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ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर हमला हुआ तो तबाह हो जाएगा खाड़ी क्षेत्र, मंडराया रेडिएशन का खतरा

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ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर हमला हुआ तो तबाह हो जाएगा खाड़ी क्षेत्र, मंडराया रेडिएशन का खतरा
बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट की तस्वीर. इमेज सोर्स क्रेडिट- एक्स/@ani_digital

Bushehr Nuclear Plant Attack: रूस और ईरान ने दुनिया को चेतावनी दी है कि ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट (NPP) के पास हो रहे हमले पूरे क्षेत्र के लिए भारी मुसीबत बन सकते हैं. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार (5 अप्रैल) को इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की. दोनों नेताओं ने साफ कहा कि बुशहर जैसे अहम ठिकानों पर ‘लापरवाह और अवैध’ हमले तुरंत रुकने चाहिए, वरना पूरे इलाके में परमाणु तबाही फैल सकती है.

बुशहर प्लांट के पास गिरा रॉकेट 

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के चीफ राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बताया कि उन्हें ईरान से जानकारी मिली है कि बुशहर प्लांट के पास एक रॉकेट आकर गिरा है. यह पिछले कुछ हफ्तों में चौथी ऐसी घटना है. बुशहर प्लांट के एक्टिव रिएक्टर पर सीधा हमला होता है, तो उससे निकलने वाला रेडिएशन सैकड़ों किलोमीटर तक फैल जाएगा. 

IAEA का कहना है कि ऐसी स्थिति में पड़ोसी देशों के कई शहरों को खाली कराना पड़ सकता है. बड़े पैमाने पर होने वाली मौतों, हवा में फैले जहर और पीने के पानी के खत्म होने से पूरे खाड़ी क्षेत्र में तबाही मचा सकती है. जिसे विशेषज्ञों ने एक ‘क्षेत्रीय आपदा’ (रीजनल कैटास्ट्रोफी) करार दिया है. खाड़ी क्षेत्र (गल्फ रीजन) पश्चिमी एशिया का वह इलाका है जो फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) के तट पर स्थित है और इसमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान, इराक और ईरान जैसे देश शामिल हैं.

हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी रेडिएशन का स्तर सामान्य है. इस बीच, ईरानी विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को पत्र लिखकर अमेरिका और इजरायल के इन हमलों की निंदा की है और बताया कि हमले में प्लांट के एक कर्मचारी की जान भी गई है.

पीने के पानी का संकट: 3 दिन में प्यासा मर सकता है कतर

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी के ज्यादातर देशों (GCC) में पीने के पानी के लिए समुद्र के पानी को फिल्टर किया जाता है. ये प्लांट रेडियोधर्मी कचरे जैसे सीजियम-137 को साफ नहीं कर सकते. अगर समुद्र का पानी दूषित हुआ, तो कतर जैसे देश के पास सिर्फ 3 दिन का पानी बचेगा. कुवैत और बहरीन अपनी 90% और सऊदी अरब 70% पानी की जरूरतों के लिए इसी समुद्र पर निर्भर हैं.

हवा और पानी के बहाव से अरब देशों की तरफ बढ़ेगा जहर

रिपोर्ट्स बताती हैं कि बुशहर की ज्योग्राफिकल लोकेशन ऐसी है कि वहां से निकलने वाला जहरीला धुआं ईरान के बजाय अरब देशों की ओर जाएगा. सर्दियों में चलने वाली हवाएं रेडिएशन को सीधे यूएई, कतर और सऊदी अरब की राजधानियों तक पहुंचा देंगी. वहीं, समुद्र की लहरें इस जहर को 15 दिनों के भीतर कुवैत और बहरीन के तटों तक ले जा सकती हैं. 

अरब देश ये वे 22 देश हैं जिनकी मुख्य भाषा अरबी है और जो ‘अरब लीग’ के सदस्य हैं, इसमें सऊदी अरब और मिस्र जैसे एशियाई और अफ्रीकी दोनों महाद्वीपों के देश शामिल हैं, लेकिन इसमें ईरान शामिल नहीं है क्योंकि वहां के लोग मुख्य रूप से फारसी बोलते हैं.

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कैंसर और स्किन बर्न का खतरा 

IAEA और WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने चेतावनी दी है कि अगर न्यूक्लियर रिएक्टर को नुकसान पहुंचा, तो भारी मात्रा में रेडिएशन निकलेगा. इससे लोगों को गंभीर स्किन बर्न हो सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों में कैंसर का खतरा बढ़ जाएगा. सीजियम-137 जैसे रेडियोधर्मी तत्व दशकों तक मिट्टी और खाने-पीने की चीजों में बने रहते हैं, जिससे पूरा इकोसिस्टम बर्बाद हो सकता है.

इकॉनमी और तेल बाजार पर पड़ेगा बुरा असर

अप्रैल 2026 की शुरुआत में हुए इन हमलों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है. जानकारों का कहना है कि रेडिएशन फैलने से न केवल लोगों की जान जाएगी, बल्कि खाड़ी देशों की इकॉनमी भी चरमरा जाएगी. समुद्र में जहर घुलने से मछली पालन उद्योग खत्म हो जाएगा और दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर भी बुरा असर पड़ेगा, जिससे भारी आर्थिक अस्थिरता आ सकती है.

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