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ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर

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ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर

कृष्णा-गोदावरी बेसिन में तेल भंडार से तेल निकालने का काम शीघ्र ही प्रारंभ हो जायेगा. बीते दिनों नयी खोज से पहली बार तेल निकालने की घोषणा हुई है. इस बेसिन में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की भारत की सबसे बड़ी कंपनी ओएनजीसी की बड़ी परियोजना चल रही है. चार तेल कुओं से इस वर्ष जून तक हर दिन 45 हजार बैरल तेल निकालने का लक्ष्य रखा गया है. आकलनों के अनुसार, इस आपूर्ति से देश के तेल और गैस उत्पादन में सात फीसदी की बढ़ोतरी होगी. उल्लेखनीय है कि भारत अपनी तेल आवश्यकताओं के लगभग 85 प्रतिशत हिस्से का आयात करता है. इस पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है तथा वित्तीय घाटे में भी बढ़ोतरी होती है. ऐसे में कृष्णा-गोदावरी बेसिन से तेल उत्पादन का प्रारंभ होना एक महत्वपूर्ण परिघटना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उत्पादन की प्रशंसा करते हुए उचित ही कहा है कि यह भारत की ऊर्जा यात्रा में उल्लेखनीय कदम है तथा इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति मिलेगी. जिस प्रकार देश के लिए सीमा सुरक्षा अहम है, उसी प्रकार खाद्य और ऊर्जा के क्षेत्र में भी सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक होता है. खाद्य उत्पादन के क्षेत्र में हम पहले ही आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल कर चुके हैं. चूंकि हम तेल और गैस के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं, इसलिए भू-राजनीतिक संकटों और तेल के दामों में उत्पादक देशों द्वारा बढ़ोतरी जैसे कारक हमारे खर्च को बढ़ा देते हैं. तेल और गैस के दाम जब बढ़ते हैं, तो हर चीज महंगी हो जाती है. बड़े तेल और गैस उत्पादक देशों के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं, इसलिए आपूर्ति को लेकर कोई समस्या नहीं है, पर अगर देश में उत्पादन और शोधन का दायरा बढ़ेगा, तो हम आयात खर्च में बचत को अन्य आवश्यक मदों में खर्च कर सकते हैं. उल्लेखनीय है कि कृष्णा-गोदावरी बेसिन में 26 कुएं हैं, जिनमें से चार चल रहे हैं. इनसे प्राकृतिक गैस का भी उत्पादन हो रहा है. यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने तथा आपूर्ति शृंखला के बाधित होने की आशंकाएं बढ़ती जा रही हैं. सरकार ने 2030 तक देश की तेल आवश्यकताओं के 25 प्रतिशत हिस्से की आपूर्ति घरेलू उत्पादन से करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. इस लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में बेसिन का अहम योगदान होगा. सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि आगामी वर्षों में जब उत्पादन अपने शीर्ष पर पहुंचेगा, तो लाखों बैरल तेल हर दिन निकाला जा सकेगा. यह भी रेखांकित किया जाना चाहिए कि बीते वर्ष 21 मई के बाद से देश में तेल के खुदरा दाम नहीं बढ़े हैं. हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है.

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