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जदयू के बाद अब तृणमूल कांग्रेस में भी शुरू हो गया प्रशांत किशोर का विरोध

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जदयू के बाद अब तृणमूल कांग्रेस में भी शुरू हो गया प्रशांत किशोर का विरोध

कोलकाता : चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बाद अब पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस में भी विरोध शुरू हो गया है. प्रशांत किशोर की कंपनी आइपैक (I-PAC) की टीम के 5 सदस्यों को आसनसोल के जमुरिया में तृणमूल कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रचार अभियान से जुड़े कार्यक्रम के दौरान घेर लिया. उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनायी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आसनसोल के जमुरिया में प्रशांत किशोर की कंपनी आइपैक से जुड़े लोग बंगाल में चुनाव प्रचार अभियान ‘बांगलार गोरबो ममता’ के स्टिकर्स पार्टी के कार्यकर्ताओं के वाहन पर लगा रहे थे. इसी दौरान तृणमूल के एक धड़े के लोगों ने टीम के सदस्यों को घेर लिया. उन्होंने पूछा कि कार्यक्रम में कुछ नेताओं को क्यों आमंत्रित नहीं किया गया है.

इतना ही नहीं, 24 परगना जिला में भी प्रशांत की टीम को विरोध का सामना करना पड़ा. यहां तृणमूल कांग्रेस के 200 कार्यकर्ताओं ने मार्ग अवरुद्ध कर दिया. स्थानीय विधायक श्यामल मंडल के खिलाफ धरना दिया. प्रदर्शन करने वाले तृणमूल कार्यकर्ताओं का आरोप था कि कार्यक्रम में सिर्फ श्यामल मंडल के समर्थकों को ही बुलाया गया था.

वहीं, 24 परगना के भांगड़ में विधायक रज्जाक मोल्ला ने एक राजनीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया था. इसमें पूर्व विधायक अरबुल इस्लाम के समर्थक शामिल नहीं हुए. इस संबंध में रज्जाक मोल्ला ने कहा कि उन्होंने अरबुल इस्लाम व अन्य नेताओं को अपने कार्यक्रम में आयोजित किया था, लेकिन उसमें शामिल नहीं हुए. वे क्यों नहीं आये, इसकी वजह वही जानें, मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि बंगाल में चुनाव अभियान से जुड़े कार्यक्रम ‘बांगलार गोरबो ममता’ में खास वर्ग के मेहमानों को आमंत्रित नहीं किये जाने की वजह से तृणमूल समर्थक नाराज हो गये. एक ही दिन तीन अन्य जगहों पर भी कार्यक्रम हुए. उसमें भी ऐसी ही स्थिति थी. इसलिए कार्यक्रमों में आमंत्रित मेहमानों की सूची को लेकर तृणमूल कार्यकर्ताओं और प्रशांत किशोर की टीम के बीच टकराव की स्थिति बन गयी है.

उल्लेखनीय है कि बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल युनाइटेड (जदयू) में भी प्रशांत किशोर की वजह से कलह की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. कई बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत के खिलाफ बयानबाजी की थी. अंतत: पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को पार्टी से निष्कासित कर दिया.

इस बीच, खबर आयी कि वह ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा जा सकते हैं. लेकिन बंगाल की 5 में से 4 सीटों पर प्रत्याशी के नाम ममता दी ने घोषित कर दिये हैं. इसमें प्रशांत का नाम नहीं है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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