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Home World भारत में जिन सैनिकों की भर्ती बंद हुई, ब्रिटेन उन्हें भर-भरकर ले रहा; रेजिमेंट की नई यूनिट बनाई

भारत में जिन सैनिकों की भर्ती बंद हुई, ब्रिटेन उन्हें भर-भरकर ले रहा; रेजिमेंट की नई यूनिट बनाई

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भारत में जिन सैनिकों की भर्ती बंद हुई, ब्रिटेन उन्हें भर-भरकर ले रहा; रेजिमेंट की नई यूनिट बनाई
गोरखा आर्टिलरी यूनिट के फॉर्मेशन परेड के दौरान किंग चार्ल्स. फोटो- एक्स (RoyalFamily).

Britain forms Gurkha Artillery Unit: करीब 200 सालों से दुनिया की सबसे बहादुर लड़ाकू टुकड़ियों में गिने जाने वाले गोरखा सैनिक एक बार फिर चर्चा में हैं. भारत और नेपाल के बीच गोरखा भर्ती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन दूसरी ओर ब्रिटेन न सिर्फ नेपाली युवाओं की भर्ती जारी रखे हुए है बल्कि उसने उनके लिए एक नई सैन्य रेजिमेंट भी खड़ी कर दी है. भारतीय सेना का ऐतिहासिक रिश्ता गोरखा इकाइयों से जुड़ा हुआ है, लेकिन नेपाल के साथ कुछ मुद्दों को लेकर चल रही तकरार की वजह से भारत में गोरखाओं की भर्ती नहीं हो पार रही है.

ब्रिटिश सेना ने रॉयल आर्टिलरी के तहत एक नई किंग्स गोरखा आर्टिलरी बनाई है, इसमें पूरी तरह नेपाल से भर्ती किए गए सैनिक शामिल होंगे. इसे पिछले साल अप्रैल 2025 में बनाया गया था.  ब्रिटेन की सेना में इन्हें ‘गोरखा’ नहीं बल्कि ‘गुरखा’ लिखा जाता है.

ब्रिटिश सरकार के अनुसार, अगले तीन सालों में इस यूनिट में 400 गोरखा सैनिक शामिल होंगे, जिससे 2029 तक यह 500 से अधिक सैनिकों की क्षमता वाली रेजिमेंट बन जाएगी. इसके गठन के उपलक्ष्य में पिछले 14 सालों में पहली बार नया कैप बैज भी जारी किया गया है. वर्तमान में ब्रिटिश ब्रिगेड ऑफ गोरखाज में करीब 4000 सैनिक सीधे नेपाल से भर्ती किए जाते हैं.

आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम्स पर दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

नई यूनिट के सदस्य ब्रिटिश सेना की विभिन्न रॉयल आर्टिलरी रेजिमेंटों में सेवाएं देंगे. उनकी तैनाती सेना की फर्स्ट डिवीजन, थर्ड डिवीजन और 16 एयर असॉल्ट ब्रिगेड कॉम्बैट टीम को समर्थन देने के लिए जाएगी, जिससे विभिन्न सैन्य अभियानों में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी.

इस नई यूनिट को सेना के कुछ सबसे उन्नत और आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम्स पर प्रशिक्षण दिया जाएगा. इनमें आर्चर सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी सिस्टम, लाइट गन और रिमोट-कंट्रोल्ड हॉवित्जर 155 सिस्टम शामिल हैं. ये हथियार लंबी दूरी तक सटीक मार करने और तेजी से तैनाती की क्षमता के लिए जाने जाते हैं.

नेपाली में बोले किंग चार्ल्स, नई रेजिमेंट को दी शुभकामनाएं

ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय ने दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में आयोजित एक विशेष सैन्य समारोह में नेपाली भाषा में ‘आजुर दिन राम्रो छ!’ कहकर उपस्थित सैनिकों का अभिवादन किया. इसका अर्थ है, ‘आज का दिन अच्छा है.’ यह कार्यक्रम किंग्स गोरखा आर्टिलरी की पहली औपचारिक परेड के लिए आयोजित किया गया था. 

ब्रिटिश शाही परिवार ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि यह ब्रिटिश सेना की पहली समर्पित गोरखा आर्टिलरी यूनिट और उसकी सबसे नई रेजिमेंट है. रॉयल रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के कैप्टन जनरल किंग चार्ल्स ने कहा कि इस नई रेजिमेंट का गठन ब्रिटिश सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है.

ब्रिटेन ने बना दी नई यूनिट, भारत में भर्ती रुकी

एक ओर ब्रिटेन ने गोरखा सैनिकों की भूमिका को और मजबूत करने का फैसला किया है. वहीं दूसरी ओर नेपाल से गोरखा सैनिकों की भर्ती को लेकर भारत में पिछले कुछ समय से गतिरोध बना हुआ है. भारतीय सेना में नेपाली गोरखा जवानों की नई भर्ती पिछले करीब पांच वर्षों से बंद है. शुरुआत में कोविड-19 महामारी के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई थी. इसके बाद 2022 से भारत की अग्निपथ योजना को लेकर नेपाल की आपत्तियों ने भर्ती को और आगे बढ़ने नहीं दिया. 

अग्निपथ योजना बनी प्रमुख विवाद का कारण

अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को चार वर्ष के लिए सेना में नियुक्त किया जाता है और पारंपरिक पेंशन या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए जाते. नेपाल का मानना है कि यह व्यवस्था उन शर्तों से मेल नहीं खाती जिनके आधार पर नेपाली नागरिकों की भारतीय सेना में भर्ती होती रही है. इसी कारण नेपाल ने अग्निवीर मॉडल के तहत भर्ती को मंजूरी नहीं दी है.

लगातार नई भर्ती नहीं होने से भारतीय सेना की गोरखा ब्रिगेड के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं. भारत और नेपाल के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है.

200 साल पुराना है गोरखाओं का सैन्य इतिहास

गोरखा सैनिकों का इतिहास 19वीं सदी की शुरुआत तक जाता है. एंग्लो-नेपाल युद्ध (1814-1816) के दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पहली बार गोरखा सैनिकों की भर्ती शुरू की थी. इसके बाद से वे दुनिया के विभिन्न युद्धक्षेत्रों में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाते रहे हैं. भारतीय सेना की पहली गोरखा राइफल्स की पहली बटालियन सबसे पुरानी गोरखा बटालियन मानी जाती है. इसकी स्थापना अप्रैल 1815 में ईस्ट इंडिया कंपनी की बंगाल सेना के हिस्से के रूप में हुई थी.

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आजादी के बाद गोरखा रेजिमेंटों का बंटवारा

1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद 10 गोरखा रेजिमेंटों में से चार ब्रिटिश सेना को सौंप दी गईं. इनमें दूसरी, छठी, सातवीं और दसवीं गोरखा रेजिमेंट शामिल थीं. बाद में 1994 में इन्हीं चारों को मिलाकर रॉयल गोरखा राइफल्स का गठन किया गया.

वहीं, बाकी छह रेजिमेंट भारतीय सेना के हिस्से में आईं, जिन्हें पुनर्गठित कर पहली, तीसरी, चौथी, पांचवीं, आठवीं और नौवीं गोरखा राइफल्स के रूप में स्थापित किया गया. 1948 में ग्यारहवीं गोरखा राइफल्स भी बनाई गई, जिसमें उन सैनिकों को शामिल किया गया जिन्होंने ब्रिटिश सेना के बजाय भारत में सेवा जारी रखने का फैसला किया था. आज भी इन रेजिमेंटों की अधिकांश टुकड़ियों में नेपाल मूल के सैनिक बड़ी संख्या में शामिल हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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