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Home World रमजान में गुमनाम ने 865000000 रुपये किए दान, क्या है यूएई की पहल ‘11.5’, जिसके लिए दी इतनी बड़ी रकम

रमजान में गुमनाम ने 865000000 रुपये किए दान, क्या है यूएई की पहल ‘11.5’, जिसके लिए दी इतनी बड़ी रकम

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रमजान में गुमनाम ने 865000000 रुपये किए दान, क्या है यूएई की पहल ‘11.5’, जिसके लिए दी इतनी बड़ी रकम
यूएई में 11.5: एज ऑफ लाइफ पहल. फोटो- कैनवा.

UAE 11.5 Edge of Life: यूएई के एक गुमनाम परोपकारी व्यक्ति ने बच्चों की भूख से लड़ने के लिए 3.5 करोड़ यूएई दिरहम (लगभग 86.5 करोड़) का दान दिया है. यह दान ‘11.5: एज ऑफ लाइफ’ अभियान के तहत रमजान के दौरान शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य दुनिया भर में पाँच मिलियन बच्चों को भूख से बचाना है. इस पहल के तहत कम से कम 1 अरब दिरहम जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि बचपन के कुपोषण से निपटने के लिए टिकाऊ कार्यक्रमों को वित्तपोषित किया जा सके.

रमजान में भूख मिटाने की ग्लोबल पहल

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘11.5: एज ऑफ लाइफ’ अभियान की शुरुआत दुबई के शासक, संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने की. इस पहल का उद्देश्य अल्पकालिक राहत के बजाय बच्चों की भूख की समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाना है. 

यह अभियान 2015 में स्थापित मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ग्लोबल इनिशिएटिव्स के तहत संचालित हो रहा है. इसमें व्यक्तियों, संस्थानों और व्यवसायों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली है, जिसमें भूख के खिलाफ प्रयासों को अस्थायी संकट की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक निरंतर नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है.

अभियान के इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन के लिए इसे यूनिसेफ, सेव द चिल्ड्रन, चिल्ड्रन्स इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन और एक्शन अगेंस्ट हंगर के साथ साझेदारी में संचालित किया जा रहा है. ये संगठन जमीनी स्तर पर काम करने की विशेषज्ञता और संचालन क्षमता प्रदान करते हैं.

‘11.5’ का क्या है विशेष अर्थ

अभियान से जुड़ा 11.5 का आंकड़ा भी काफी अहमियत रखता है. दरअसल, यह छह महीने से पाँच साल तक के बच्चों में तीव्र कुपोषण की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है. इसमें ‘मिड-अपर आर्म सर्कमफेरेंस’ (बांह की मध्य परिधि) को मापा जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 11.5 सेंटीमीटर से कम माप गंभीर तीव्र कुपोषण के संकेतों में से एक है. 

विश्व स्तर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की होने वाली मौतों में 45% कुपोषण के कारण होती है. यह किसी भी अन्य कारणों में सबसे बड़ा है. यूएई के मीडिया ऑफिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में 11.8 करोड़ बच्चों को भूख का सामना करना पड़ा. 5 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक 4 में से 1 बच्चा गंभीर कुपोषण से पीड़ित है. इसके अनुसार, 18.1 करोड़ बच्चों को स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक न्यूनतम पोषण नहीं मिल पा रहा है.

 ऐसे में यह अभियान बच्चों को भूख से बचाने के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए लगातार और अधिक सहयोग जुटा रहा है. एमबीआरजीआई के तहत संचालित 11.5: एज ऑफ लाइफ अभियान, महामहिम शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के निर्देशों में शुरू की गई रमजान मानवीय पहलों की उसी सफल श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे यूएई में हर साल व्यापक समर्थन मिलता रहा है. 

पिछले सालों में कौन से इनीशिएटिव उठाए गए?

रमजान 2020 में ‘10 मिलियन मील्स’ अभियान के तहत 1.53 करोड़ से अधिक भोजन एकत्र किए गए, जबकि रमजान 2021 में ‘100 मिलियन मील्स’ अभियान ने चार महाद्वीपों के 30 देशों में खाद्य सहायता पहुंचाई. इसके बाद रमजान 2022 में ‘1 बिलियन मील्स’ अभियान ने एक महीने से भी कम समय में लक्ष्य हासिल करते हुए 50 देशों में सहायता दी.

रमजान 2023 में ‘1 बिलियन मील्स एंडोमेंट’ अभियान के जरिए 1.075 अरब एईडी जुटाए गए, वहीं रमजान 2024 में शुरू किए गए ‘मदर्स एंडाउमेंट’ अभियान ने सतत शिक्षा के लिए कोष स्थापित करते हुए लक्ष्य से कहीं अधिक, 1.4 अरब से ज्यादा की राशि एकत्र की. जबकि 2025 में ‘फादर्स एंडाउमेंट’ के तहत यूएई के गरीब और जरूरतमंद पिताओं को सम्मानित किया गया था. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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