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Malware Vs Virus: दोनों में क्या है अंतर? सिस्टम में घुस जाने पर कितनी होगी परेशानी!

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Malware Vs Virus: दोनों में क्या है अंतर? सिस्टम में घुस जाने पर कितनी होगी परेशानी!

Difference Between Malware and Virus: आप सभी ने मैलवेयर या फिर वायरस शब्द का इस्तेमाल कभी न कभी तो सुना ही होगा. अक्सर इनका इस्तेमाल टेक्नोलॉजी की दुनिया में स्मार्टफोन या फिर कंप्यूटर से जुड़ी समस्याओं को दर्शाने के लिए किया जाता है. काफी लोगों को लगता होगा कि ये दोनों ही चीजें एक ही हैं. लेकिन, वास्तव में ऐसा नहीं है. अगर आपको भी ऐसा ही लगता है तो इस स्टोरी को पढ़ने के बाद आपको इन दोनों के बीच जो अंतर है वह साफ़ समझ में आने लगेगा. तो चलिए इनके बारे में डीटेल से जानते हैं.

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मैलवेयर और वायरस के बीच अंतर

अगर आप इन दोनों के बीच अंतर नहीं जानते हैं तो बता दें जो मैलवेयर होता है वह एक तरह का मेलिशियस सॉफ्टवेयर होते हैं जो होस्ट कम्प्यूटर को इंफेक्ट कर देता है. वहीं, वायरस की अगर बात करें तो यह मैलवेयर का ही एक टाइप होता है. ये किसी फाइल को इंफेक्ट करता है और जब फाइल या प्रोग्राम को ओपन किया जाता है तो ऐसे में यह पूरे सिस्टम तक फ़ैल जाता है.

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क्या है मैलवेयर

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि, जो मैलवेयर होते हैं वह एक तरह के सॉफ्टवेयर होते हैं. मैलवेयर को किसी भी कंप्यूटर का अनऑथोराइज्ड एक्सेस पाने के लिए बनाया जाता है. मैलवेयर का फायदा अक्सर थर्ड पार्टिज को होता है. आपको जानकारी के लिए बता दें मैलवेयर का फुल फॉर्म मेलिशियस सॉफ्टवेयर होता है.

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कितने तरह के होते हैं मैलवेयर

मैलवेयर के टाइप्स की अगर बात करें तो यह करीबन 6 तरह के होते हैं. इनमें, वायरस, ट्रोजन, वॉर्म, रैनसमवेयर, स्पाइवेयर और एडवेयर शामिल हैं.

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मैलवेयर का काम क्या है?

अगर आपके दिमाग में भी यह सवाल आता है कि आखिर मैलवेयर करता क्या है तो बता दें, ये जो मैलवेयर होते हैं वे पर्सनल इनफार्मेशन चुराने की कोशिश करते हैं. केवल यहीं नहीं, ये कार्ड और पेमेंट्स से जुड़ी डीटेल्स भी चुरा सकते हैं. मैलवेयर बिटकॉइन की माइनिंग भी शुरू कर सकता है और तो और यह सिस्टम पर बिना मतलब के टास्क भी शुरू कर सकता है.

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मैलवेयर से बचने के लिए ये हैं सॉफ्टवेयर

अगर आप मैलवेयर से बचना चाहते हैं तो आप Total AV, Bitdefender, Malwarebytes और Hitman Pro जैसे सॉफ्टवेयर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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वायरस क्या है?

वायरस के बारे में अगर आप जानने में दिलचस्पी रखते हैं तो बता दें यह एक तरह का कोड होता है तो जो खुद को किसी भी फाइल के साथ जोड़ लेता है. ऐसा होने की वजह से वह फाइल इससे ग्रसित हो जाता है. यह डिवाइस को भी करप्ट करने की क्षमता रखता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें वायरस का फुल फॉर्म वाइटल इनफ़ॉर्मेशन रिसोर्सेज़ अंडर सीज होता है.

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कितने तरह का होता है वायरस

वायरस के टाइप्स की अगर बात करें तो इसके करीबन 8 टाइप्स होते हैं. इनमें, बूट सेक्टर, मल्टीपार्टी, स्पेसफिलर, रेजिडेंट, पोलीमॉर्फिक, फाइल इंफेक्टर, डायरेक्ट एक्शन और मैक्रो शामिल हैं.

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किस तरह से हानि पहुंचता है वायरस

आपकी जानकारी के लिए बता दें, ये जो वायरस होते हैं वे आपके सिस्टम के प्रोसेसिंग स्पीड को कम कर देता है. केवल यहीं नहीं अगर आपका सिस्टम वायरस से इन्फेक्टेड हो चुका है तो ऐसे में आपके स्क्रीन पर पॉप-अप भी दिखाई देने लगते हैं. वायरस से इन्फेक्ट हो जाने पर आपके पासवर्ड्स भी खुद रिसेट हो जाते हैं. केवल यहीं नहीं, कई प्रोग्राम्स खुद ही स्टार्ट भी हो जाते हैं.

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वायरस से बचने के लिए ये हैं सॉफ्टवेयर

अगर आप खुद को वायरस से होने वाली परेशानियों से बचाना चाहते हैं तो ऐसे में हम आपसे McAfee, Norton, Avast और Kaspersky जैसे ऐप्स को इस्तेमाल करने की सलाह देंगे.

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सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.
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