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Home Technology सर्दियों के कपड़े वॉशिंग मशीन में ठीक से क्यों नहीं धुलते? अगली बार धोने से पहले इन तरीकों को जरूर अपनाएं

सर्दियों के कपड़े वॉशिंग मशीन में ठीक से क्यों नहीं धुलते? अगली बार धोने से पहले इन तरीकों को जरूर अपनाएं

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सर्दियों के कपड़े वॉशिंग मशीन में ठीक से क्यों नहीं धुलते? अगली बार धोने से पहले इन तरीकों को जरूर अपनाएं
वॉशिंग मशीन में सर्दियों के कपड़े डालती हुई एक महिला (Pic- AI Generated)

Washing Machine Tips: सर्दियों के कपड़े कई बार ऐसी हालत बना देते हैं कि अच्छी-खासी वॉशिंग मशीन भी बेकार सी लगने लगती है. कोई स्वेटर देखने में साफ होता है, लेकिन उसमें हल्की सी अजीब गंध रहती है. कोई हुडी बाहर आते ही भारी लगती है, जैसे डिटर्जेंट कपड़े में ही चिपक गया हो. जैकेट्स से लिंट झड़ने की जगह और चिपक जाता है. ऐसे में आप ड्रम को देखते रह जाते हैं. फिर आप वही करते हैं जो ज्यादातर लोग करते हैं. एक और वॉश चला देते हैं, ज्यादा डिटर्जेंट डालते हैं, कभी मोड बदलते हैं.

यहां तक कि एक वक्त पर यह भी सोचने लगते हैं कि कहीं मशीन ही खराब तो नहीं हो गई. जबकि ज्यादातर मामलों में गलती मशीन की नहीं, बल्कि कपड़े धोने के तरीके की होती है. इसी वजह से आज हम आपको कुछ ऐसे आसान उपाय बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप सर्दियों के कपड़े वॉशिंग मशीन में सही तरीके से धो सकते हैं. 

सर्दियों के कपड़े वॉशिंग मशीन में ठीक से क्यों नहीं धुलते?

सर्दियों के कपड़ों के साथ गलती तब शुरू होती है, जब हम उन्हें टी-शर्ट या जींस की तरह ही धोने लगते हैं. मोटे कपड़े वॉशिंग मशीन में वैसे नहीं घूमते जैसे पतले कपड़े घूमते हैं. स्वेटर, फ्लीस, पैडेड जैकेट और हुडी भारी होते हैं. ये पानी ज्यादा सोख लेते हैं, हवा फंसा लेते हैं और शरीर के तेल को भी आसानी से नहीं छोड़ते.

जब आप सर्दियों में भी वॉशिंग मशीन का ड्रम गर्मियों की तरह भर देते हैं, तो कपड़ों को ठीक से हिलने-डुलने की जगह नहीं मिलती. कपड़े भारी होकर आपस में दबे रहते हैं, जिससे वे एक-दूसरे से कम रगड़ खाते हैं. डिटर्जेंट सही तरह से घूम नहीं पाता और रिंस का पानी भी साबुन के अंश ठीक से नहीं निकाल पाता.

ऊपर से सर्दियों में ज्यादातर लोग ठंडे पानी में कपड़े धोते हैं. हल्के कपड़ों के लिए यह ठीक है, लेकिन मोटे कपड़ों में जमी शरीर की चिकनाई ठंडे पानी में आसानी से नहीं टूटती. वह आधी जमी-सी रह जाती है, जिससे डिटर्जेंट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और अक्सर वह पूरी तरह काम नहीं कर पाता. इसी वजह से कपड़े दिखने में तो साफ लगते हैं, लेकिन छूने पर अजीब-से महसूस होते हैं.

इन आसान तरीकों को अपनाएं 

सबसे आसान और पहला उपाय यही है कि मशीन में कम कपड़े डालें. अगर ड्रम देखने में भरा हुआ लग रहा है, तो समझिए सर्दियों के कपड़ों के लिए वह पहले ही ज्यादा भर चुका है.

इसके बाद स्पीड कम करें. क्विक वॉश और इको मोड हल्के, रोजमर्रा के कपड़ों के लिए होते हैं. सर्दियों के कपड़ों को ज्यादा समय चाहिए. कॉटन या मिक्स्ड फैब्रिक का लंबा वॉश साइकल पानी और डिटर्जेंट को कपड़ों के रेशों तक अच्छी तरह पहुंचने देता है. 

टेम्परेचर भी जरूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं. ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी, आमतौर पर 30°C या 40°C, इस्तेमाल करने से तेल और गंदगी आसानी से निकल जाती है और कपड़े भी खराब नहीं होते.

डिटर्जेंट का सही चुनाव भी मदद करता है. लिक्विड डिटर्जेंट कम टेम्परेचर में आसानी से घुल जाता है और घने कपड़ों से आसानी से निकल जाता है. अक्सर जरूरत से थोड़ी कम डिटर्जेंट डालने से कपड़े ज्यादा नरम और ताजगी भरे रहते हैं.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.
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