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Home World चीन ने नेवी में शामिल किया ‘लौडी’, टाइप 052D गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, US को पछाड़ने वाले ड्रैगन का नया कारनामा

चीन ने नेवी में शामिल किया ‘लौडी’, टाइप 052D गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, US को पछाड़ने वाले ड्रैगन का नया कारनामा

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चीन ने नेवी में शामिल किया ‘लौडी’, टाइप 052D गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, US को पछाड़ने वाले ड्रैगन का नया कारनामा
चीन ने नए टाइप 052डी एंटी मिसाइल युद्धपोत को शामिल किया. फोटो- एआई जेनेरेटेड.

China Commissions Type 052D Anti Missile Warship: अमेरिकी नौसेना की शक्ति का मुकाबला करने के लिए चीन ने अपने नौसैनिक बेड़े का तेजी से विस्तार करते हुए एक नए “उन्नत” मिसाइल विध्वंसक पोत को सेवा में शामिल किया है. पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) नौसेना ने लौडी (Loudi) नामक Type 052D गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक पोत को कमीशन किया है. चीन के सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को बीजिंग में कहा कि चीनी नौसेना के इस मिसाइल रोधी पोत में इसमें उन्नत राडार, हथियार और नेटवर्क सिस्टम लगे हुए हैं. चीनी नौसेना ने इस “अपग्रेडेड” मिसाइल विध्वंसक पोत को शामिल कर अपने बेड़े का तेजी से विस्तार जारी रखा है, ताकि अमेरिकी नौसैनिक क्षमता के साथ अंतर को घटाया जा सके.

नए सिस्टम डिजाइन और आर्किटेक्चर पर आधारित लौडी

लौडी पर तैनात क्रू मेंबर झांग शेंगवेई ने राज्य-संचालित सरकारी समाचारपत्र Global Times को बताया कि यह युद्धपोत नए सिस्टम डिजाइन और आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिससे इसके युद्धक प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ है, खासकर वायु रक्षा, समुद्री हमले और टास्क फोर्स कमांडिंग में. उन्होंने यह भी कहा कि इस मिसाइल विध्वंसक पोत से चीन लंबी दूरी तक हमले कर सकता है और निशाने पर सटीक स्ट्राइक ऑपरेशन अंजाम दे सकता है, साथ ही मिशनों के दौरान अन्य सहयोगी जहाजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकता है.

हर महीने एक जहाज जोड़ रहा चीन

विश्लेषकों का कहना है कि इस नए जहाज की शामिल होने से यह स्पष्ट होता है कि चीनी नौसेना अपनी बेड़े को बहुत तेजी से बढ़ा रही है, जिसमें औसतन हर महीने एक नया जहाज शामिल कर रही है. बीबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीनी नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी है, जिसमें 234 युद्धपोत हैं, जबकि अमेरिकी नौसेना के पास 219 जहाज हैं. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के एक अध्ययन के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच, चीन के चार सबसे बड़े शिपयार्ड, डालियान, गुआंगजौ, जियांगनान और हुडोंग-झोंगहुआ ने 39 युद्धपोत बनाए, जिनका संयुक्त विस्थापन 550,000 टन था.

पिछले महीने फुजियान को किया था शामिल

लौडी के शामिल होने के साथ, चीनी नौसेना ने 2025 में अब तक 11 नए युद्धपोतों को बेड़े में जोड़ा है, जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान भी शामिल है. चीन फुजियान को अपना सबसे उन्नत विमानवाहक पोत मानता है, जिसे पिछले साल नवंबर में आधिकारिक रूप से पीएलए नौसेना में शामिल किया गया था. यह चीन का पहला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम वाला विमानवाहक पोत है. 80,000 टन से अधिक फुल लोड विस्थापन वाला यह विशाल पोत 2019 में शंघाई के जियांगन शिपयार्ड में बना और जून 2022 में लॉन्च हुआ, जिसके बाद 2024 से आठ सफल समुद्री परीक्षण पूरे किए गए.

फुजियान J-15T, J-35 स्टील्थ फाइटर और KJ-600 प्रारंभिक चेतावनी विमान जैसे आधुनिक युद्धक विमानों को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट और अरेस्टिंग डिवाइस की मदद से टेकऑफ और लैंडिंग करा सकता है, जिससे इसकी हमलावर क्षमता और संचालन क्षमता दोनों में वृद्धि होती है. यह पोत चीन के तीन विमानवाहक पोतों के युग में प्रवेश और दूरस्थ समुद्री रक्षा को मजबूत करने का प्रतीक भी है. यह विमानवाहक पोत चीन द्वारा खुद डिज़ाइन और निर्मित किया गया है. अब चीन अमेरिका के अलावा दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसके पास दो से अधिक विमानवाहक पोत हैं.

पाकिस्तान को भी कर रहा मदद

बेड़े के निर्माण के साथ-साथ चीन अपने “ऑल-वेदर” सहयोगी पाकिस्तान को आधुनिक नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां भी मुहैया करा रहा है. पिछले महीने, चीन ने पाकिस्तान के लिए चौथी हैंगर-क्लास पनडुब्बी लॉन्च की, जिसका नाम गाजी रखा गया. यह पाकिस्तान की दूसरी पनडुब्बी है जिसका नाम गाजी है; पहली पनडुब्बी 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान विशाखापत्तनम बंदरगाह के पास नष्ट हो गई थी. पाकिस्तान और चीन के बीच आठ हैंगर-क्लास पनडुब्बियों के अधिग्रहण का समझौता हुआ है, जिनमें से पहले तीन पनडुब्बियां पहले ही लॉन्च की जा चुकी हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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