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पाकिस्तान से इजरायल-तालिबान को भेजा गया लेटर, बातें ऐसी कि मुनीर का खून खौल उठेगा

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पाकिस्तान से इजरायल-तालिबान को भेजा गया लेटर, बातें ऐसी कि मुनीर का खून खौल उठेगा
बलूचिस्तान के नेता ने इजरायल-अफगानिस्तान को पत्र लिखकर पाकिस्तान, ईरान और हमास का मुद्दा उठाया. फोटो- एक्स.

Balochistan leader writes Letter to Israel Afghanistan: बलूचिस्तान में स्वतंत्रता की मांग पाकिस्तान के लिए अब केवल देश के अंदर की बात नहीं रह गई है. बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच अब दुनिया भर में अपने संबंध बढ़ाने का प्रयास कर रहा है. बलूचिस्तान में चीन के बारे में भारत को आगाह करने के बाद, मीर यार बलूच ने इजरायल के विदेश मंत्री गिदेओन सा’अर को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने पाकिस्तान पर हमास को कथित समर्थन देने और ईरान के ‘क्रांतिकारी धुरी’ के साथ उसके रणनीतिक गठजोड़ को क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए व्यापक खतरा बताया है. इतना ही नहीं मीर यार ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी को भी पत्र भेजा है. 

अपने पत्र में मीर यार बलूच ने तर्क दिया कि इजरायल की सुरक्षा चुनौतियां मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में सक्रिय राज्य-समर्थित उग्रवाद के एक व्यापक नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं, इनमें आतंकी हमलों से लेकर प्रॉक्सी युद्ध तक शामिल हैं. उनके अनुसार, यह गठजोड़ हिंसा के ऐसे चक्रों को बढ़ावा देता है जो अलग-अलग संघर्ष क्षेत्रों से कहीं आगे तक फैलते हैं. 

ईरान के साथ पाकिस्तान के संबंधों ने पैदा किया खतरा

इजरायली विदेश मंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा, “रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान इजरायल के सामने जारी क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच मौजूद रणनीतिक वास्तविकताओं को स्वीकार करता है. हम पाकिस्तान द्वारा हमास जैसे चरमपंथी नेटवर्क को दिए जा रहे लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक, वैचारिक और परिचालन समर्थन तथा ईरान के इस्लामिक गणराज्य के साथ उसके रणनीतिक गठजोड़ को भी स्वीकार करते हैं. यह ऐसी गतिशीलताएं हैं जिन्होंने संघर्ष को भड़काया है, कई क्षेत्रों को अस्थिर किया है और सीधे तौर पर इजरायल तथा व्यापक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए खतरा पैदा किया है.”

मीर यार बलूच ने यह भी कहा कि ईरान में भविष्य में होने वाला कोई भी राजनीतिक परिवर्तन तब तक नाजुक रहेगा, जब तक उनके शब्दों में “आंतरिक उपनिवेशवाद” को संबोधित नहीं किया जाता. उन्होंने लिखा, “गैर-फारसी राष्ट्रों विशेष रूप से बलूचिस्तान, कुर्दिस्तान और अल-अहवाज पर ईरान का निरंतर राजनीतिक और सैन्य वर्चस्व असंतोष, अशांति और क्षेत्रीय हस्तक्षेपवाद का एक स्थायी स्रोत बना हुआ है.” उन्होंने आगे कहा कि इन समुदायों को व्यवस्थित रूप से अधिकारों, आत्मनिर्णय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित किया जाता है.

पाकिस्तानी कब्जे से बलूचिस्तान की मुक्ति आतंकवाद कमजोर करेगी

उन्होंने यह भी दावा किया कि “पाकिस्तानी कब्जे से बलूचिस्तान की मुक्ति” पाकिस्तान की कथित तौर पर आतंकवाद निर्यात करने की क्षमता को काफी कमजोर कर देगी, जिससे इजरायल और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे कम होंगे. मीर यार बलूच ने संभावित रणनीतिक लाभों पर भी प्रकाश डाला और कहा, “इसके अतिरिक्त, एक स्वतंत्र बलूचिस्तान अरब सागर से मध्य एशिया और उससे आगे तक क्षेत्रीय व्यापार के लिए रणनीतिक समुद्री पहुंच और सुरक्षित आर्थिक मार्ग प्रदान करेगा. यह एक ऐसा अवसर जो सुरक्षित व्यापार गलियारों, ऊर्जा परिवहन मार्गों और विविध भू-राजनीतिक साझेदारियों में इजरायल के व्यापक हितों के साथ मेल खा सकता है.”

अफगानिस्तान को भी संबोधित पत्र

मीर यार बलूच ने अफगानिस्तान के नाम भी संदेश भेजा है. तालिबान शासन के विदेश मंत्री आमिर मुत्तकी को लिखे खुले पत्र में कहा गया है कि बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध सदियों पुराने हैं, जिनकी जड़ें आधुनिक सीमाओं और जबरन किए गए विभाजनों से भी पहले की हैं. उन्होंने लिखा कि दोनों क्षेत्रों के लोग लंबे समय से पड़ोसी, भाईचारे से जुड़े समुदाय और व्यापारिक साझेदार रहे हैं, जिन्हें साझा इतिहास, भौगोलिक निकटता और आपसी सम्मान जोड़ता रहा है.

मीर यार बलूच के अनुसार, एक स्वतंत्र बलूचिस्तान अफगानिस्तान के लिए नए और ऐतिहासिक अवसर पैदा कर सकता है. अरब सागर से लगी अपनी प्राकृतिक तटरेखा के कारण बलूचिस्तान अफगानिस्तान को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने के लिए एक सुरक्षित, स्वतंत्र और संप्रभु समुद्री मार्ग उपलब्ध करा सकता है. बलूचिस्तान के बंदरगाहों के जरिए अफगानिस्तान न केवल अरब सागर तक पहुंचेगा, बल्कि मध्य एशिया को मध्य पूर्व, यूरोप और उससे आगे के अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से भी बिना किसी बाधा के जोड़ सकेगा.

उन्होंने आगे कहा कि उनका पक्का विश्वास है कि पाकिस्तानी प्रभुत्व से मुक्त होने के बाद अफगानिस्तान और बलूचिस्तान दोनों ऐसी भू-राजनीतिक स्थिति में होंगे, जो उन्हें क्षेत्र के सबसे स्थिर और विकसित देशों में शामिल होने का अवसर देगी. भविष्य में दोनों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते व्यापार और पारगमन से लेकर ऊर्जा सहयोग, बुनियादी ढांचे के विकास, सीमा सुरक्षा तथा आपसी संप्रभुता और गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों पर आधारित क्षेत्रीय शांति पहलों तक विस्तारित हो सकते हैं.

भारत में डॉ. जयशंकर के नाम पर भेजा गया पत्र 

मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे अपने पत्र में चेतावनी दी कि चीन और पाकिस्तान के बीच तेजी से बढ़ती रणनीतिक साझेदारी बलूचिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले कुछ महीनों में चीन, पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में अपनी सेना तैनात कर सकता है. उनके अनुसार, चीन-पाक गठजोड़ अब सिर्फ कूटनीतिक या आर्थिक समझौतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर जमीन पर दिखने लगा है, जो बलूचिस्तान की सुरक्षा, स्वतंत्रता और भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है. उन्होंने यह भी कहा कि 60 मिलियन से ज्यादा बलूच लोगों की इच्छा के खिलाफ किसी भी विदेशी सैन्य मौजूदगी से हालात और बिगड़ सकते हैं, जिसका असर भारत सहित पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा.

चीन और पाक गठजोड़ की खोली पोल, ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की

पत्र में मीर यार बलोच ने पाकिस्तान पर पिछले 79 वर्षों से बलूचिस्तान पर कब्जा जमाए रखने, दमन, मानवाधिकार उल्लंघन और राज्य हिंसा के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), जो बेल्ट एंड रोड पहल का अहम हिस्सा है और जिसका बड़ा भाग बलूचिस्तान से गुजरता है, अब अपने अंतिम चरण में है और इसी के जरिए चीन और पाकिस्तान क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं. उन्होंने भारत के स्पष्ट रुख का समर्थन किया कि CPEC भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करता है, और साथ ही पाकिस्तान व पीओके में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत की कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना करते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की सख्त नीति का संकेत बताया.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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