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Home Technology स्मार्टफोन खरीदने में दिखाओ स्मार्टनेस, जानो फोन से जुड़े मिथक और उनकी हकीकत

स्मार्टफोन खरीदने में दिखाओ स्मार्टनेस, जानो फोन से जुड़े मिथक और उनकी हकीकत

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स्मार्टफोन खरीदने में दिखाओ स्मार्टनेस, जानो फोन से जुड़े मिथक और उनकी हकीकत
Smartphone myths debunked / Unsplash

Smartphone Myths: स्मार्टफोन के बारे में इन दिनों हमने अपने मन में कई मिथक पाल लियेहैं. नया फोन लेते समय हम इनका शिकार हो जाते हैं. सही जानकारी न होने पर हम ज्यादा पैसे खर्च कर देते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि महंगा फोन ही बेहतर हो. हब आपको बताते हैं स्मार्टफोन से जुड़े कुछ आम मिथकों की सच्चाई:

मिथक 1: ज्यादा RAM मतलब तेज फोन

सच्चाई यह है कि RAM का काम एक साथ ज्यादा ऐप्स को खुला रखने में मदद करना है. लेकिन फोन की स्पीड प्रॉसेसर और सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन पर ज्यादा निर्भर करती है. सिर्फ RAM बढ़ाने से परफॉर्मेंस नहीं सुधरती.

मिथक 2: फ्लैगशिप चिप जरूरी है

सच्चाई यह है कि हाई-एंड प्रॉसेसरगेमिंग और हेवी टास्क के लिए अच्छे होते हैं, लेकिन आम यूजर्स के लिए मिड-रेंज चिप भी काफी है. अगर आप सिर्फ सोशल मीडिया, कॉल और वीडियो देखते हैं, तो फ्लैगशिप चिप पर खर्च करना जरूरी नहीं.

मिथक 3: ज्यादा मेगापिक्सल मतलब बेहतर फोटो (Smartphone Myths Debunked)

सच्चाई यह है कि फोटो की क्वाॅलिटी सिर्फ मेगापिक्सल पर नहीं, बल्कि सेंसर साइज, लेंस क्वाॅलिटी और सॉफ्टवेयर प्रॉसेसिंग पर निर्भर करती है. एक अच्छा 12MP कैमरा भी खराब 108MP कैमरे से बेहतर फोटो दे सकता है.

मिथक 4: फास्ट चार्जिंग से बैटरी खराब होती है

सच्चाई यह है कि आज के स्मार्टफोन फास्ट चार्जिंग को हैंडल करने के लिए डिजाइन किये जाते हैं. बैटरी की उम्र पर ज्यादा असर गर्मी और चार्जिंगहैबिट्स डालते हैं, न कि चार्जिंग स्पीड.

मिथक 5: नया मॉडल ही बेहतर होता है

सच्चाई यह है कि पुराने फ्लैगशिप मॉडल्स को भी सॉफ्टवेयर अपडेट मिलते हैं और उनकी परफॉर्मेंस शानदार होती है. पिछले साल का फ्लैगशिप खरीदना ज्यादा किफायती और समझदारी भरा फैसला हो सकता है.

कुल मिलाकर कहें, तो स्मार्टफोन खरीदते समय इन मिथकों से बचें और अपनी जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनें. सही जानकारी से आप पैसे भी बचा सकते हैं और बेहतर डिवाइस भी पा सकते हैं.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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