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Home Technology न कैमरा, न स्क्रीन, फिर भी नजरें आप पर! Who-Fi एडवांस टेक्नोलॉजी या प्राइवेसी पर नया खतरा, जानिए कैसे करेगा ये काम

न कैमरा, न स्क्रीन, फिर भी नजरें आप पर! Who-Fi एडवांस टेक्नोलॉजी या प्राइवेसी पर नया खतरा, जानिए कैसे करेगा ये काम

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न कैमरा, न स्क्रीन, फिर भी नजरें आप पर! Who-Fi एडवांस टेक्नोलॉजी या प्राइवेसी पर नया खतरा, जानिए कैसे करेगा ये काम
Who-Fi

Who-Fi New Advanced Technology: अगर आपको अनलिमिटेड Wi-Fi इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए एक कमरे में छोड़ दिया जाए, तो खुश हो जाएंगे. क्योंकि, आपको फ्री में अनलिमिटेड इंटरनेट मिल रहा है. जिसका इस्तेमाल आप मूवी डाउनलोड करने या किसी भी काम के लिए कर सकते हैं. लेकिन अगर आपसे ये कहा जाए कि आप जिस Wi-Fi का इस्तेमाल करेंगे वह आप पर नजर भी रखेगा. यानी कि Wi-Fi का सिग्नल आपकी हर एक्टिवटी पर भी नजर रखेगा.

रोम के रिसर्चर्स का नया दावा

इस बात पर आप शायद यकीन न करें. आपको लग रहा होगा कि ये कोई मजाक है. लेकिन ये सच है. एक ऐसा सच जो अभी तो नहीं पर शायद कुछ दिन, कुछ महीनों या साल भर में सच हो जाए. जिस Wi-Fi का आप इस्तेमाल कर रहे हैं, उसी की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि आप क्या कर रहे हैं. इस बात का दावा किया है रोम के La Sapienza यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने. उनका कहना है कि Wi-Fi से निकलने वाले सिग्नल के जरिए आसानी से किसी भी कमरे में मौजूद व्यक्ति के एक्टिवटी को ट्रेस किया जा सकता है. रिसर्चर्स ने इस नए टेक्नोलॉजी को Who-Fi का नाम दिया है. चलिए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.

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क्या है Who-Fi?

Who-Fi वाई-फाई की एक एडवांस्ड टेक्नोलॉजी है, जो AI की मदद से बिना कैमरे, माइक्रोफोन और बिना किसी डिवाइस के काम कर सकती है. यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसके जरिए किसी भी कमरे में मौजूद व्यक्ति के मूवमेंट को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. या यूं कहें कि यह किसी भी Wi-Fi सिग्नल को एक बायोमेट्रिक स्कैनर में बदल सकता है. जिससे आप एक कमरे में क्या कर रहे हैं, ये सारी जानकारी बिना कैमरे के इस टेक्नोलॉजी की मदद से जानी जा सकती है. हालांकि, इस टेक्नोलॉजी पर अभी कई तरह के एक्सपेरिमेंट किये जा रहे हैं, लोगों के बीच अभी टेस्ट किया जाना बाकी है. लेकिन अभी से ही इस टेक्नोलॉजी ने लोगों के बीच प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं को बढ़ा दिया है. क्योंकि, अगर इस तरह की टेक्नोलॉजी आती है तो इससे लोगों की निजी जिंदगियों में प्राइवेसी न के बराबर बचेगी.

कैसे काम करेगी ये टेक्नोलॉजी?

ऑनलाइन जर्नल arXiv में पब्लिश रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, Who-Fi टेक्नोलॉजी रेगुलर 2.4GHz Wi-Fi सिग्नल का इस्तेमाल कर व्यक्ति को पहचान कर उसे ट्रैक कर सकता है. यह खास टेक्नोलॉजी आइडेंटिटी ऑथेंटिफिकेशन और सर्विलांस में अहम भूमिका निभा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार यह सिस्टम WiFi सिग्नल और ट्रांसफॉर्मर बेस्ड न्यूरल नेटवर्क (LLM) का इस्तेमाल करता है. जिससे यह AI की मदद से’चैनल स्टेट इन्फॉर्मेशन’ (Channel State Information) को मॉनिटर कर Wi-Fi सिग्नल के स्ट्रेंथ और फेज में हुए बदलाव का पता कर लेता है.

बिना कैमरे के भी आसानी से कर सकता है ट्रैक

आसान शब्दों में कहा जाए तो, यह Who-Fi टेक्नोलॉजी किसी भी जगह में Wi-Fi सिग्नल का ऐसा जाल फैला देता है, जिससे किसी भी एक्टिविटी या मूवमेंट के कारण सिग्नल डिस्टर्ब होने पर Who-Fi उसे बिना कैमरे के भी आसानी से ट्रैक कर सकता है. इतना ही नहीं, ये टेक्नोलॉजी इतना स्मार्ट है कि अगर लंबे समय बाद भी कोई इंसान इस सिग्नल के दायरे में आता है, तो यह उसे तब भी पहचान सकता है. दरअसल, किसी इंसान के Wi-Fi सिग्नल के पास होने पर सिग्नल के रास्ते में जो भी डिस्टर्बेंस आता है, उससे एक यूनिक पैटर्न बनता है. ये पैटर्न इंसानों के फिंगरप्रिंट से लेकर चेहरे की बनावट और रेटिना की संरचना की तरह सटीक होते हैं. ऐसे में Who-Fi टेक्नोलॉजी उस यूनिक पैटर्न को पहचान कर उस व्यक्ति से जोड़ सकता है और उसके बाद उस व्यक्ति के हर एक्टिवटी पर नजर रख सकता है.

समझ सकता है साइन लैंग्वेज

रिपोर्ट के अनुसार, सिग्नेचर्स पर ट्रेन होने के बाद ये सिस्टम न केवल इंसान के एक्टिवटी और मूवमेंट को ट्रैक कर सकता है, बल्कि उस इंसान के लंबे समय के बाद दोबारा से सिग्नल में आने पर भी उसे पहचान सकता है. यह सिस्टम सिर्फ बायोमेट्रिक स्कैनर की तरह ही काम नहीं करता बल्कि इंसानों के साइन लैंग्वेज को भी समझ सकता है. खास बात तो ये है कि, इन सबके लिए सिस्टम को किसी भी कैमरे या माइक्रोफोन की जरूरत नहीं पड़ती. इतना ही नहीं रिपोर्ट में बताया गया है कि, एक एंटीना वाले ट्रांसमीटर और तीन एंटीना वाले रिसीवर से Who-Fi सिस्टम चलता है. यह सिस्टम इतना सटीक है कि यह एक बार में 9 लोगों को आसानी से ट्रैक कर सकता है. साथ ही दीवार के पीछे मौजूद कोई व्यक्ति क्या कर रहा है यह वो भी एकदम सटीकता से बता सकता है.

सिस्टम को पकड़ पाना मुश्किल

इस सिस्टम की खासियत है कि यह हाई इवेजन है. यानी कि मॉनिटर टेक्नोलॉजी से भी इसे पकड़ पाना मुश्किल है. क्योंकि, Who-Fi सिस्टम में किसी तरह का हार्डवेयर या एमिशन पैटर्न, रडार या विजिबल स्पेक्ट्रम लाइट नहीं है. जिससे इस सिस्टम का पता लगाया जा सके. यह नॉर्मल Wi-Fi सिग्नल को पकड़कर एकदम सटीकता से अपना काम करता है.

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शिवानी कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर टेक-ऑटो कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में वह 3 सालों से सक्रिय हैं. वह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं. वह आसान भाषा और साफ तरीके से खबर लिखती हैं. टेक कैटेगरी में वह स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स पर खबर लिखती हैं. ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी शिवानी नई कार-बाइक लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऑटो अपडेट्स, कार और बाइक से जुड़े टिप्स व नई तकनीक पर खबरें लिखती हैं. वह टेक और ऑटो की खबरों को आसान तरीके से पेश करती हैं, ताकि हर रीडर उसे आसानी से समझ सके. उनकी लेखन शैली आसान, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है. शिवानी ने करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. इसके बाद उन्होंने अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे कंटेन्ट राइटिंग की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिवानी ने Lagatar.Com और The News Post जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है. यहां उन्होंने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और अन्य न्यूज बीट पर कंटेंट तैयार किया. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में उनकी खास रुचि है और वह लगातार नए विषयों पर बेहतर और भरोसेमंद कंटेंट तैयार कर रही हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शिवानी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि रीडर्स तक सही, काम की खबरें और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
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