‘रंगोली’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘रंगावली’ से हुई है, जो ‘रंग’ और ‘आवली’ अर्थात ‘पंक्ति’ से मिल कर बना है, जिसका अर्थ है- ‘रंगों की एक पंक्ति’. रंगोली भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और लोक-कला है. रंगोली को ‘अल्पना’ के नाम से भी जाना जाता है.
राजस्थान का मांडना को ‘मंडन’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है सज्जा या सजावट. मांडना के डिजाइन एवं आकृतियों को विभिन्न पर्वों, उत्सवों तथा ॠतुओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है. कुमाऊं के ‘लिखथाप’ या थापा में अनेक प्रकार के आलेखन प्रतीकों, कलात्मक डिजाइनों, बेलबूटों का प्रयोग किया जाता है. लिखथाप में समाज के अलग-अलग वर्गों द्वारा अलग-अलग चिह्नों और कला माध्यमों का प्रयोग किया जाता है. आमतौर पर दक्षिण भारतीय रंगोली ज्यामितीय आकारों की प्राथमिकता होती है, जबकि उत्तर भारत की रंगोली शुभ चिह्नों पर आधारित होती है.
