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B positive : मदद नहीं कर सकते, तो बढ़ाएं हौसला

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B positive : अगर किसी की मदद नहीं कर सकते हैं तो हौसला बढ़ाएं और वो भी नहीं कर सकते हैं तो कम से कम उपहास नहीं करें.

आज के भयावह हालात में बहुत सारे लोग अपने प्रियजनों को खो रहे हैं या उनके जल्द से जल्द ठीक होने की चिंता में डूबे हुए हैं और बहुत सारे लोग अपने-अपने प्रियजनों के संक्रमण की चिंता किए बिना तन, मन और धन से जरूरतमंदों के लिए खड़े हैं. वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जिनके सोचने का नजरिया सचमुच दुखित/व्यथित करता है. लोगों की मदद करने की जगह मौत और बीमारी का आंकड़ा उन्हें एक नंबर से ज्यादा कुछ भी नजर नहीं आता है. राजनीतिक, वैचारिक प्रहसन में मूल मुद्दे कहीं गुम हो जाते हैं.

कारण बिल्कुल स्पष्ट है. कुछेक इंसानों में नैतिक और वैचारिक पतन इतना हो गया है कि आज उन्हें सबकुछ इवेंट नजर आता है और जबतक उन्हें तकलीफ खुद नहीं होती है तब तक उन्हें दर्द का एहसास भी नहीं होता है, लेकिन जब मामला खुद पर आता है तो उनके तमाम ज्ञान धरे के धरे रह जाते हैं और वो उससे मुक्ति का मार्ग तलाश करने लगते हैं. उसके लिए खुद के गढ़े लॉजिक को शीर्षासन कराने लगते हैं.

हर किसी को ये समझना होगा कि दर्द के संक्रमण का भी एक चेन है. इसका एहसास देर सवेर हर किसी को होना ही है. इसलिए अगर किसी की मदद नहीं कर सकते हैं तो हौसला बढ़ाएं और वो भी नहीं कर सकते हैं तो कम से कम उपहास नहीं करें.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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