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Home World बांग्लादेश में चुनाव के साथ जनमत संग्रह क्यों हो रहा? जुलाई नेशनल चार्टर पर जनता की मुहर लगी तो क्या-क्या बदलेगा?

बांग्लादेश में चुनाव के साथ जनमत संग्रह क्यों हो रहा? जुलाई नेशनल चार्टर पर जनता की मुहर लगी तो क्या-क्या बदलेगा?

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बांग्लादेश में चुनाव के साथ जनमत संग्रह क्यों हो रहा? जुलाई नेशनल चार्टर पर जनता की मुहर लगी तो क्या-क्या बदलेगा?
बांग्लादेश में जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत संग्रह से क्या बदलेगा?

Bangladesh Referendum during Election: बांग्लादेश में अगला राष्ट्रीय चुनाव 12 फरवरी, 2026 को आयोजित किया जाएगा. यह चुनाव अगस्त 2024 में हुए उस छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद पहला राष्ट्रीय मतदान होगा, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था. मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए बताया कि देश के सभी 300 संसदीय क्षेत्रों में एक साथ मतदान होगा और इसी दिन एक राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह भी कराया जाएगा. बांग्लादेश में 50 सीटें महिलाओं के लिए भी आरक्षित होते हैं. इनके लिए चुनावों की घोषणा की पुख्ता तारीख तो सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि ये 13 फरवरी को कराए जा सकते हैं. बांग्लादेश नए विहान की उम्मीद में है, लेकिन रेफरेंडम से क्या बदलाव आ सकते हैं, इस पर एक नजर डालते हैं.  

बांग्लादेश में रेफरेंडम क्यों? 

बांग्लादेश एक बार फिर बड़े राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है. जुलाई-अगस्त 2024 के जनआंदोलन के बाद बनी अंतरिम सरकार अब संविधान में बड़े सुधारों को जनता की मंजूरी दिलाने की तैयारी में है. इसके लिए जुलाई नेशनल चार्टर (July National Charter) संवैधानिक सुधार 2025 को आधार बनाकर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने का फैसला किया गया है. बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनावों की घोषणा की गई है, जिसके साथ ही यह रेफरेंडम भी करवाया जाएगा. लेकिन सवाल है कि इस पूरी प्रक्रिया का मतलब क्या है और इससे आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

जुलाई नेशनल चार्टर क्या है?

यह एक राजनीतिक और संवैधानिक सहमति दस्तावेज है, जिसे जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र-जन आंदोलन के बाद तैयार किया गया, जिसके तहत शेख हसीना की सरकार को गिराकर अंतरिम सरकार बनाई गई. इसमें चुनाव व्यवस्था, संसद की संरचना, प्रधानमंत्री की शक्तियां, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने से जुड़े 30 अहम सुधार प्रस्ताव शामिल हैं.

रेफरेंडम क्यों कराया जा रहा है और जनता से क्या पूछा जाएगा?

सरकार का कहना है कि संविधान में इतने बड़े बदलाव को सिर्फ संसद से पास कराना पर्याप्त नहीं है. इसके लिए सीधे जनता की मंजूरी जरूरी है. इसलिए इन सुधारों को जनमत संग्रह में रखा जा रहा है, ताकि लोग खुद तय करें कि वे इस नए ढांचे से सहमत हैं या नहीं. रेफरेंडम में एक सीधा सवाल होगा कि क्या आप जुलाई नेशनल चार्टर और उसमें बताए गए संवैधानिक सुधारों से सहमत हैं? मतदाता “हां” या “नहीं” में वोट करेंगे. 

अगर जनता ने हां में जवाब दिया तो?

अगर जनता ने “हां” कहा तो- एक संवैधानिक सुधार परिषद बनेगी. चुने गए सांसद ही इसके सदस्य होंगे. यह परिषद 180 दिनों में संविधान में बदलाव पूरा करेगी. सुधार अंतिम होंगे और अलग से किसी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी. मौजूदा एक-सदनीय संसद की जगह दो सदनों वाली संसद बनेगी. ऊपरी सदन में 100 सदस्य होंगे, इससे छोटे दलों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा.

जुलाई नेशनल चार्टर से बदलेगा संविधान और सत्ता संतुलन 

प्रस्तावित सुधारों के तहत यह दावा किया जा रही है कि प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय होगी. राष्ट्रपति की भूमिका मजबूत होगी. न्यायपालिका और चुनाव आयोग को ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी और विपक्ष को संसद में ज्यादा अधिकार मिलेंगे. इस प्रक्रिया के जरिए बांग्लादेश खुद को लोकतांत्रिक सुधारों का उदाहरण दिखाना चाहता है. वह यह संदेश देना चाहता है कि सत्ता परिवर्तन जनता की इच्छा से हुआ है. भविष्य में चुनावों की वैधता पर उठने वाले सवालों से बचना चाहता है

चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस फिर से प्रोफेसर यूनुस बनेंगे

बांग्लादेश में होने वाले आगामी राष्ट्रीय चुनाव अहम मुद्दा है. अंतरिम सरकार के चीफ एजवाइजर मोहम्मद यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश 12 फरवरी को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने खालिदा जिया की मौत के बाद ढाका में आयोजित शोक सभा में उपस्थित पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक से कहा कि चुनाव के बाद वह अपनी पूर्व पेशेवर भूमिका में लौट जाएंगे.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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