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राज्य में ‘फिशिंग कैट’ को बचाने के लिए ‘संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम’ शुरू

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राज्य में ‘फिशिंग कैट’ को बचाने के लिए ‘संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम’ शुरू

राज्य के एक चिड़ियाघर में ‘फिशिंग कैट’ (मछली पकड़नेवाली बिल्ली) की प्रजाति के अस्तित्व को बचाने के लिए एक संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया गया है. राज्य के वन मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने यह जानकारी दी. वन मंत्री ने कहा कि यह कवायद राज्य के अन्य स्थानों पर भी की जाचेगी. यदि यह कार्यक्रम सफल हो जाता है, तो कई बिलौटों को 2024 तक उनके प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ दिया जायेगा. फिशिंग कैट, पश्चिम बंगाल का राजकीय पशु है.

हावड़ा जिले के गड़चुमुक प्राणी उद्यान से इसकी शुरुआत

श्री मल्लिक ने कहा कि यह कार्यक्रम हावड़ा जिले के गड़चुमुक प्राणी उद्यान में शुरू हुआ और यह राज्य के दक्षिणी हिस्से में बांकुड़ा और झाड़ग्राम जैसे जिलों व उत्तर में कुछ स्थानों पर भी किया जायेगा. इस संबंध में एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ‘संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम’ बड़ी संख्या में पर्यावास के नुकसान, इसके विखंडन, औद्योगिकीकरण, अवैध शिकार व व्यापार और जलवायु परिवर्तन जैसे दबावों के कारण जंगल में संबंधित जानवर की मौजूदा आबादी में गिरावट पर अंकुश लगा कर एक प्रजाति को संरक्षित करने का विज्ञान है.

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विलुप्त प्रजातियों की आनुवांशिक विविधता को संरक्षित करना

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य (विलुप्त) प्रजातियों की आनुवांशिक विविधता को संरक्षित करना और प्राकृतिक पर्यावास में आत्मनिर्भर आबादी को फिर से स्थापित करने के लिए प्रजातियों को पुनर्स्थापित करना या फिर से पेश करना है. पश्चिम बंगाल चिड़ियाघर प्राधिकरण के सदस्य सचिव सौरभ चौधरी ने कहा : वर्ष 2024 में फिशिंग कैट के कुल छह से आठ जोड़ों को उनके प्राकृतिक पर्यावास में छोड़े जाने की उम्मीद है.

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क्या होती है फिशिंग कैट

फिशिंग कैट (प्रियोनैलुरस विवेरिनस) या ‘बाघरोल’ एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है, जो भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पायी जाती है. कुछ विशेषताओं के कारण इसे ‘अतिसंवेदनशील’ प्रजाति के रूप में वर्णित किया गया है. ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर’ (आइयूसीएन) के अनुसार, ‘अतिसंवेदनशील’ एक ऐसी श्रेणी है, जिसमें वैसी प्रजातियां शामिल हैं, जिसकी संख्या में तेजी से गिरावट हो रही है तथा उसके विलुप्त होने का बहुत ज्यादा खतरा है.

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पशु अधिकार की रक्षा के लिए अनोखा अभियान

स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर महानगर में पशु अधिकार कार्यकर्ता ‘सभी के लिए स्वतंत्रता’ नामक कार्यक्रम के तहत सियालदह रेलवे स्टेशन के पास अनोखा अभियान चलाया. इसका उद्देश्य जानवरों को वह आजादी देने के महत्व पर प्रकाश डालना है, जिसके वे हकदार हैं. ऐसी दुनिया में जहां जानवर अक्सर भोजन, कपड़े और मनोरंजन जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए मानव शोषण का परिणाम भुगतते हैं, यह अभियान स्वतंत्रता के उनके मौलिक अधिकार को पहचानने के लिए एक स्पष्ट संकेत है. यह आयोजन वीगनिज्म को अपनाकर पशु शोषण को समाप्त करने की वकालत करता है, जो सिर्फ एक आहार के रूप में नहीं है, बल्कि जानवरों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक न्याय आंदोलन है.

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अभियान के जरिये लोगों को किया जा रहा है जागरुक

इस जागरूकता अभियान में कार्यकर्ता सम्मोहक पोस्टरों के साथ जुटे और खुद को प्रतीकात्मक जालों में बंद करके मछलियों की दुर्दशा का प्रदर्शन किया. कार्यक्रम की आयोजक निकिता नाथ का कहना है कि पिछले दशक से आंदोलन तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि इसमें बहुत अधिक जागरूकता है. उन्होंने कहा, “हम इन जागरूकता अभियानों को नियमित आधार पर करने की योजना बना रहे हैं. इस सार्थक कार्यक्रम का आयोजन वीगन इंडिया मूवमेंट द्वारा किया गया है, जो वीगनिज्म के आदर्शों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक जमीनी स्तर की कार्यकर्ता पहल है.’

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