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Home World ट्रंप प्रशासन की हरकतों पर कनाडा गुस्सा, वाशिंगटन पहुंचे सेपरेटिस्टों को बताया ‘देशद्रोही’, PM कार्नी ने क्या कहा?

ट्रंप प्रशासन की हरकतों पर कनाडा गुस्सा, वाशिंगटन पहुंचे सेपरेटिस्टों को बताया ‘देशद्रोही’, PM कार्नी ने क्या कहा?

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ट्रंप प्रशासन की हरकतों पर कनाडा गुस्सा, वाशिंगटन पहुंचे सेपरेटिस्टों को बताया ‘देशद्रोही’, PM कार्नी ने क्या कहा?
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स.

Canada US Relations: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कनाडा के ऊपर काफी हमलावर हैं. वह कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कहकर चिढ़ाते रहे हैं. ट्रंप की कनााडा के साथ तल्खी और बढ़ गई, जब कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने विश्व आर्थिक मंच में ट्रंप पर इनडायरेक्ट हमला किया. इसके बाद ही खबर सामने आई कि कनाडा के ऑयल रिच अल्बर्टा प्रांत के कुछ अलगाववादी नेताओं ने अमेरिकी ट्रंप प्रशासन से मुलाकात की है. इस कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सख्त प्रतिक्रिया दी. गुरुवार को कहा कि उन्हें भरोसा है कि अमेरिका कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करेगा. 

अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट (APP) नाम के एक संगठन को हस्ताक्षर अभियान चलाने की अनुमति मिल चुकी है. इस पहल का मकसद एक जनमत संग्रह कराना है, जिसमें अल्बर्टा को कनाडा से अलग कर स्वतंत्र देश बनाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है. यह मतदान इस साल शरद ऋतु में भी संभव बताया जा रहा है, हालांकि मौजूदा सर्वेक्षण संकेत देते हैं कि अलगाव के समर्थन में बहुमत मिलना मुश्किल हो सकता है. 23 जनवरी को जारी एक इप्सोस सर्वेक्षण के अनुसार, अल्बर्टा के लगभग 28 प्रतिशत लोग स्वतंत्रता के पक्ष में मतदान करने पर विचार कर सकते हैं.

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, APP से जुड़े प्रतिनिधियों ने अप्रैल के बाद से वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों से तीन बार मुलाकात की. इन बैठकों ने कनाडा की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और संभावित बाहरी प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं. यह घटनाक्रम उस टिप्पणी के बाद और चर्चा में आ गया, जो हाल ही में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक दक्षिणपंथी मीडिया मंच से बातचीत में की थी. 

उन्होंने कहा था कि अल्बर्टा अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार है, साथ ही वहां के संसाधनों और लोगों के स्वतंत्र स्वभाव की सराहना की थी. उनकी इस टिप्पणी को कुछ हलकों में अल्बर्टा की अलगाववादी भावनाओं के प्रति सहानुभूति के रूप में देखा गया. अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएफपी से कहा कि विभाग का नागरिक समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों से मिलना सामान्य प्रक्रिया है और ऐसी बैठकों में किसी तरह की प्रतिबद्धता नहीं की गई.

कार्नी बोले- उम्मीद है अमेरिका कनाडाा की संप्रभुता का सम्मान करेगा

कार्नी ने इन रिपोर्टों और बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुझे उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करेगा.” उस समय उनके साथ कई प्रांतीय नेता मौजूद थे, जिनमें अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ भी शामिल थीं. कार्नी ने कहा कि ट्रंप के साथ मुलाकातों में हमने यही बात की कि हम मिलकर क्या काम कर सकते हैं. कार्नी ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी किसी भी प्रत्यक्ष बातचीत में न तो अल्बर्टा की स्वतंत्रता का मुद्दा उठा और न ही क्यूबेक के अलगाववाद का.

कनाडा के अन्य नेताओं ने दी तीखी प्रतिक्रिया

डेनिएल स्मिथ ने भी कहा कि वह उम्मीद करती हैं कि अमेरिका कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी भी तरह की बाहरी दखलंदाजी जनमत संग्रह प्रक्रिया में हुई, तो वह इस मुद्दे को वॉशिंगटन के सामने उठाएंगी.

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर नई तेल पाइपलाइन को प्रशांत तट तक ले जाने की परियोजना पर संघीय सहयोग मिलता है, तो इससे अलगाववादी भावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं. यह प्रस्तावित पाइपलाइन ब्रिटिश कोलंबिया से होकर गुजरनी है, जहां प्रशांत तट के फर्स्ट नेशंस समुदायों ने इसका विरोध किया है.

वहीं, ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने वॉशिंगटन में कथित रूप से अलगाववादियों से हुई बैठकों को ‘देशद्रोह’ करार दिया.

ट्रू़डो के समय बढ़ा अल्बर्टा के लोगों का गुस्सा

कनाडा में क्यूबेक का अलगाववादी आंदोलन लंबे समय से संगठित रहा है, लेकिन अल्बर्टा की अलग होने की मांग को पहले कभी देश की एकता के लिए बड़ा खतरा नहीं माना गया. हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान अल्बर्टा में संघीय सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ा. वहां के लोगों का आरोप रहा कि ट्रूडो की जलवायु नीतियों ने तेल और गैस उद्योग को नुकसान पहुंचाया, जो प्रांत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.

कनाडा का प्रांत अल्बर्टा, अमेरिका से लगा हुआ राज्य है. इस राज्य में कनाडा के कुल तेल का 84-90% तेल पाया जाता है. इस प्रांत के लोगों का आरोप है कि उसके तेल का उपयोग सारा कनाडा करता है, लेकिन उसके लोगों को विशेष लाभ नहीं मिलता. इसकी वजह से इस प्रांत में अलगाववाद की भावना भड़की. वहीं, ट्रंप के बयानों के बाद, कनाडा और भी सतर्क हो गया है. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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