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संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर समस्या, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

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संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर समस्या, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत जनवरी, 1948 में संयुक्त राष्ट्र गया. इसके बाद पाकिस्तान भी यहां मुद्दा उठाया. इसके बाद यूएन ने एक कमीशन बैठाया, जिसका नाम ‘यूनाइटेड नेशन कमीशन फॉर इंडिया एंड पाकिस्तान’ था. इसमें पांच सदस्य थे. इन पांचों लोगों ने भारत और कश्मीर का दौरा किया और हल निकालने की कोशिश की, लेकिन नहीं निकला. हालांकि, इस कमीशन से एक समाधान निकला. इसमें तीन कॉनसेक्युन्शल नॉन बाइडिंग स्टेप्स थे. कॉनसेक्युन्शल का अर्थ है कि तीनों शर्तों में यदि पहली शर्त मानी गयी, तो दूसरी शर्त मानी जायेगी. ये तीन समाधान ऐेसे हैं.

-पाकिस्तान को कश्मीर से अपनी सेनाएं तुरंत हटा लेनी चाहिए.
-भारत को सिर्फ व्यवस्था बनाये रखने के लिए कम-से-कम सेना रखकर सभी आर्मी हटा लेनी चाहिए.
-एक प्लेबिसाइट लोगों का मत जानने के लिए लागू किया जायेगा.
हालांकि, पिछले 70 वर्षों में पाकिस्तान ने अपनी सेना कश्मीर से नहीं हटायी, जिस वजह से आगे की दो शर्तें नहीं मानी गयीं.
कश्मीर एलओसी
1948 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हुआ था. सीजफायर के बाद डीफैक्टो बॉर्डर बना. वर्तमान में यही बॉर्डर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करता है. इसी बॉर्डर को 1972 में एलओसी नाम दिया गया. यह नाम शिमला समझौते में तय किया गया. इसमें यह भी कहा गया कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर मामले पर खुद ही बात करके सुलझायेंगे. इसमें बाहरी देश अथवा यूएन का हस्तक्षेप नहीं होगा.
कश्मीर एलएसी
कश्मीर का एक हिस्सा ऑक्साईचीन है. यहां पर चाइना का कंट्रोल है. भारत स्थित कश्मीर और चाइना का अक्साई चीन बॉर्डर को ही लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी कहा जाता है. चीन ने 1962 में अक्साई चीन पर कब्जा किया था. भारत-चीन युद्ध के बाद पाकिस्तान ने चीन को कश्मीर का एक हिस्सा दे दिया. इस हिस्से को शक्सगाम वैली कहा जाता है. यह बात शिमला समझौते के अनुसार गलत थी.
कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की समस्या
1990 में कश्मीरी पंडितों को बहुत अधिक विरोध और हिंसा झेलनी पड़ी. कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़कर जाने लगे. इस दौरान कई कश्मीरियों को गोली मार दी गयी. डर और दहशत के बीच कुछ ही महीनों में करीब 2.5 से 3 लाख कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ कर चले गये.
कश्मीर में आफस्पा
कश्मीर में अराजकता और आतंकी हमले को देखते हुए भारत सरकार ने यहां आफस्पा लागू कर दिया. इसके तहत सेना को विशेष शक्तियां दी गयीं. इसके बाद सेना ने कश्मीर में कार्रवाई शुरू की. इसके बाद धीरे-धीरे हालात काबू में आने लगे. 1990 से 2000 तक आतंकी गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की गयी. 2004 में यहां आतंकी गतिविधियां थोड़ी कम हुई. 2016 में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में आतंकी गतिविधियां फिर बढ़ गयी. इसके बाद सेना ने ऑपरेशन ऑल आउट चलाया.
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