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Home विशेष उल्लेख बागवानी ने बदल दी जिंदगी

बागवानी ने बदल दी जिंदगी

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बागवानी ने बदल दी जिंदगी
सुनील मिंज
जान्हो, उरांव आदिवासियों का गांव, जो भूगोल में लातेहार जिला अंतर्गत मनिका प्रखंड में स्थित है. आज से पहले इस गांव की चर्चा अखबारों में कभी नहीं हुई. गांव की कुल आबादी 1285 है, जिनमें आदिवासियों की आबादी 549 है. गांव में आधारभूत संरचना का अभाव है. सड़क है तो उबड़-खाबड़, बिजली का आना भगवान के दर्शन के समान है. पीने का पानी पर्याप्त हैं, लेकिन पटवन के लिए नाकाफी.
सुविधा के नाम पर अगर कुछ है] तो वह सिर्फ प्राथमिक स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र. लोगों को स्वास्थ्य, बैंक और डाकघर की सुविधाओं के लिए 15 किलोमीटर दूर मनिका जाना पड़ता है. इनकी आजीविका का मुख्य स्रोत वर्षा आधारित कृषि है. साल के बाकी महीने उनके खेत खाली पड़े रहते हैं. गांव के अधिकतर लोग मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर जाते हैं, जबकि कुछ लोग मनरेगा की योजनाओं पर निर्भर हैं. वे अपने ही गांव में 180 रुपये कमा लेते हैं.
इस गांव की परिस्थिति से पूर्व से ही, यानी पानी चेतना मंच के समय से ही वाकिफ थे चार सोशल इंजीनियर- मनरेगा स्टेट सोशल टीम के वर्तमान में सदस्य जेम्स हेरेंज हैं, मनरेगा के स्टेट रिसोर्स पर्सन एवं दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन के राज्य उप संयोजक मिथिलेश कुमार तथा पचाठी सिंह और उनकी मुखिया पत्नी. ये ग्राम स्वराज अभियान मजदूर संघ के सक्रीय सदस्य हैं.
2016-17 की बात है. इन तीनों कार्यकर्ताओं ने सबसे पहले आम बागवानी योजना को जान्हो ग्रामसभा के लाभुकों द्वारा अपनी ग्रामसभा में पास कराकर रजिस्टर में चढ़वाया. फिर इस योजना के लिए प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर के अधिकारियों से लॉबिंग की. परिणाम के तौर पर एक अप्रैल 2017 से जान्हो गांव में आम बागवानी की शुरुआत हो गयी. रजनी देवी, पति कमलेश उरांव ने अपने जमीन पर 221 आम के पौधे लगाये. लीली देवी, पति राजेश उरांव ने 40 पौधे लगाये.
सोहरी देवी, पति विश्वनाथ उरांव ने आम के 80 पौधे लगाये. शकुंतला देवी, पति नंदलाल उरांव ने 112 पौधे लगाये. कर्मी देवी, पति कालेश्वर उरांव ने ६५ आम के पौधे लगाये हैं. रमणी देवी, पति रामलाल उरांव ने 100 पौधे लगाये. सुनीता देवी, पति प्रसाद उरांव ने अपने जमीन पर 152 पौधे लगाये. सारो देवी, पति साहदेव उरांव ने 70 पौधे लगाये. मुनि देवी, पति सुदेश्वर उरांव ने 72 आम के पौधे लगाये. इस तरह से इस गांव की नौ महिलाओं ने कुल पौने सात एकड़ जमीन में आम के पौधे लगाये हैं.
मजेदार बात यह है कि वन जमीन पर व्यक्तिगत दावा पत्र दाखिल करने के बावजूद आज सरकार वन जमीन के उपयोग का प्रमाणपत्र निर्गत करने में आनाकानी करती है. इस गांव के महिलाओं ने पौने सात एकड़ वन भूमि पर दखल कर उस पर सरकारी योजनाओं को कार्यान्वित करने में सफलता प्राप्त की है.
दूसरी बड़ी बात यह है कि इस आम बागवानी में सभी तरह के कार्यों के लिए मजदूरी का भुगतान हुआ, श्रमदान से कोई काम नहीं किया गया. हर काम के एवज में मजदूरी का भुगतान मनरेगा के तहत बैंक खातों के जरिये किया गया.
ट्रेंच कटिंग, गड्ढा खोदने, पौधे लगाने, दवा छिड़कने और पानी पटाने का काम महिलाओं ने मेट बनकर खुद कराया. इस दौरान सैकड़ों मानव श्रम दिवसों का सृजन हुआ. लोगों ने मजदूरी या काम पाने के लिए बाहर पलायन नहीं किया.
इस गांव में एक नाला है, जहां से पानी लिफ्ट करके पौधों की सिंचाई की जाती है. विभाग द्वारा उन्हें दो कुएं और एक डीजल पंप सेट उपलब्ध कराये गये हैं.
तीन साल तक पौधे की देखरेख करने के लिए विभाग के द्वारा पैसे का इंतजाम किया गया है. पौधों के बीच जो जमीन बची है, उसमें बाग की मालकिन ये महिलाएं अपने पतियों से इंटरक्रॉपिंग करा रही हैं और सब्जियों को बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी पा रही हैं. यह आम बागवानी प्रोजेक्ट 14 लाख रुपये का है. आप भी अपनी ग्रामसभा में ऐसी योजनाएं पारित करा सकते हैं.
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