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MMMUT में बीटेक प्रवेश फर्जीवाड़ा मामले में हुआ खुलासा, विश्वविद्यालय का लिपिक ही निकला मास्टर माइंड

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MMMUT में बीटेक प्रवेश फर्जीवाड़ा मामले में हुआ खुलासा, विश्वविद्यालय का लिपिक ही निकला मास्टर माइंड

Gorakhpur : गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में फर्जी दस्तावेजों के सहारे 40 छात्रों को बीटेक पाठ्यक्रम में दाखिला कराया गया था. यह मामला सामने आने के बाद शासन स्तरीय जांच में यह बात सामने आई है कि फर्जी तरीके से छात्रों का प्रवेश दिलाने का षड्यंत्र डीन (अधिष्ठाता) ऑफिस के लिपिक रवी मोहन श्रीवास्तव ने रचा था. वही इस करतूत में अश्वनी त्रिपाठी समेत चार लिपिक और एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी भी शामिल है साथ ही तीन शिक्षकों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है.

गुरुवार को प्रबंध बोर्ड की बैठक में यह खुलासा हुआ है और इन सभी लोगों का कारनामा से आया हैं. यद्यपि विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. पठ्यक्रम में प्रवेश का फर्जीवाड़ा सत्र 2020–21 व 2021–22 में हुआ था. शासन स्तरीय जांच में जिन 3 शिक्षकों की भूमिका संदिग्ध मिली है उनमें दो तत्कालिक डीन (एकेडमिक अफेयर) प्रोफेसर डीके त्रिवेदी व प्रोफेसर एस के सोनी और एक एसोसिएट डीन प्रोफ़ेसर पी पी पांडे शामिल है. जांच समिति का मानना है कि यह शिक्षक सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं थें.

जांच समिति का मानना है कि कार्य के प्रति उनकी लापरवाही का लाभ उठाकर लिपिकों ने फर्जी दस्तावेज के सहारे छात्रों का प्रवेश कराया. इस प्रकरण को लेकर सभी दोषियों को बेगुनाही साबित करने का एक और अवसर देने का निर्णय प्रबंध समिति ने लिया है. बोर्ड द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति का सदस्य नामित किया है जिनमें अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर राम अचल सिंह, मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी के आचार्य प्रो. राजीव त्रिपाठी और चेंबर ऑफ इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष इंजीनियर ए के अग्रवाल शामिल है.

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित की गई जांच समिति उन साक्षयों का मूल्यांकन करेगी जो दोषियों द्वारा अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए रजिस्ट्रार को दी जाएगी. जांच समिति द्वारा जो रिपोर्ट दी जाएगी उसे प्रबंध बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा.जिसके बाद आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा. एमएमयूटी में बीटेक में प्रवेश में हुए फर्जीवाड़े कों लेकर शासन स्तरीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट एक पखवाड़े पहले ही विश्वविद्यालय को सौंप दी थी. विश्व विश्वविद्यालय ने दो बार प्रबंध बोर्ड के समक्ष इसे रखा था और कार्रवाई को लेकर विधिक राय भी ली गई थी.

फिलहाल मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रशासन फर्जीवाड़े के दोषियों के नाम की घोषणा करने से कतरा रहा है.दोषियों के नाम उजागर करने के नाम पर हमेशा यूं ही जवाब मिला कि रिपोर्ट अभी गोपनीय हैं. कार्यवाही के निर्णय के साथ ही दोषियों के नाम की घोषणा की जाएगी. बता दें कि फर्जी दस्तावेज के सहारे मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले सत्र 2020–21 व 2021–22 के 40 छात्रों का प्रवेश विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस वर्ष जनवरी में निरस्त कर दिया था.

प्रवेश निरस्त होने के बाद 34 छात्रों ने हाई कोर्ट का सहारा लिया और वहां अपील की थी.वह मामला कोर्ट में अभी भी लंबित है. उम्मीद लगाई जा रही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रबंध बोर्ड की बैठक में दोषी घोषित किए गए शिक्षक और कर्मचारियों के नाम और उन पर कार्रवाई को लेकर बोर्ड द्वारा लिए गए निर्णय को भी हाईकोर्ट के समक्ष रखेगा.

रिपोर्ट– कुमार प्रदीप, गोरखपुर

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