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Home Badi Khabar शकुंतला देवी बनकर क्‍या मैथ्‍स के नंबर गेम समझा पायेंगी विद्या, पढ़िये उनसे खास बातचीत

शकुंतला देवी बनकर क्‍या मैथ्‍स के नंबर गेम समझा पायेंगी विद्या, पढ़िये उनसे खास बातचीत

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शकुंतला देवी बनकर क्‍या मैथ्‍स के नंबर गेम समझा पायेंगी विद्या, पढ़िये उनसे खास बातचीत

Vidya Balan Interview: अब तक परदे पर कई बेहतरीन किरदार को जीवंत कर चुकी विद्या बालन (Vidya Balan) जल्द ही ह्यूमन कंप्यूटर (Human Computer) के नाम से फेमस शकुंतला देवी (Shakuntala Devi) की कहानी लेकर आ रही हैं. उनकी फिल्म 31 जुलाई को डिजिटल पर रिलीज हो रही है. उनकी इस फ़िल्म और कैरियर पर उर्मिला कोरी की बातचीत…

विद्या बालन किरदारों को आत्मसात करने में आपका कोई सानी नहीं है शकुंतला देवी की बायोपिक ने क्या चुनौती रखी?

इसमें जो मैथ्स शोज थे.उसके लिए खुद को तैयार करना बहुत मुश्किल था. शंकुन्तला देवी के मुँह से टपकते थे जवाब क्योंकि मैथ्स की वह जीनियस थी.मेरे लिए अच्छी बात ये थी मुझे वो सब जवाब कैलक्यूलेट नहीं करने पड़े.वो सब स्क्रीन पर था लेकिन उस तरह से उस तेज़ी से उस मज़े से जवाब बोल पाना जैसा शकुंतला देवी बोलती थी.उसको पकड़ पाना मुश्किल था.मैंने और निर्देशिका अनु मेनन ने इस पर बहुत काम किया. इस फ़िल्म में वैसे भी बहुत मेहनत लगी है क्योंकि शंकुन्तला देवी के किरदार की जर्नी 25 से 60 साल तक दिखाया है लेकिन उस सब में सबका योगदान रहा है कॉस्ट्यूम डिजाइनर निहारिका ,मेकअप श्रेया, हेयर के लिए शलाका और भी कई लोग लेकिन मैथ्स को सॉल्व करने का जो था.वो पूरी तरह से मुझ पर और निर्देशिका अनु मेनन पर था.हमने मैथ्स को रोचक बनाने की पूरी कोशिश की है.

महिलाएं मैथ्स में अच्छी नहीं होती है शकुंतला देवी मैथ्स में जीनियस थी, एक्ट्रेस अपने दम पर फिल्में नहीं चला सकती लेकिन आपने वो सोच खत्म कर दी. क्या विद्या और शकुंतला देवी एक सी हैं?

शकुंतला देवी विद्या हैं ये कहने की भी मुझमें जुर्रत नहीं है. वो शकुंतला देवी हैं. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे ये किरदार करने को मिला.जिनको करते हुए मुझे बहुत प्रेरणा मिली.मुझे बहुत दुख हुआ था क्यों हमने शकुंतला देवी को भुला दिया.ह्यूमन कंप्यूटर थी।गिनिज बुक में उनका नाम है.ये तो फिर भी कुछ लोग बता देंगे लेकिन उसके आगे.उन्हें नहीं पता है।आज की जेनेरेशन तो और भी उन्हें नहीं जानती है. वो एक ऐसी औरत थी उस टाइम में भी. ज़िंदगी अपने शर्तों पर जीना जानती थी. अपने लिए जीना जानती थी. वो महान गणितज्ञ होने के अलावा बहुत कुछ थी. वो कभी स्कूल नहीं गयी लेकिन उन्होंने कई किताबें लिखी हैं। इंसान अगर कुछ करने का मन बना ले तो फिर उसे कोई नहीं रोक सकता है. उन्होंने जिस सच्चाई से अपने ज़िंदगी जी अगर मैं 10 प्रतिशत भी जी लूं तो मुझे बहुत खुशी होगी.

नंबर्स से आपका लगाव कैसा रहा है?

लकी तो नहीं लेकिन मुझे नंबर सेवन बहुत पसंद रहा है. मैंने इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान ये बात नोटिस की कि मुझे भी नंबर्स से लगाव रहा है. पहले मैं बहुत सारे नंबर्स याद रखती थी लेकिन मोबाइल फोन के आने से ये आदत छूट गयी थी.

‘पास नहीं तो फेल नहीं’ गाने की इस लाइन को आप अपनी ज़िंदगी में कैसे देखती हैं?

मैं नेगेटिव चीजों को बिल्कुल भी नहीं मानती हूं.कभी हारते हैं कभी जीतते हैं.पास नहीं हुए तो इसका मतलब ये नहीं कि आप फेल हो.एक रास्ता बंद हो जाता है तो दूसरा खुल जाता है लेकिन थोड़े धैर्य की ज़रूरत होती है.हारते तभी हैं जब आप हार मान लेते हो।मेरा यही फलसफा है.

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शकुंतला देवी के ट्रेलर में मां बेटी की लव हेट रिश्ते को दिखाया गया है निजी जिंदगी में आप अपनी मां से किस तरह का रिश्ता रखती है?

आज मैं जो भी हूं उसमें मेरे माता पिता मेरी बहनों का बहुत बड़ा योगदान रहा है. मेरी माँ हमेशा से स्ट्रांग महिला रही है.पहले मुझे झुकने की आदत थी. आप समझ सकते हो लेकिन मेरी माँ ने मुझे समझाया.ज़्यादा झुकोगी तो लोग सर जमीन पर पटक देंगे.सीधे खड़ी रहो फिर लोग तुम्हे हल्के में नहीं लेंगे. यह मेरी ज़िंदगी में सबसे बड़ी सीख उन्होंने मुझे दी है. मैं अपनी माँ से लड़ती भी हूं झगड़ती भी हूं.उन्हें टेकेन फ़ॉर ग्रांटेड भी लेती हूं लेकिन हां एक मेरी आदत है.मैं दुनिया में चाहे जहां भी रहूं सुबह उठकर सबसे पहले अपनी मां को फ़ोन ज़रूर करती हूं।मां तो माँ होती है.

आपने शकुंतला देवी की किताबें पढ़ी हैं?

वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्सुअल किताब को मैंने बहुत ढूंढा. मुझे उसकी एक प्रिंट भी कहीं नहीं मिली है. हो सकता है रिलीज के बाद फ़िल्म रीप्रिंट हो.यह पहली बुक भारत में होमोसेक्सुअल पर होगी.

आपका लॉकडाउन कैसे बीता?

मेरा लॉकडाउन बिल्कुल भी फैंसी नहीं रहा.मैंने देखा कई लोग कुकिंग कर रहे थे.म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स सीख रहे थे. कविता लिख रहे थे।मेरे में वो सब हुनर नहीं है.मैंने बहुत सारा काम किया लेकिन अपने पति के साथ मिलकर.बहुत आराम भी किया. थोड़ा बहुत कुकिंग में हाथ आजमाया.जो कि पहली बार था.वैसे हमारे घर में एक कुक था। (हंसते हुए)वरना मैं और सिद्धार्थ भूखे मर जाते थे.

विद्या क्या शकुंतला देवी ने एक एक्टर के तौर पर आपके लिए चुनौतियां और बढ़ा दी हैं अब आपके पास कम ऑफर्स आ सकते हैं?मेंटल हैप्पीनेस की बात इन दिनों हर तरफ हो रही है आप खुद को नेगेटिविटी से कैसे दूर रखती हैं?

मैं हर चीज़ के लिए थैंक यू बोलती हूं. जब नहीं अच्छा दिन बीतता है तो भी भगवान को शुक्रिया अदा करती हूं. जिंदगी ग्रेटफुल होने का नाम है. मैं यही मानती हूं.मैं छोटी छोटी चीजों में खुशियां ढूंढती हूं. किसी दोस्त से बात कर लिया. किसी खूबसूरत फूल को देख लिया.अच्छा खाना खा लिया या फिर किसी अंजान ने मुझे देखकर प्यारी से स्माइल दे दी तो वो मुझे खुशी दे जाती है.

विद्या क्या शकुंतला देवी ने एक एक्टर के तौर पर आपके लिए चुनौतियां और बढ़ा दी हैं अब आपके पास कम ऑफर्स आ सकते हैं?

मुझे नहीं लगता कि कोई प्रेशर है. मुझे लगता है कि जब अच्छी फिल्म बनती है तो वह खुद ब खुद एक नया मापदंड रख देती है. उसके बाद लोगों को लगने कि ये भी कर सकती है. इसको ये आफर करना चाहिए.मैं इस तरह से चीजों को लेती हूं.

मौजूदा हालात में शूटिंग पर जाने को लेकर आपकी क्या राय है?

धीरे धीरे सब शुरू करना होगा.मैंने कर दिया है. हां पूरा सेफ्टी का ख्याल रखना होगा.मैंने एक प्रिंट शूट किया है. शकुंतला देवी का प्रमोशन मैं अपने घर से नहीं सिद्धार्थ के आफिस से कर रही हूं।मेरी टीम हेयर मेकअप स्टाइल की यही आती है. मेरी फिल्म शेरनी की शूटिंग बारिश के बाद शुरू होगी.ऐसी उम्मीद कर रही हूं.

फ़िल्म डिजिटल पर रिलीन हो रही है कोई फ्राइडे फियर को महसूस कर रही हैं?

मैं कोई फ्राइडे रिचुअल या फ्राइडे फियर को महसूस नहीं कर रही हूं.करती भी नहीं हूं.आमतौर पर जब मेरी फिल्म रिलीज होती है तो मैं बहुत लेट से उठती हूं क्योंकि हेक्टिक प्रमोशन की वजह से थकी होती हूं.लेट से उठना लेट से खाना.पूरा लेज़ी दिन रहता है. इस बार तो रिलीज के बाद भी प्रमोशन कर रही हूं क्योंकि डिजिटल में ऐसे ही प्रमोशन होता है.

Posted By: Budhmani Minj

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