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ट्रेड डील पर पांचवें राउंड की बातचीत खत्म, वापस आ रही भारतीय टीम

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ट्रेड डील पर पांचवें राउंड की बातचीत खत्म, वापस आ रही भारतीय टीम
India-US trade deal

Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर वाशिंगटन में 14 से 17 जुलाई तक चली पांच दिवसीय वार्ता पूरी हो चुकी है. भारतीय दल के प्रमुख और वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में बातचीत हुई. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि “भारतीय टीम अब वापस लौट रही है.”

क्यों अहम है यह वार्ता?

यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि दोनों देश 1 अगस्त 2025 से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना चाहते हैं. इसका कारण यह है कि अमेरिका द्वारा भारत सहित कई देशों पर लगाए गए 26% टैरिफ की निलंबन अवधि का खत्म होना है. यह शुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में घोषित किया गया था, जिसे अस्थायी रूप से 90 दिनों और फिर 1 अगस्त तक स्थगित किया गया.

कृषि और वाहन क्षेत्र रहे फोकस में

वार्ता के दौरान कृषि और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर विस्तृत चर्चा हुई. अमेरिका द्वारा डेयरी और कृषि उत्पादों पर शुल्क रियायत की मांग पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है. भारत के किसान संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि कृषि संबंधित रियायतें इस समझौते में शामिल न की जाएं.

स्कॉमेट और गैर-बाजार अर्थव्यवस्थाएं

बैठक में “स्कॉमेट” (स्पेशल केमिकल्स, मैटेरियल्स, एक्विपमेंट और टेक्नोलॉजीज) और गैर-बाजार अर्थव्यवस्थाओं से निपटने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श हुआ. दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञों ने इन विषयों पर परस्पर सहयोग की संभावनाओं को टटोला.

शुल्क हटाने की भारत की मांग

भारत ने इस बातचीत में अमेरिका से स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों पर लगाए गए भारी शुल्क को हटाने की मांग की है. इसके साथ ही भारत ने विश्व व्यापार संगठन नियमों के तहत प्रतिशोधात्मक टैरिफ लगाने का अधिकार सुरक्षित रखा है.

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भारत की मांगें और अमेरिकी रुचि

भारत चाहता है कि उसके श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, गहने, चमड़ा, झींगा, अंगूर, केले और तिलहन पर अमेरिकी बाजार में प्रवेश के लिए शुल्क रियायत दी जाए. वहीं, अमेरिका इलेक्ट्रिक वाहन, वाइन, डेयरी, मेवे और जीएम फसलों पर रियायत चाहता है. यह बातचीत दोनों देशों के हितों के बीच संतुलन साधने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अंतिम समझौते की संभावना अब आगामी हफ्तों पर टिकी है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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