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पूंजी सृजन के साथ ऐसे बचाएं टैक्स

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पूंजी सृजन के साथ ऐसे बचाएं टैक्स
निमेश शाह, एमडी व सीइओ, आइसीआइसीआइ प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड
इस साल के लिए टैक्स फाइलिंग का काम समाप्त हो चुका है, और जैसा कि हर साल होता आया है, लगभग सभी करदाताओं ने अगले वर्ष के लिए अपने टैक्स की योजना की शुरुआत कर दी होगी. ऐसा करने से वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने में आनेवाली परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है.
खासकर तब जब टैक्स बचानेवाले निवेश की बात आती है. इसे पूरे सालभर तक करते रहना निश्चित रूप से ही फायदेमंद होता है क्योंकि मासिक रूप से कम राशि वाला निवेश मार्च महीने में एकमुश्त किये जाने वाले निवेश की तुलना में कहीं अधिक सुगम होता है.
आयकर अधिनियम की धारा 80सी 1.50 लाख रुपये तक के डिडक्शन (टैक्स कटौती) प्रदान करती है और इस तरह से कोई भी व्यक्ति आय पर अपनी टैक्स की देनदारी को घटा सकता है.
यह कटौती योग्य टैक्स सेविंग निवेश जैसे पीपीएफ, एनएससी, पांच साल के टैक्स सेविंग डिपॉजिट आदि के लिए लागू होता है. म्यूचुअल फंड के बारे में बढ़ रही जागरूकता के समय में आप शायद चौंक सकते हैं जबकि म्यूचुअल फंड्स भी इस तरह की निवेश की गयी राशि पर टैक्स डिडक्शन प्रदान करते हैं.
म्यूचुअल फंडों की विशेष कटेगरी इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (इएलएसएस) एक टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड है जो आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत आता है. टैक्स सेविंग के लिए इस तरह के फंड इक्विटी और इक्विटी से जुड़े संसाधनों में न्यूनतम 80 फीसदी का निवेश करते हैं. यह तीन साल के लॉक-इन पीरियड के साथ होता है.
मिलता है दोहरा लाभ
तीन साल का लॉकइन अवधि और उसके बाद स्वैच्छिक निवेश का समय इक्विटी में एक्सपोजर और टैक्स ब्रेक लेने का दोहरा लाभ सुनिश्चित करता है.
इसमें पॉवर ऑफ कंपाउंडिंग का लाभ भी मिलता है. लंबी अवधि के दौरान बेहतर निवेश अनुभव के साथ म्यूचुअल फंड में निवेश से फायदा होता है. यह इसलिए, क्योंकि फंड मैनेजर विशेष स्टॉकों का चयन कर सकते हैं जो कि निवेश की लंबी अवधि के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. अगर कोई निवेशक कम अवधि के लिए निवेश सोच रहे हैं तो उसमें उन्हें फंडों के बाजार की चाल का सामना करना पड़ सकता है लेकिन इएलएसएस में लॉकइन इन्हें ऐसा करने से रोकती है.
केवल टैक्स सेविंग तक नहीं है सीमित
इएलएसएस निवेश पर लाभ केवल टैक्स डिडक्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस तरह के फंडों पर मिलनेवाला रिटर्न भी काफी ज्यादा होता है. लंबी अवधि में इस तरह के फंडों से होने वाली पूंजी बढ़त पर भुनानेया निकालने के समय 10 फीसदी का एक विशेष टैक्स भी देय होता है.
टैक्स योग्यता के बारे में देखें तो वर्तमान टैक्स कानून भी लंबी अवधि में पूंजी में बढ़त पर एक लाख रुपये सालाना टैक्स की छूट देता है. यानी कि निवेशकों द्वारा हासिल किये गये लाभांश भी टैक्स छूट के योग्य होते हैं. इस तरह से निवेशक 1.50 लाख रुपये से ज्यादा एक साल में निवेश इस तरह के फंडों में कर सकता है जिसका उद्देश्य कर बचत के साथ संपत्ति के निर्माण के लिए होता है.
इएलएसएस का रिटर्न उन प्रतिभूतियों पर निर्भर करता है जिनमें फंड का निवेश किया गया है. इसलिए निवेशकों को फंड का चयन करते समय थोड़ा सावधान रहना पड़ता है.
वैसे फंड का चयन करना चाहिए जो बाजार के सभी चक्रों में अच्छा प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया हो. लगातार बेहतर प्रदर्शन के मद्देनजर निवेशक इन फंड्स को टैक्स बचानेवाले तथा लंबी अवधि में पूंजी सृजन करनेवाले विकल्प के तौर पर देख सकते हैं.
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