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Home World मातृभूमि का एकीकरण कोई रोक नहीं सकता, ताइवान पर जस्टिस मिशन के बाद गरजे शी जिनपिंग

मातृभूमि का एकीकरण कोई रोक नहीं सकता, ताइवान पर जस्टिस मिशन के बाद गरजे शी जिनपिंग

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मातृभूमि का एकीकरण कोई रोक नहीं सकता, ताइवान पर जस्टिस मिशन के बाद गरजे शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नए साल का संदेश: ताइवान का मातृभूमि में पुनर्एकीकरण कोई रोक नहीं सकता.

China President Xi Jinping Reunification of Taiwan: नए साल की पूर्व संध्या पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के साथ पुनर्एकीकरण को आगे बढ़ाने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया. बीजिंग से प्रसारित अपने संबोधन में उन्होंने कहा “हमारी मातृभूमि का पुनर्एकीकरण समय की धारा है और इसे कोई नहीं रोक सकता.” यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने हाल ही में ताइवान के आसपास “जस्टिस मिशन 2025” नामक सैन्य अभ्यास पूरा किया. विश्लेषकों के अनुसार, यह रुख चीन के ताइवान नीति को लेकर सशक्त और आक्रामक होने का संकेत देता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है. चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और लंबे समय से द्वीप को ज़बरदस्ती जोड़ने का वचन देता रहा है, हालांकि 1949 से यह द्वीप स्वशासन में है.

चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी जिनपिंग ने कहा कि चीन ने “जापानी आक्रमण के खिलाफ चीनी जनता के प्रतिरोध युद्ध और विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध में जीत की 80वीं वर्षगांठ को गंभीरता से मनाया और ताइवान रिकवरी डे की स्थापना की. ये भव्य राष्ट्रीय आयोजन अत्यंत गरिमामय और शक्तिशाली थे, और विजय की गौरवगाथा इतिहास के पन्नों में चमकती रहेगी. ये आयोजन चीनी राष्ट्र के सभी पुत्रों और पुत्रियों को इतिहास याद रखने, शहीदों का सम्मान करने, शांति को संजोने और एक बेहतर भविष्य रचने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. ये हमारे राष्ट्र के महान पुनरुत्थान के लिए एक विशाल शक्ति को एकजुट कर रहे हैं.”

शी जिनपिंग ने आगे कहा, “कुछ समय पहले मैंने राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लिया था, और मुझे यह देखकर खुशी हुई कि ग्वांगडोंग, हांगकांग और मकाऊ एकता के साथ साथ आ रहे हैं और मिलकर काम कर रहे हैं. हमें ‘एक देश, दो प्रणाली’ की नीति को दृढ़ता से लागू करना चाहिए और हांगकांग व मकाऊ को हमारे देश के समग्र विकास में बेहतर तरीके से एकीकृत होने तथा दीर्घकालिक समृद्धि और स्थिरता बनाए रखने में समर्थन देना चाहिए. ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर रहने वाले चीनी लोग रक्त और रिश्तेदारी के बंधन से जुड़े हैं. हमारी मातृभूमि का पुनर्एकीकरण समय की धारा है और इसे रोका नहीं जा सकता.” 

ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियां

शी जिनपिंग का भाषण ऐसे समय में आया जब PLA ने ताइवान के आसपास पिछले वर्ष के सबसे बड़े सैन्य अभ्यास किए. “जस्टिस मिशन 2025” नामक इन लाइव-फायर ड्रिल्स में कम से कम 89 युद्धक विमानों ने भाग लिया और ताइवान के मुख्य बंदरगाहों की नाकेबंदी का अभ्यास किया. इसमें नौसेना, वायुसेना, रॉकेट फोर्स और तट रक्षक बल शामिल थे, जिन्होंने द्वीप के चारों ओर संयुक्त सैन्य अभ्यास संपन्न किया. PLA के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने विभिन्न सैन्य इकाइयों को ताइवान जलडमरूमध्य साथ-साथ ताइवान के उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व और पूर्वी क्षेत्रों में संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए तैनात किया.

वैश्विक कूटनीति और चीन की उपलब्धियां

शी ने 2025 में चीन की कूटनीतिक उपलब्धियों का उल्लेख भी किया. उन्होंने तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन का हवाला दिया, जिसमें रूस, भारत और तुर्की जैसे देशों के नेता शामिल हुए. उनके भाषण के दौरान चीन की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य परेड के फुटेज भी दिखाए गए, जो सितंबर में विश्व युद्ध II की समाप्ति के 80 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित की गई थी. इस परेड में शी पुतिन और उत्तर कोरिया के किम जोंग-उन के साथ नजर आए, जिसे कुछ विश्लेषकों ने “अशांति के धुरी” के रूप में वर्णित किया.

ताइवान रिकवरी डे और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

बल प्रयोग की चेतावनी देते हुए शी जिनपिंग ने 2025 में स्थापित “ताइवान रिकवरी डे” पर भी जोर दिया, जो 1945 में जापानी शासन के अंत को स्मरण करने के लिए मनाया जाता है. वहीं ताइवान ने 25 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में इसे मान्यता दी है. ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने कहा कि पीएलए की ये उकसावे वाली गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं.  ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि ये अभ्यास उकसावे वाली और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियां हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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