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Telegram Ban India: जानें क्यों और कैसे होता है ऐप ब्लॉक?

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Telegram Ban India: जानें क्यों और कैसे होता है ऐप ब्लॉक?
Telegram पर लगा बैन! जानिए कैसे बंद हो जाता है पूरा ऐप // एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

NEET परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले ने देशभर में हलचल मचा दी है. इस विवाद में मैसेजिंग ऐप Telegram का नाम सामने आने के बाद भारत सरकार ने इस प्लैटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया. लाखों यूजर्स अचानक अपनी चैट्स और ग्रुप्स तक पहुंच खो बैठे हैं. सवाल यह है कि आखिर किसी ऐप को एक झटके में कैसे बंद कर दिया जाता है और इसका असर आम यूजर्स पर कितना पड़ता है.

कैसे लगाया जाता है ऐप पर बैन?

जब किसी ऐप पर राष्ट्रीय सुरक्षा, अवैध गतिविधियों या बड़े पैमाने पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते हैं, तो सरकारी एजेंसियां जांच शुरू करती हैं. गंभीर आरोप साबित होने पर इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) और मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को उस ऐप की सेवाएं ब्लॉक करने का आदेश दिया जाता है. कई बार ऐप स्टोर और प्ले स्टोर से भी ऐप हटाया जा सकता है ताकि नए यूजर्स उसे डाउनलोड न कर सकें. यह भी पढ़ें- सरकार ने Telegram पर लगाया प्रतिबंध, WhatsApp पर क्यों नहीं?

लाखों यूजर्स पर असर

Telegram जैसे प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करोड़ों लोग पढ़ाई, बिजनेस और निजी बातचीत के लिए करते हैं. ऐसे में बैन लगते ही लाखों यूजर्स अचानक अपनी चैट्स और चैनलों तक पहुंच खो देते हैं. सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जो पढ़ाई या कामकाज के लिए इस ऐप पर निर्भर रहते हैं.

VPN का सहारा और खतरे

कई यूजर्स बैन के बाद VPN का इस्तेमाल करके ऐप तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. हालांकि VPN का इस्तेमाल हमेशा सुरक्षित या कानूनी हो यह जरूरी नहीं है. कई देशों में VPN पर भी नियम लागू होते हैं और डेटा सुरक्षा को लेकर खतरे बने रहते हैं.

यूजर्स को क्या करना चाहिए

ऐप बैन होने पर घबराने के बजाय आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए. फर्जी खबरों और अफवाहों से बचना जरूरी है. साथ ही अपने महत्वपूर्ण डेटा का बैकअप रखना और वैकल्पिक प्लैटफॉर्म की जानकारी रखना समझदारी भरा कदम है. यह भी पढ़ें- NEET री-एग्जाम से पहले मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, 22 जून तक Telegram बैन

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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