार शादी व बच्चों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है. इसके तहत माता-पिता को लंबी सवेतन छुट्टियां, चाइल्डकेयर पर सब्सिडी, IVF इलाज में छूट और बुज़ुर्ग देखभाल जैसी सेवाओं पर टैक्स राहत दी जा रही है.

गिरती जन्म दर और युवाओं की हकीकत

2024 में चीन में केवल 95 लाख से कुछ अधिक बच्चों का जन्म हुआ, जो एक दशक पहले की संख्या का लगभग आधा है. पिछले कुछ वर्षों से मौतों की संख्या जन्मों से अधिक रही है और 2023 में भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने का दर्जा हासिल कर लिया. यह कदम न केवल नीति के स्तर पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि चीन की जनसंख्या नीति किस तरह एक बड़े संक्रमण दौर से गुजर रही है.

गर्भनिरोधक महंगे करने के फैसले ने लोगों को हैरान किया है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर मजाक और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही हैं. कई युवा मानते हैं कि कंडोम या गोलियों की कीमत बढ़ने से वे बच्चे पैदा करने का फैसला नहीं बदलेंगे. उनका तर्क है कि जब बच्चों की परवरिश, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च इतना ज्यादा है, तो कुछ युआन की बचत या बढ़ोतरी से जीवन के बड़े फैसले नहीं बदले जा सकते.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

यूथ पॉपुलेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, चीन उन देशों में शामिल है जहां बच्चे को पालना सबसे महंगा है. महंगी शिक्षा, कामकाजी महिलाओं पर बढ़ता दबाव, धीमी होती अर्थव्यवस्था और लंबे समय से जारी प्रॉपर्टी संकट ने युवा परिवारों की आर्थिक स्थिति और आत्मविश्वास दोनों को कमजोर किया है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से छात्रों और कम आय वाले वर्गों में गर्भनिरोधकों की पहुंच घट सकती है. इससे अनचाही गर्भधारण, गर्भपात और यौन संचारित रोगों का जोखिम बढ़ने की आशंका है. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इसका असर आगे चलकर स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ के रूप में भी सामने आ सकता है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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