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Coronavirus in Bengal: रात के अंधेरे में संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार,ये है बंगाल का हाल

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Coronavirus in Bengal: रात के अंधेरे में संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार,ये है बंगाल का हाल

Coronavirus in Bengal: कोरोना को लेकर जहां पूरा देश डरा हुआ है, वहीं पश्चिम बंगाल में इस संक्रमण को लेकर खूब राजनीति हो रही है. केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संक्रमितों का अगल-अलग आकंड़ा जारी किया जा रहा है. दोनों सरकारों के आकंड़ों में जमीन आसमान का फर्क है. केंद्र के अनुसार अब तक राज्य में 95 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि राज्य सरकार की माने तो मंगलवार तक यहां 69 लोग ही संक्रमित हुए हैं. वहीं बंगाल में कोरोना से मरनेवाले लोगों के शव के अंतिम संस्कार करने को लेकर भी लोग भ्रमित हैं. हाल में नीमतला श्मशान व धापा में कोरोना संक्रमित शव के अंतिम संस्कार से पहले स्थानीय लोगों ने जम कर विरोध किया था. स्थानीय लोगों का मानना है कि शव अंतिम संस्कार से भी संक्रमण फैलता है. इस परिस्थिति में कोरोना संक्रमित शव के अंतिम संस्कार करने में प्रशासन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब संक्रमित शवों का संस्कार रात के अंधेरे में किया जा रहा है.

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जानकारी के अनुसार गत शनिवार को महानगर के एनआरएस अस्पताल में बजबज महेशतला के रहनेवाले एक 34 साल के व्यक्ति की मौत हुई थी. इस व्यक्ति की मौत के बाद सोमवार अस्पताल प्रबंधन ने शव अंतिम संस्कार किया. अंतिम संस्कार के लिए पहले इसे रात को 11 बजे शव ले जाया गया था, लेकिन उस वक्त शवदाह गृह के आस- पास के इलाकों में रहनेवाले लोग जगे हुए थे. कुछ लोग सड़क पर घूम भी रहे थे. इसलिए शव वापस अस्पताल लाया गया. इसके बाद दोबारा रात को तीन शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया और तड़के 3:40 बजे प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया.

स्वास्थ्य विभाग के एक आला अधिकारी ने बताया कि इसी तरह अब रात के अंधेरे में संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार किया जायेगा, ताकि स्थानीय लोगों को भनक न लगे. कोरोना वायरस के संक्रमण से किसी की मृत्यु होने के बाद उसके शव का प्रबंधन कैसे किया जाये और क्या सावधानियां बरती जायें. इस बारे में भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किये हैं. भारत सरकार ने नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की मदद से ये दिशानिर्देश तैयार किये हैं. चूंकि कोविड 19 एक नई बीमारी है और वैज्ञानिकों के पास फिलहाल इसकी सीमित समझ है. इसलिए महामारियों से संबंधित जो समझ अब तक हमारे पास है, उसी के आधार पर ये गाइडलाइंस तैयार की गयी हैं.

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क्या हैं गाइडलाइंस

-दिशा-निर्देश में इस बात पर बहुत ज़ोर दिया गया है कि कोरोना (कोविड-19) हवा से नहीं फैलता बल्कि बारीक कणों के ज़रिए फैलता है.

-शव को हटाते समय पीपीई का प्रयोग किया जाता. पीपीई एक तरह का ‘मेडिकल सूट’ है जिसमें मेडिकल स्टाफ़ को बड़ा चश्मा, एन95 मास्क, दस्ताने और ऐसा एप्रन पहनने का परामर्श दिया जाता है जिसके भीतर पानी ना जा सके.

-मरीज के शरीर में लगीं सभी ट्यूब बड़ी सावधानी से हटायी जाती है. शव के किसी हिस्से में घाव हो या खून के रिसाव की आशंका हो तो उस भाग को ढंक दिया जाता है.

-मेडिकल स्टाफ़ यह सुनिश्चित करते हैं कि शव से किसी तरह का तरल पदार्थ ना रिसे.

-शव को प्लास्टिक के लीक-प्रूफ बैग में रखा जाता है. उस बैग को एक प्रतिशत हाइपोक्लोराइट की मदद से कीटाणुरहित बनाया जाए. इसके बाद ही शव को परिवार द्वारा दी गई सफेद चादर (कफन) में लपेटा जाता है.

-कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के इलाज में इस्तेमाल हुईं ट्यूब और अन्य मेडिकल उपकरण, शव को ले जाने में इस्तेमाल हुए बैग और चादरें, सभी को नष्ट कर दिया जाता है. मेडिकल स्टाफ़ को यह दिशा-निर्देश रहता है कि वे मृतक के परिवार को भी ज़रूरी जानकारियां दें और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए काम करें.

-कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति की ऑटोप्सी यानी शव-परीक्षा भी बहुत ज़रूरी होने पर ही की जाये.

-शवगृह से संक्रमित शव निकाले जाने के बाद सभी दरवाज़े, फर्श और ट्रॉली सोडियम हाइपोक्लोराइट से साफ किये जाये.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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