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क्या जयललिता का शून्य भर पायेंगी शशिकला?

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क्या जयललिता का शून्य भर पायेंगी शशिकला?
!!आर राजगोपालन,वरिष्ठ पत्रकार!!
तमिलनाडु की राजनीति अब दिलचस्प चरण में प्रवेश करनेवाली है. राज्यपाल ने पनीरसेल्वम का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. शशिकला राज्य की बागडोर थामने वाली हैं. आइए जानते हैं शशिकला के सामने क्या चुनौतियां होंगी.
जयललिता की मृत्यु के बाद अन्नाद्रमुक की महासचिव बनायी गयीं उनकी बेहद करीबी शशिकला अब राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभालने जा रही हैं. इस दौरान वे स्वर्गीय जयललिता के आधिकारिक निवास पोएस गार्डेन की चहारदीवारी में ही रही थीं. अब उन्हें सामने आकर जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरना है. लेकिन, चिनम्मा यानी शशिकला के रास्ते में कई बाधाएं भी हैं. अगले सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय आय से अधिक संपत्ति रखने के मुकदमे का फैसला दे सकता है. इसमें जयललिता के साथ शशिकला भी अभियुक्त हैं.
नकारात्मक फैसला उनके मुख्यमंत्रित्व काल की अवधि को बीच में ही खत्म कर सकता है. यदि कानूनी लड़ाई से वह उबर जाती हैं, तो उन्हें राज्य की नौकरशाही के साथ मिल कर श्रीलंकाई तमिल उग्रवादियों से खतरे का बंदोबस्त करना होगा. कई ऐसे तत्व अब भी राज्य में सामाजिक और सांस्कृतिक समूहों की अाड़ में सक्रिय हैं. शशिकला को एक सप्ताह के भीतर राज्य का बजट भी पेश करना है. तमिलनाडु के हिस्से के केंद्रीय फंड को हासिल करने के लिए उन्हें केंद्र सरकार को भी खुश रखना होगा. राज्य में सूखे की स्थिति से निबटने की चुनौती भी उनके सामने है.
जनवरी में राज्य सरकार ने सभी जिलों को सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया था. पनीरसेल्वम सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है, जिनमें भूमि कर में छूट भी शामिल है.
जयललिता ने चार समुदायों- थेवर, गोउंदर, वणियार और दलित- में से पहले दो तबकों को साध के रखा था. लेकिन, गोउंदर शशिकला के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. पनीरसेल्वम और शशिकला थेवर समुदाय से आते हैं. इन समुदायों में संतुलन बना कर शशिकला को राज्य की आबादी में बीस प्रतिशत हिस्सा रखनेवाले मुसलिम और ईसाई समुदायों को भी तुष्ट करना होगा.
जयललिता की मृत्यु के बाद शशिकला के 20-25 करीबी रिश्तेदारों ने शव के इर्द-गिर्द घेरा बना लिया था और यह सुनिश्चित किया था कि शशिकला को ही कमान मिले. इन रिश्तेदारों को सचिवालय से दूर रखना भी बड़ी चुनौती होगी. राज्य विधानसभा में 90 सदस्यों वाली मुख्य विपक्षी द्रमुक भी उन्हें चैन से नहीं रहने देगा. हाल में जलीकट्टू प्रदर्शनों पर पुलिस की ज्यादती और भ्रष्टाचार भी अहम मुद्दे होंगे.
शशिकला के पास जयललिता का करिश्मा नहीं है. बहुत सारे लोग उनकी प्रशासनिक क्षमता को लेकर भी आशंकित हैं. अभी तो पार्टी के 134 विधायक एक साथ हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या शशिकला आगामी चार सालों तक इस एकजुटता को बनाये रखने में सफल हो पायेंगी? लेकिन, इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या वह पार्टी कॉडर को अपनी उपयोगिता साबित कर पायेंगी. जो भी हो, तमिलनाडु की राजनीति अब एक दिलचस्प चरण में प्रवेश कर रही है.
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