[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Technology DarkNet पर लीक हुआ NEET का पेपर, जानिए कितना खतरनाक है यह

DarkNet पर लीक हुआ NEET का पेपर, जानिए कितना खतरनाक है यह

0
DarkNet पर लीक हुआ NEET का पेपर, जानिए कितना खतरनाक है यह
DarkNet और Dark Web क्या है?

What is DarkNet : ऑनलाइन दुनिया की जब हम बात करते हैं, तो हमारी नजर में सिर्फ गूगल और दूसरे सर्च इंजन द्वारा इंडेक्स की गई वेबसाइट्स और कुछ दूसरी चीजें होती हैं. ये सभी वर्ल्ड वाइड वेब के तहत आते हैं लेकिन यह दरअसल किसी हिमशैल का सिरा है, जिसे टिप ऑफ द आइसबर्ग कहते हैं. गूगल और अन्य सर्च इंजन द्वारा इंडेक्स की गई सभी वेबसाइट से परे डीप वेब यानी डीप नेट है, और उसके भी अंदर डार्क वेब या डार्कनेट छिपा हुआ है. और इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है.

डीप वेब या डीप नेट में उस दूसरी परत की वेबसाइट्स आती हैं, जो इंटरनेट उपयोगकर्ताओं द्वारा कंटेंट ब्राउज करने पर सर्च इंजन के रिजल्ट के रूप में दिखाई नहीं देती है. डीप वेब का उपयोग निजी जानकारी और ऐसी जानकारी रखने के लिए भी किया जा सकता है जिसे गुप्त रखने की आवश्यकता होती है. उदाहरण के लिए कानूनी या वैज्ञानिक दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड या प्रतिस्पर्धी की जानकारी.

डीप नेट या डीप वेब से परे एक स्तर डार्क वेब या डार्क नेट का है, जो इंटरनेट का एक छोटा सा हिस्सा है जिसमें जानबूझकर छिपाकर रखी गई वेबसाइट्स हैं, जो केवल एन्क्रिप्टेड ब्राउजर जैसे कि द अनियन राउटर, जिसे टोर के नाम से जाना जाता है, का उपयोग कर ऐक्सेस की जा सकती हैं. आइए जानते हैं डार्क वेब के बारे में, जिसे डार्क नेट के नाम से भी जाना जाता है.

ऑनलाइन दुनिया का एक हिस्सा डार्क नेट का भी है, जो सर्च इंजन से एकदम अलग है. हाल ही में NEET का पेपर भी इसी पर लीक किया गया था. यहां यूजर्स को ट्रेस करना पाना बहुत मुश्किल होता है. इस जगह पर बिटकॉइन और क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट होती है. डार्कनेट पर कानूनी और गैर-कानूनी, दोनों तरह की एक्टिविटीज होती हैं, और इसमें किसी का नाम सबके सामने नहीं आ पाता है.

Also Read : Deepfake Explained: क्या होता है डीपफेक, कैसे बचें इससे और फेक वीडियो की कहां करें शिकायत?

डार्कनेट इंटरनेट का वह हिस्सा है, जो एनक्रिप्टेड नेटवर्क पर मौजूद है. इसे ऐक्सेस करने के लिए स्पेशल सॉफ्टवेयर, ऑथराइजेशन और कंन्फिगरेशन की जरूरत होती है. डार्कनेट को सर्च इंजन द्वारा इंडेक्स भी नहीं किया जाता है और इसलिए यहां पर किसी की जानकारी पता नहीं लग पाती है. यह यूजर्स को नकली सामान, चोरी किये गए डेटा, ड्रग्स, हथियार और अवैध सर्विसेज बेचने जैसी गलत कामों में शामिल होने की अनुमति देता है. हालांकि, डार्कनेट पर हो रही सारी एक्टिविटी अवैध नहीं होती है. यहां प्राइवेसी प्रोटेक्शन, बिना नाम के कम्यूनिकेशन और सेंसरशिप जैसे वैध उद्देश्यों वाले काम भी होते हैं.

डार्कनेट के खतरे क्या हैं?

डार्क नेट का इस्तेमाल वैसे तो वैध उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भी किया जाता है, लेकिन मोटे तौर पर इसके कई खतरे हैं और जिन्हें जानना हमारे लिए बहुत जरूरी है. आइए जान लेते हैं डार्क नेट या डार्क वेब के कुछ खतरों के बारे में-

साइबर क्राइम : डार्क नेट को आप साइबर क्रिमिनल्स का अड्डा कह सकते हैं. यह क्रेडिट कार्ड स्कैम, यूजर्स की आइडेंटिटी की चोरी, डिवाइस में मैलवेयर डाल देना जैसी अवैध एक्टिविटीज शामिल हैं. इस तरह के क्रिमिनल्स कानून से अपनी एक्टिविटी को छिपाने के लिए डार्क वेब का सहारा लेते हैं.

मैलवेयर : डार्क नेट पर साइबर क्रिमिनल्स धड़ल्ले से मैलवेयर इंस्टॉल करते हैं. इससे यूजर्स की डिवाइस का उन्हें ऐक्सेस मिल जाता है. इससे यूजर्स की निजी जानकारी तक पहुंचा जा सकता है. डार्क नेट पर लगभग हर तरह का मैलिशस सॉफ्टवेयर मौजूद है.

स्कैम और अवैध एक्टिविटी : डार्क नेट में कई वेबसाइट्स को यूजर्स की निजी जानकारी और पैसे चुराने के लिए डिजाइन किया जाता है. इसके अलावा, डार्क नेट पर ड्रग स्मगलिंग, वेपन ट्रेडिंग और ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसी एक्टिविटीज भी की जाती हैं. ऐसे में डार्क नेट का इस्तेमाल करते समय सतर्कता में कमी बहुत हानिकारक हो सकती है.

Previous article T20 World cup 2024 : रविंद्र जडेजा क्यों राहुल द्रविड़ को गोद में उठाकर झूमे, ड्रेसिंग रूम का Video वायरल
Next article Loan : आदमी के चले जाने के बाद कौन भरता है उनका लोन, क्या घर वालों को देना पड़ता है बचा पैसा?
Avatar Of Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel