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चलती ट्रेन और सेल्फी की सनक

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चलती ट्रेन और सेल्फी की सनक
डॉ सुरेश सैनी
कोलकाता : सेल्फी यानि खुद का फोटो खींचिए. आधुनिक इलेक्ट्राॅनिक मनोरंजन युग की देन है सेल्फी. पहले कैमरे या मोबाइल से दूसरा व्यक्ति आप का फोटोे खींचता था. अब दूसरे आदमी की जरूरत नहीं है. आप खुद ही अपने और मित्रों का फोटो खींचिए.
आजकल युवाओं में एक सनक सवार है. एकदम अद्भुत अनजान जगह पर जाइए फोटो खींचिए और तुरंत ही फेसबुक पर अपलोड कर दीजिए और दुनिया देख लेगी कि आपने क्या महान काम किया है. सेल्फी लेने का शौक सभी हदें पार करता जा रहा है.
सेल्फी के पुजारी और शौकीन मोटर साईकिल पर स्टंट करते हुए ट्रेन के बगल में खड़े हुए, चलती ट्रेन के दरवाजे के आधी और पूरी ट्रेन का सेल्फी युक्त फोटो बनाने का शौक खतरों से खाली नहीं है. चलती ट्रेन में युवा रेल यात्री जो अक्सर काॅलेज व स्कूल के विद्यार्थी होते हैं भांति-भांति के प्रयोग करने की कोशिश करते हुए, एक्टिंग करते हुए स्टंट करते हुए अपनी सेल्फी लेने की कोशिश करते रहते हैं, जो बेहद खतरनाक है. इस हरकत से उनकी जान भी जा सकती है.
मुझे याद आती है एक दुखद घटना. उन दिनों शाहरूख खान अभिनीत फिल्म ‘दिल से’ में एक गाना था, ‘छैयां छैयां’ यह गाना नीलगीरी हिल रेल में चलने वाली एक छोटी रेलगाड़ी पर फिल्माया गया था.
एक स्कूल छात्र ने उसी की तर्ज पर एक स्टंट करने की सोची, तुगलकाबाद में घर के पास ही रेलवे यार्ड था पहुंच गये वहां एक टेंकर वाली मालगाड़ी खड़ी थी. टैंक वैगन में लगी सीढ़ियों से स्वयं अकेला उपर चढ़ गयी और ज्यों ही खड़े होने की कोशिश की उपर लगे 25000 किलोवाट के विद्युत प्रवाह वाली तारों की चपेट में आ गया. उसकी दुखद मृत्यु वहीं हो गयी. माता-पिता को पता ही नहीं था कि उनका लाडला कहां है.
ट्रेन में कुछ मामले ऐसे पाये गये हैं, जिसमें विद्यार्थी और युवक दरवाजे के पास खड़े होकर चलती ट्रेन के साथ सेल्फी लेने का प्रयास करते हैं.
यह बहुत ही खतरनाक साबित हो जाता है. यह एक दंडनीय अपराध है और रेलवे सुरक्षा बल रेल अधिनियम 145 व 156 के तहत कार्यवाही करता है, जहां पर ओवरहेड विद्युत नहीं है, वहां पर अक्सर परीक्षा देने, बोगी में जगह न होने पर यात्री डिब्बों की छत पर चढ़ जाते हैं. रेलवे सुरक्षा बल हर तरह से प्रयास करता है और डिब्बों की छतों पर चढ़े लोगों को उतारता है और रेलवे एक्ट की धारा 156 के तहत कार्यवाही भी करता है, जहां पर रेलवे सुरक्षा बल तैनात नहीं होता, वहां कभी-कभी समस्या गंभीर रूप ले लेती है.
19 सितंबर 2017 को कल्याणी रेलवे स्टेशन के समीप सेल्फी लेते समय इंजीनियरिंग के एक छात्र की ट्रेन से कट कर मृत्यु हो गयी और उसका साथी छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया. 21 वर्षीय राकेश तिगुना अपने साथी के साथ महालया के पर्व मनाते समय 42 नं. रेल गेट के समीप पटाखे फोड़ रहे थे. अचानक वह अपने मोबाइल फोन से आ रही लोकल ट्रेन की बगल में अपने दोस्त के साथ खड़ा होकर सेल्फी खींचने लगा. दुर्भाग्यवश दोनों ही चलती गाड़ी की चपेट में आ गये.
आ रही गाड़ी के सामने खड़े होकर सेल्फी खींचने का शौक राकेश के लिए जानलेवा साबित हुआ और उसका मित्र 15 वर्षीय सूरज मंडल गंभीर रूप से घायल हो गया. राकेश बिहार के एक पॉलिटेकनिक काॅलेज का छात्र था वहीं सूरज मंडल कल्याणी के एक स्थानीय स्कूल की कक्षा 9वीं का छात्र था. इसी से सिद्ध होता है कि सेल्फी लेने की सनक पढ़े-लिखे युवाओं एवं छात्रों में अधिक पायी जाती है.
एक बार दिल्ली-मथुरा ट्रैक के समीप रोड से गुजर रहे युवाओं को चलती ट्रेन के साथ सेल्फी लेने की सनक सवार हुई. वह ट्रैक के किनारे गये और अपनी पोजिशन पटरी के समीप इस तरह से बनायी कि पीछे से आ रही ट्रेन सेल्फी में नजर आये.
वह सेट कर ही रहे थे कि ट्रेन आ गयी और वह उसकी गति का अनुमान नहीं लगा पाये और पूरा ध्यान मोबाइलसे सेल्फी लेने पर केंद्रित रहा फलतः तीव्रगति से आती ट्रेन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. यही हाल व्यस्त स्टेशन गाजियाबाद व साहिबाबाद के बीच हुआ, जब दो विद्यार्थी जिस ट्रैक पर खड़े होकर बगल से गुजर रही ट्रेन के साथ सेल्फी बना रहे थे कि उनके अपने ट्रैक पर ट्रेन कब आ गयी उन्हें पता ही नहीं चला. डाईवर ने खूब हार्न बजाय किंतु उन्होंने समझा कि बगल वाली ट्रेन का ही हाॅर्न है.
ये सभी दुखद घटनाएं हैं. नये जमाने की यह पौध कुछ अलग से हट कर एडवेंचर की तलाश में रहती है और सेल्फी वीडियो तक बना कर उसे अपनी फेसबुक पर डालना चाहती है, ताकि वे साथियों में रौब जमा सके कि उन्होंने अनोखा काम किया है.
हम सभी रेल यात्रियों से अपील करते है कि वे चलती ट्रेन में दरवाजे पर खड़े होकर या अन्य खतरनाक तरीके से सेल्फी ना लें और यदि कोई युवा यात्री यह करता दिखे तो उसे टोकें. हरेक यात्री की जान हमारे लिए कीमती है.
(डीआइजी सह अपर मुख्य सुरक्षा आयुक्त, आरपीएफ, पूर्व रेलवे)
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