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Home Badi Khabar Maharani 2 Review: दमदार है… सियासी दांवपेच से भरी हुमा कुरैशी की ‘महारानी 2’

Maharani 2 Review: दमदार है… सियासी दांवपेच से भरी हुमा कुरैशी की ‘महारानी 2’

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Maharani 2 Review: दमदार है… सियासी दांवपेच से भरी हुमा कुरैशी की ‘महारानी 2’

फ़िल्म- महारानी 2 (वेब सीरीज)

निर्देशक-सुभाष कपूर

कलाकार- हुमा कुरैशी, सोहम शाह,अमित सियाल,प्रमोद पाठक,विनीत कुमार,अतुल तिवारी, सुशील पांडे,कनी कुसृति और अन्य

प्लेटफार्म-सोनी लिव

रेटिंग- तीन

Maharani 2 Review: ओटीटी पर सीरीज के पहले सीजन के सफल हो जाने के बाद उसके दूसरे सीजन का आना एक रस्म अदायगी बन चुका है. ज़्यादातर मामलों में दूसरा सीजन पिछले के मुकाबले कमतर ही साबित हुआ है, लेकिन महारानी 2 इस मामले में अलहदा साबित होती है.पिछले सीजन की तरह नया सीजन भी एंटरटेनमेंट से भरपूर है कुलमिलाकर महारानी 2 दमदार है.

महत्वकांक्षा और बदले की कहानी

बीते सीजन सीरीज की कहानी बिहार के एक राजनीतिक परिवार से जुड़ी हुई दिखायी गयी थी.इस बार भी कहानी में किरदार राजनीति के परिचित चेहरे हैं,लेकिन कहानी एक परिवार पर आधारित ना होकर पूरे देश की सियासत के स्याह पक्ष को दिखाती है.रानी भारती(हुमा कुरैशी) को उसके राजनेता से लेकर अफसर तक सभी गवारिन बोलते हैं लेकिन वह अपने मजबूत फैसलों से अपनी नयी छवि गढ़ती है.वो ये बात भी साबित करती है कि सत्ता बेऊर जेल से बल्कि उनके हाथों में है. रानी भारती का यह कदम पति भीमा भारती(सोहम शाह) को उसके खिलाफ कर जाता है.

बिहार में एक बार फिर से चुनाव होने वाले हैं.रानी और भीमा एक दूसरे के आमने-सामने हैं, साथ में नवीन कुमार(अमित सियाल)भी 17 सालों से मुख्यमंत्री के कुर्सी के मोहपाश में हैं.सत्ता किसकी होगी.सभी की महत्वकांक्षाएं राजनीति को किस हद तक गंदा कर सकती है.यही आगे की कहानी है. सीरीज में बदले का भी एक एंगल जोड़ा गया है.जो कहानी में एक हैरतअंगेज ट्विस्ट जोड़ता है. सीरीज अपनी शुरुआत से ही मजबूत पकड़ बना लेती है. रानी पर भीमा भारती के हत्या की साजिश का आरोप है और वह अब मुख्यमंत्री भी नहीं हैं,सीजन की शुरुआत ही इसी से होती है. हालांकि कुछ एपिसोड्स ज़्यादा लंबे खींच गए हैं,लेकिन सीरीज शुरुआत से आखिर तक बांधे रखती है.

राजनीति में गठबंधन के जोड़ -तोड़ और पॉलिटिकल सलाहकार की भूमिका की बढ़ती अहमियत को भी जोड़ा गया है साथ में राजनीति को चमकाने में राजनेता किस तरह से जाति, धर्म और आरक्षण का इस्तेमाल करते आए हैं उसको भी कहानी में प्रमुखता दी गयी है.जो इस पॉलिटिकल ड्रामा को खास बनाता है. सीरीज खत्म होते-होते तीसरे सीजन का भी जिक्र कर गयी है.

कलाकारों की तारीफ बनती है

हुमा कुरैशी ने हालिया इंटरव्यू के दौरान कहा था कि रानी भारती का किरदार उनके डीएनए में बस चुका है.यह बात इस सीजन को देखते हुए सही साबित होती है.वह अपने किरदार में पिछले सीजन के मुकाबले ज्यादा सहज नज़र आयी हैं. उनकी भाषा से लेकर बॉडी लैंग्वेज सभी में उनका आत्मविश्वास झलकता है. जिसके लिए उनकी तारीफ होनी चाहिए.

सोहम शाह एक बार फिर प्रभावी रहे हैं.अमित सियाल को ऐसे किरदारों में पीएचडी है.उनके अभिनय को देखकर यह बात आसानी से कही जा सकती है. विनीत कुमार अपने अभिनय और संवादों से इस सीरियस पॉलिटिकल ड्रामा के माहौल को हल्का किया है. अनुजा,प्रमोद पाठक,अतुल तिवारी सहित हर छोटे-बड़े किरदार ने कहानी में अपना बखूबी योगदान है.कुलमिलाकर मंझे हुए एक्टर्स की टीम ने इस सीरीज को और अपीलिंग बना दिया है.

यहां हो गयी है चूक

सीरीज के स्क्रीनप्ले की बात करें तो भीमा भारती को पिछले दो सीजन्स से सबसे शातिर बताया जा रहा है.दूसरे सीजन में एक संवाद भी है कि भीमा अपने फायदे के लिए दूसरों पर ही नहीं खुद पर भी बम फेंकवा सकता है.ऐसा शख्स अचानक से रानी भारती को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए कैसे राजी हो जाती है. उसकी राजनीतिक महत्वकांक्षा कहां

बिहार को भ्रष्टाचार से मुक्त करवाने वाली सोच उसमें कब घर कर जाती है. यह हृदय परिवर्तन थोड़ा अखरता है. स्क्रीनप्लेसीरीज की एडिटिंग पर थोड़ा काम करने की ज़रूरत थी.एपिसोड थोड़ा ज़्यादा लंबे बन गए हैं.

इधर मामला जमा है खूब

अभिनय के अलावा इस सीरीज की खासियत इसके संवाद है.राजनीति के कई खास चेहरों के संवाद ,उनकी ज़िंदगी के खास पहलुओं को संवाद में समाहित कर उसे और प्रभावी बनाया गया है.फ़िल्म के संवाद की तरह ही इसके गीत-संगीत की भी तारीफ करनी होगी.जिसने सीरीज के साथ बखूबी न्याय किया है.आमतौर पर बिहार और यूपी की पृष्ठभूमि पर बनी वेब सीरीज में जमकर गालियां और अश्लीलता ढूंसी रहती है ,लेकिन उस मापदंड के लिहाज से यह काफी साफ-सुथरी सीरीज है.

देखें या ना देखें

महारानी 2 अच्छी कहानी और उम्दा एक्टिंग की वजह से एंटरटेनमेंट से भरपूर वेब सीरीज है इसलिए इसे देखना तो बनता है.

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