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बांग्लादेश चुनाव: BJP जीती एक सीट, पंजा, साइकल, हाथी और लालटेन खस्ता हाल

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बांग्लादेश चुनाव: BJP जीती एक सीट, पंजा, साइकल, हाथी और लालटेन खस्ता हाल
बांग्लादेश में चुनाव के दौरान वोट करने जाती महिलाएं. फोट- PTI.

बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति की तस्वीर ही बदल दी है. बांग्लादेश ने तारीक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को निर्णायक जनादेश दिया है. गुरुवार को हुए मतदान के अनौपचारिक नतीजे लगातार सामने आ रहे हैं. BNP ने 300 सदस्यीय राष्ट्रीय संसद (Jatiya Sangsad) में 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है. यह चुनाव BNP और उसकी पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला था. शेख हसीना सरकार के पतन में अहम भूमिका निभाने वाले छात्र नेताओं की नई नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाई. यह पार्टी जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी. इस चुनाव की एक दिलचस्प झलक यह रही कि भारत की राजनीति से मिलते-जुलते नामों और चुनाव चिह्नों वाली कई पार्टियां मैदान में उतरीं.

भारत में केंद्र सरकार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार है. इसी तरह बांग्लादेश में भी बीजेपी है, हालांकि इसका चुनाव चिह्न बैलगाड़ी है. यह बांग्लादेश जातीय पार्टी  (Bangladesh Jatiya Party (BJP)) है. इस बीजेपी के उम्मीदवार अंदलीव रहमान, बांग्लादेश की 13वीं राष्ट्रीय संसद के चुनाव में भोला-1 निर्वाचन क्षेत्र से अनौपचारिक रूप से निर्वाचित घोषित किए गए हैं. यह बीजेपी BNP प्रमुख तारिक रहमान के सहयोगी है. सरकारी समाचार एजेंसी BSS की रिपोर्ट के अनुसार, अगारगांव स्थित निरबाचन भवन के रिजल्ट कलेक्शन एंड डिसेमिनेशन सेंटर में घोषित नतीजों के मुताबिक रहमान को 1,05,543 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात के उम्मीदवार मोहम्मद नजरुल इस्लाम को 75,337 वोट प्राप्त हुए.

इसी तरह हाथी और साइकिल जैसे प्रतीकों वाली पार्टियां भी चुनावी मैदान में दिखीं, पर बांग्लादेश की जनता ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया. हाथी के चुनाव चिह्न वाली बांग्लादेश रिपब्लिकन पार्टी (BRR) और साइकिल निशान वाली जातीय पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकीं. भारत में ये प्रतीक क्रमशः बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के हैं. इसी तरह हाथ के प्रतीक वाली बांग्लादेश मुस्लिम लीग (BML) और लालटेन चिन्ह वाली एक अन्य पार्टी भी पूरी तरह असफल रहीं, जबकि भारत में हाथ कांग्रेस और लालटेन आरजेडी का चुनाव चिह्न है.

Andaleeve Rahman
एंडालीव रहमान. फोटो- एक्स.

बांग्लादेश के 13वें राष्ट्रीय चुनाव की पृष्ठभूमि

हिंसा, आगजनी और अव्यवस्था के बीच अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन ने शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार का अंत कर दिया, जिसके बाद वे भारत चली गईं. इस दौर में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई. इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी. पिछले 18 महीने बांग्लादेश के लिए बेहद उथल-पुथल भरे रहे. 

इस बार की सबसे बड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि यह रही कि लंबे समय तक सत्ता में रही अवामी लीग चुनाव लड़ ही नहीं सकी. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली इस पार्टी पर अंतरिम सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके चलते वह मैदान से बाहर हो गई. नतीजतन, चुनावी मुकाबला मुख्यतः BNP और अन्य दलों के बीच सिमट गया.

18 महीने बाद हुआ चुनाव और जनमत-संग्रह

12 फरवरी को हुए चुनाव में मतदाताओं ने पहली बार दो वोट डाले. एक नई सरकार चुनने के लिए और दूसरा ‘जुलाई चार्टर’ नामक जनमत-संग्रह के लिए. जनमत-संग्रह के नतीजों में भारी बहुमत से ‘हाँ’ के पक्ष में फैसला आया. इससे संकेत मिलता है कि बांग्लादेश की जनता संविधान में संशोधन चाहती है. चुनाव आयोग के अनुसार, कुल मतदान लगभग 59.44 प्रतिशत रहा. 

करीब 12.7 करोड़ मतदाताओं में बड़ी संख्या पहली बार वोट डालने वालों की थी. 299 सीटों पर हुए चुनाव में एक सीट उम्मीदवार की मृत्यु के कारण खाली रही. चुनाव आयोग ने जमात उम्मीदवार नूरुज्जमां बदोल के निधन के बाद शेरपुर-3 सीट पर मतदान स्थगित कर दिया.

जनमत संग्रह को भी बांग्लादेश का पूरा समर्थन

बांग्लादेश की जनता ने मोहम्मद यूनुस के द्वारा प्रस्तावित रेफरेंडम पर भी अपनी मुहर लगाई है. यह बांग्लादेश में चुनाव सुधार और प्रधानमंंत्री पद पर लिमिट के लिए लाई गई सुधार योजना है. इसके पक्ष में 68.1% वोट पड़े. जबकि 31.9% लोगों ने इसे नकारा. 

BNP गठबंधन को स्पष्ट बहुमत

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार BNP ने 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया. तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP ने शानदार प्रदर्शन किया और उसके गठबंधन को कुल 212 सीटें मिलीं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नतीजा बांग्लादेश की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ है. BNP अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6, दोनों सीटों से जीत दर्ज की. 17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान के लिए यह जीत काफी अहम मानी जा रही है और उनका बांग्लादेश का अगला पीएम बनना भी लगभग तय है.

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इमेज- स्क्रीनशॉट (डेली स्टार)

जमात गठबंधन की स्थिति

चुनाव में जमात-ए-इस्लामी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 68 सीटें जीतीं, जबकि उसके गठबंधन ने कुल 77 सीटों पर कब्जा किया. कमल के प्रतीक वाली NCP को 6 सीटें मिलीं. बांग्लादेश खिलाफत मजलिस को दो और खिलाफत मजलिस को एक सीट मिली. इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश सिर्फ एक सीट जीत सका, जबकि सात सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं. 

इन सीटों पर नतीजे रोके गए

बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन के मुताबिक कानूनी कारणों से चटगांव-2 और चटगांव-4 सीटों के नतीजे रोक दिए गए. 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने चटगांव-4 के उम्मीदवार मोहम्मद असलम चौधरी को चुनाव लड़ने की अनुमति दी, लेकिन अंतिम निपटारे तक परिणाम घोषित न करने का आदेश बरकरार रखा. इसी तरह चटगांव-2 के उम्मीदवार सरवर आलमगीर के मामले में भी फैसला लंबित रहने तक नतीजों पर रोक लगाई गई.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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