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सुरक्षित भविष्य के लिए ऐसे करें फिनांशियल प्लानिंग

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सुरक्षित भविष्य के लिए ऐसे करें फिनांशियल प्लानिंग

शशांक भारद्वाज

वाइस प्रेसिडेंट, च्वाइस ब्रोकिंगई

एक वेतनभोगी व्यक्ति के लिए वित्तीय प्लानिंग बहुत ही महत्वपूर्ण और आवश्यक है. किसी व्यवसायी के पास स्वयं के व्यापार में निवेश करने के अनेकों अवसर होते हैं, पर वेतनभोगी व्यक्ति को अपनी वर्तमान और भविष्य की आर्थिक आवश्यकताओं के लिए निवेश के बाह्य अवसर और उत्पादों का चयन करना पड़ता है और जो उसके और उसके परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होता है.

आजकल एकल परिवार का युग है और ऐसे में वित्तीय सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि एकल परिवार में सामूहिक परिवार की सुरक्षा का अभाव होता है. इसलिए हर माह बचत करना और फिर उसका सही निवेश बहुत जरूरी है. सामान्यतया एक व्यक्ति के जीवन में बच्चों की उच्च शिक्षा, उनका विवाह, घर, सेवानिवृत्ति के पश्चात निश्चित आय आदि बड़े लक्ष्य होते है और इन सबके लिए फिनांशियल प्लानिंग करनी चाहिए.

आयु के अनुरूप लें जोखिम : निवेश का एक सुनहरा नियम है कि आप जोखिम अपनी आयु के अनुरूप लें, अर्थात जितनी काम आयु उतना अधिक आप निवेश में जोखिम ले सकते हैं. जोखिम लेना भी आवश्यक है, क्योंकि बिना उसके आपका रिटर्न अधिक नहीं हो सकता. फिर भी निवेश की प्रकृति का चयन करते समय आय की निरंतरता, जॉब सिक्योरिटी और बचत की राशि महत्वपूर्ण पहलू होते हैं.

निवेश के प्रचलित विकल्पों में शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना, फिक्स्ड डिपाॅजिट आदि प्रमुख विकल्प हैं. अगर आपकी आयु कम है और जॉब सिक्युरिटी है, तो अपनी बचत का बड़ा हिस्सा आप शेयर और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं. इनमें थोड़ा जोखिम ज्यादा है, पर रिटर्न्स भी असीमित है. सावधानी इतनी रखें कि इनमें निवेश को विविधीकृत रखें, ताकि किसी विशेष म्यूचुअल फंड या शेयर के अच्छा परफॉर्म न करने पर भी आपके निवेश पर ज्यादा बुरा असर न पड़े.

आकस्मिक निधि तैयार करें : भले आप युवा हों, फिर भी किसी आपातकालीन परिस्थिति के लिए आपको आकस्मिक निधि की व्यवस्था अवश्य रखना चाहिए. इसके लिए लिक्विड फंड एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

बीमा अवश्य लें : हर व्यक्ति को अपने जीवन में बीमा अवश्य लेना चाहिए. जीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य बीमा भी जरूरी है. जीवन बीमा में टर्म इंश्योरेंस काफी कम प्रीमियम में मिल जाता है. स्वास्थ्य बीमा भी किसी बीमारी की स्थिति में रोग के उपचार में बहुत सहायक होता है.

निवेश की प्लानिंग

25 से 40 वर्ष तक कि आयु में सामान्यतया आपकी बचत का 30% शेयरों में, 30% शेयर आधारित म्यूचुअल फंड में, 20% डेब्ट योजनाओं में और 20% लिक्विड फंड में होना चाहिए.

41 से 60 वर्ष की उम्र में बचत का 25-25% शेयर और शेयर आधारित म्यूचुअल फंड में, 35% डेब्ट फंड में और 15% लिक्विड फंड निवेश करना चाहिए.

60 से ऊपर की आयु के बाद शेयर और शेयर के म्यूचुअल फंड में निवेश कम हो जाना चाहिए क्योंकि इनमें जोखिम ज्यादा होता है. इनमें निवेश 20% से ज्यादा नहीं होना चाहिए. 60% पैसे डेब्ट फंड में करना चाहिए और 20% लिक्विड फंड में.

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