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Home Technology वॉशिंग मशीन को कबाड़ तो नहीं बना रहे आप? रोज की ये गलतियां कराएंगी बड़ा नुकसान

वॉशिंग मशीन को कबाड़ तो नहीं बना रहे आप? रोज की ये गलतियां कराएंगी बड़ा नुकसान

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वॉशिंग मशीन को कबाड़ तो नहीं बना रहे आप? रोज की ये गलतियां कराएंगी बड़ा नुकसान
मशीन की उम्र बढ़ानी है तो आज ही बदलें ये आदतें // एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

वॉशिंग मशीन आज लगभग हर घर की जरूरत बन चुकी है. यह समय और मेहनत दोनों बचाती है, लेकिन कई लोग अनजाने में ऐसी गलतियां करते हैं जो मशीन की उम्र को तेजी से कम कर सकती हैं. शुरुआत में ये छोटी लापरवाहियां नजरअंदाज हो जाती हैं, लेकिन धीरे-धीरे मोटर, ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम पर असर डालने लगती हैं. नतीजा यह होता है कि मशीन समय से पहले खराब होने लगती है और मरम्मत पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ सकती है.

जरूरत से ज्यादा कपड़े भरना पड़ सकता है भारी

कई लोग सोचते हैं कि एक बार में ज्यादा कपड़े धोकर समय बचाया जा सकता है. लेकिन मशीन की निर्धारित क्षमता से अधिक लोड डालना सबसे आम और सबसे नुकसानदायक गलती मानी जाती है. ज्यादा वजन की वजह से मोटर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ड्रम को भी नुकसान पहुंच सकता है. लंबे समय तक ऐसा करने से मशीन की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है.

कपड़ों की जेब जांचे बिना न करें वॉश

कपड़े मशीन में डालने से पहले जेबों की जांच करना बेहद जरूरी है. सिक्के, चाबियां, पिन या अन्य छोटी धातु की चीजें धुलाई के दौरान ड्रम से टकराकर उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं. कई मामलों में ये वस्तुएं मशीन के फिल्टर या ड्रेनेज सिस्टम में फंसकर बड़ी समस्या पैदा कर देती हैं.

ज्यादा डिटर्जेंट हमेशा बेहतर नहीं होता

अक्सर लोगों को लगता है कि अधिक डिटर्जेंट इस्तेमाल करने से कपड़े ज्यादा साफ होंगे. हकीकत इसके उलट है. जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट मशीन के अंदर जमा होने लगता है और समय के साथ पाइप, फिल्टर तथा अन्य हिस्सों पर परत बना सकता है. इससे मशीन की सफाई क्षमता और प्रदर्शन दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

ड्रेन पाइप और अंदरूनी सफाई को नजरअंदाज न करें

वॉशिंग मशीन का ड्रेन पाइप लगातार गंदगी, कपड़ों के रेशों और डिटर्जेंट के अवशेषों को बाहर निकालता है. अगर इसकी समय-समय पर सफाई नहीं की जाए तो पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है. इससे मशीन के अंदर बदबू, लीकेज और तकनीकी खराबियां पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है.

धुलाई के बाद कपड़े मशीन में छोड़ना भी नुकसानदायक

कई बार लोग कपड़े धुलने के बाद घंटों तक मशीन के अंदर ही छोड़ देते हैं. इससे मशीन के भीतर नमी बनी रहती है, जो रबर सील और अन्य हिस्सों पर असर डाल सकती है. लगातार ऐसा होने पर फफूंदी और बदबू की समस्या भी शुरू हो सकती है. बेहतर होगा कि धुलाई पूरी होते ही कपड़ों को बाहर निकाल लिया जाए और मशीन का दरवाजा कुछ समय के लिए खुला छोड़ दिया जाए.

छोटी सावधानी बचा सकती है बड़ा खर्च

वॉशिंग मशीन की लंबी उम्र सिर्फ ब्रांड या कीमत पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके इस्तेमाल के तरीके पर भी निर्भर करती है. सही लोड, उचित मात्रा में डिटर्जेंट और नियमित सफाई जैसी साधारण आदतें मशीन को वर्षों तक बेहतर स्थिति में बनाए रख सकती हैं. थोड़ी सी सावधानी भविष्य में होने वाले महंगे रिपेयर बिल से भी बचा सकती है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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