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Home World दुनिया की इकलौती ऐसी जगह, जहां घड़ी-कैलेंडर नहीं; नहीं जानते ‘टाइम’ क्या है

दुनिया की इकलौती ऐसी जगह, जहां घड़ी-कैलेंडर नहीं; नहीं जानते ‘टाइम’ क्या है

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दुनिया की इकलौती ऐसी जगह, जहां घड़ी-कैलेंडर नहीं; नहीं जानते ‘टाइम’ क्या है
जनजाति की एआई से बनाई गई इमेज.

अमेजन के घने जंगलों में रहने वाली ‘अमोंडावा’ (Amondawa) जनजाति की लाइफस्टाइल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. जहां हम एक-एक मिनट का हिसाब रखते हैं, वहीं इस कबीले के पास ‘समय’ (टाइम) नाम का कोई शब्द ही नहीं है. यहां न साल बदलते हैं, न महीने और न ही किसी को अपनी उम्र का पता है.

इवेंट्स याद हैं, पर समय का अता-पता नहीं

यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ और ब्राजील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ रोंडोनिया के रिसर्चर्स ने इस जनजाति पर लंबी स्टडी की है. साल 1986 में पहली बार ये दुनिया की नजर में आए थे. साइकोलॉजी ऑफ लैंग्वेज के प्रोफेसर क्रिस सिन्हा के अनुसार, ऐसा नहीं है कि ये लोग बीते हुए कल या आने वाले कल को नहीं समझते, लेकिन उनके लिए ‘समय’ कोई अलग चीज नहीं है. उनके यहां जिंदगी को तारीखों से नहीं, बल्कि लाइफ की स्टेज या किसी खास उपलब्धि से नापा जाता है.

न पीछे ‘पास्ट’ है, न आगे ‘फ्यूचर’

रिसर्च में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है. हम अक्सर कहते हैं कि ‘वक्त आगे बढ़ रहा है’ या ‘बीता वक्त पीछे छूट गया’, लेकिन अमोंडावा जनजाति ऐसा नहीं मानती. वे भाषा में आगे या पीछे जैसे शब्दों का इस्तेमाल सिर्फ चलने-फिरने या नदी-पहाड़ों के लिए करते हैं, समय के लिए नहीं. जानकारों का मानना है कि उनके पास घड़ी या कैलेंडर जैसी ‘टाइम टेक्नोलॉजी’ नहीं है, इसलिए वे समय को एक अलग कॉन्सेप्ट की तरह नहीं देखते.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

मीडिया रिपोर्टस में छपे लेख के अनुसार, फ्रांस के CNRS के भाषा वैज्ञानिक पियरे पिका का कहना है कि यह स्टडी काफी दिलचस्प है, लेकिन हमें इसे बहुत बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए. उनके मुताबिक, छोटी सोसायटियों में लोग अक्सर ‘नदी की दिशा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें समय के साथ जोड़ना मुश्किल होता है. रिसर्चर्स को यह भी लगता है कि इस कबीले में गिनती (नंबर्स) का सीमित होना भी इसकी एक वजह हो सकती है.

नई पीढ़ी सीख रही है घड़ी देखना

जैसे-जैसे अमोंडावा जनजाति के लोग पुर्तगाली (Portuguese) भाषा के संपर्क में आ रहे हैं, उनकी लाइफ बदल रही है. रिसर्चर्स के मुताबिक, वे अब धीरे-धीरे समय और तारीखों को समझना शुरू कर रहे हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि उनकी इस पुरानी और अनोखी संस्कृति के खत्म होने से पहले इसे पूरी तरह रिकॉर्ड कर लिया जाए.

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