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Home World वह इसके हकदार हैं… डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देते हुए, नेतन्याहू ने शेयर की एआई तस्वीर

वह इसके हकदार हैं… डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देते हुए, नेतन्याहू ने शेयर की एआई तस्वीर

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वह इसके हकदार हैं… डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देते हुए, नेतन्याहू ने शेयर की एआई तस्वीर
डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज पहनाते बेंजामिन नेतन्याहू. एआई जेनेरेटेड तस्वीर.

Benjamin Netanyahu Donald Trump Nobel Peace Prize: डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए, वे इसके हकदार हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस मांग को दोहराया है.  नेतन्याहू ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक एआई-जनित तस्वीर भी साझा की, जिसमें वह ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देते हुए दिख रहे हैं. इस तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप के गले में नोबेल पुरस्कार लटका हुआ है और वे हाथ ऊपर कर लोगों का धन्यवाद करते दिख रहे हैं. वहीं नेतन्याहू समेत कई लोग इस बात को चीयर करते नजर आ रहे हैं. 

नेतन्याहू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दीजिए, वह इसके पूरी तरह हकदार हैं.” इजरायल में केवल नेतन्याहू ही नहीं, बल्कि विपक्षी पार्टियों ने भी ट्रंप को इस पुरस्कार के काबिल बताया है. मध्यमार्गी यश अतीद पार्टी के नेता और पूर्व पत्रकार यायर लापिड ने कहा कि ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज मिलना चाहिए. इजरायल के लोग उनका बहुत धन्यवाद कर रहे हैं.  

नेतन्याहू की यह पोस्ट उस समय आई है जब इजरायल और हमास ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की गाजा शांति योजना के पहले चरण को स्वीकार कर लिया है. ट्रंप द्वारा प्रस्तावित यह 20-सूत्रीय शांति योजना गाजा में पिछले दो वर्षों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है, जिसमें अब तक 67,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. इस शांति समझौते के पहले चरण में हमास बंधकों को रिहा करेगा, जबकि इजरायल धीरे-धीरे अपनी सेना को गाजा पट्टी के इलाके से पीछे हटाएगा. 

2025 नोबेल शांति पुरस्कार

वहीं 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार शुक्रवार को घोषित किया जाएगा. ट्रंप सहित कई लोग इस बार उन्हें विजेता बनने का पूरा भरोसा जता रहे हैं. ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कम से कम सात देशों आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया, गैबॉन, इजरायल, पाकिस्तान और रवांडा ने नामांकित किया है. वहीं इन देशों ने भी विभिन्न संघर्षों को समाप्त करने में उनकी भूमिका को देखते हुए ट्रंप का नामांकन पीस प्राइज के लिए किया है.

“मैं नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार हूं”- ट्रंप

ट्रंप ने खुद भी कहा है कि वे दुनिया भर में युद्ध समाप्त करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार पाने के हकदार हैं. उनका दावा है कि जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उन्होंने अब तक 6 से 8 युद्ध खत्म किए हैं. पिछले सप्ताह वर्जीनिया के मरीन कॉर्प्स बेस क्वांटिको में सैन्य अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था, “किसी ने ऐसा पहले कभी नहीं किया. क्या आपको नोबेल पुरस्कार मिलेगा? बिल्कुल नहीं. वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को दे देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया. वे मुझे प्राइज न देने का कोई न कोई बहाना ढूंढ लेंगे.”

क्या ट्रंप जीत पाएंगे 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार?

ट्रंप और उनके समर्थकों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस पुरस्कार के हकदार हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार उनके जीतने की संभावना बहुत कम है. दरअसल नॉर्वेजियन नोबेल समिति आमतौर पर उन प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करती है जो शांति की स्थायित्व, अंतरराष्ट्रीय भाईचारे की भावना और ऐसी संस्थाओं के शांत कार्यों को प्रोत्साहित करते हैं जो इन उद्देश्यों को मजबूत करती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का बहुपक्षीय संस्थाओं के प्रति असहज रवैया और वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रति उनकी उदासीनता उनके खिलाफ जा सकती है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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