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Home Badi Khabar Agra: डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि 2015 से एजेंसी के क्लाउड स्पेस से चला रहा काम, समस्या से जूझ रहे छात्र-छात्राएं

Agra: डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि 2015 से एजेंसी के क्लाउड स्पेस से चला रहा काम, समस्या से जूझ रहे छात्र-छात्राएं

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Agra: डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि 2015 से एजेंसी के क्लाउड स्पेस से चला रहा काम, समस्या से जूझ रहे छात्र-छात्राएं

Agra News: डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पास 2015 से अपना खुद का क्लाउड स्पेस नहीं है. ऐसे में विश्वविद्यालय एजेंसियों के क्लाउड स्पेस पर काम चल रहा है. और इसी वजह से कई बार जब एजेंसियां डाटा लेकर भाग गईं तो विश्वविद्यालय को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. वहीं अब विश्वविद्यालय का कहना है कि हम अपना खुद का क्लाउड स्पेस ले रहे हैं, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. क्लाउड स्टोरेज कंप्यूटर डेटा स्टोरेज का एक तरीका है जिसमें डिजिटल डेटा को ऑफ-साइट लोकेशन में सर्वर पर स्टोर किया जाता है. डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा में 2015 से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हुई थी. जिसके तहत छात्र छात्राएं नामांकन संख्या, मार्कशीट, डिग्री अन्य कागजात ऑनलाइन आवेदन कर प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन, विश्वविद्यालय में ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत कार्य नहीं किया जा रहा है. तमाम छात्राएं रोजाना विश्वविद्यालय में अपनी समस्या को लेकर चक्कर काटते हुए नजर आते हैं. उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर किसी भी डॉक्यूमेंट के लिए ऑनलाइन अप्लाई करने के बाद डॉक्यूमेंट से संबंधित कोई भी स्टेटस नहीं दिखता, जिससे कि यह पता चले कि आपके कागज की प्रक्रिया कहां चल रही है. जब काफी समय बीत जाता है तो मजबूरन विश्वविद्यालय में आना पड़ता है.

डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा ने छात्र-छात्राओं की समस्या को ध्यान में रखते हुए जब ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की, तो उसके कुछ समय बाद छात्र छात्राओं को काफी आसानी होने लगी थी. बच्चे घर बैठे ही ऑनलाइन फॉर्म भर अपने सभी डॉक्यूमेंट ले सकते थे. लेकिन, कुछ समय बाद फिर से विश्वविद्यालय का पुराना रवैया शुरू हो गया. डिग्री, मार्कशीट, नामांकन संख्या व अन्य कागजों के लिए जब छात्र ऑनलाइन आवेदन करते हैं, तो उसके काफी समय बीतने के बावजूद उन्हें कागज नहीं मिल पाते.

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वहीं विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं की समस्या को ऑफलाइन तरीके से सुनने के लिए हेल्प डेस्क शुरू की गई थी. जो काफी समय से निष्क्रिय पड़ी हुई थी. हेल्प डेस्क पर बच्चों की समस्या का निस्तारण नहीं होता. जिसकी वजह से बच्चों को विश्वविद्यालय के तमाम विभागों में चक्कर काटने पड़ते हैं. 2015 से विश्वविद्यालय एजेंसियों के क्लाउड स्पेस पर काम कर रहा है. ऐसे में कई एजेंसी विश्वविद्यालय से डाटा लेकर भाग गई. इसके बाद विश्वविद्यालय को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. लेकिन, अब विश्वविद्यालय खुद का क्लाउड स्पेस ले रहा है.

लखनऊ से आई छात्रा सुनीता ने बताया कि उसने बीएससी की डिग्री के लिए करीब एक महीने पहले विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया था. लेकिन, अभी तक उसकी डिग्री ना तो कॉलेज और ना ही घर पहुंची है. उसने जब विश्वविद्यालय में आकर इस बारे में जानकारी की तो कोई भी संतुष्ट जवाब नहीं मिला. सुनीता ने बताया कि लखनऊ रहती हूं और वहां से आने में काफी परेशानी होती है.

अलीगढ़ के वार्ष्णेय कॉलेज के छात्र वरुण ने बताया कि वह अपनी मार्कशीट के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं. लेकिन, अभी तक उसकी मार्कशीट नहीं मिली है. उसे अगले सत्र में प्रवेश लेना है, जिसके लिए उसने मार्कशीट के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था. अगर उसकी मार्कशीट समय पर नहीं मिली तो सत्र निकल जाएगा और एक साल खराब हो जाएंगे.

डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रक्रिया को सही से चालू करने के लिए पिछले छह महीने से प्रयास किया जा रहा है. जिसमें समस्या यह है कि विश्वविद्यालय के पास अपना खुद का क्लाउड स्पेस नहीं है. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. जैसे ही टेंडर फाइनल हो जाएगा विश्वविद्यालय को अपना खुद का क्लाउड स्पेस मिल जाएगा. और छात्र हित में आने वाली सभी समस्याओं को दूर कर दिया जाएगा. हेल्प डेस्क को एक्टिव किया जा रहा है. जो छात्र-छात्राएं अपनी समस्या लेकर हेल्प डेस्क पर आएंगे. वहां मौजूद कर्मचारी संबंधित पटल पर जाकर उनकी समस्या का निस्तारण करेंगे.

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