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Home Technology रूम हीटर है खतरनाक, जानें सुरक्षित इस्तेमाल के टिप्स

रूम हीटर है खतरनाक, जानें सुरक्षित इस्तेमाल के टिप्स

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रूम हीटर है खतरनाक, जानें सुरक्षित इस्तेमाल के टिप्स
रूम हीटर से राहत या खतरा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट

कड़ाके की ठंड में रूम हीटर घरों का सबसे बड़ा सहारा बन जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटी सी लापरवाही आपको सीधे अस्पताल तक पहुंचा सकती है? हाल ही में इंटरनेट पर वायरल हुए एक वीडियो ने लोगों को चौंका दिया, जिसमें शख्स ने रातभर हीटर चलाकर सोने के बाद खुद को अस्पताल में पाया. आइए समझते हैं कि आखिर रूम हीटर से कौन-कौन से खतरे जुड़े हैं और इन्हें सुरक्षित तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाए.

बंद कमरे में हीटर का खतरा

अगर रूम पूरी तरह से बंद हो और वेंटिलेशन न हो, तो हीटर चलाने से कार्बन डाइऑक्साइड और कई बार कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें कमरे में भर जाती हैं. इन गैसों की अधिकता से चक्कर आना, सांस लेने में दिक्कत और बेहोशी जैसी स्थिति बन सकती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ हमेशा कहते हैं कि हीटर चलाते समय कमरे में हवा का रास्ता खुला होना चाहिए.

सूखी हवा और सेहत पर असर

हीटर लगातार चलने से कमरे की हवा बेहद ड्राई हो जाती है. इसका असर सीधे शरीर पर पड़ता है- नाक और गले में जलन, आंखों में खुजली और खांसी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. लंबे समय तक ड्राई हवा में रहने से स्किन भी रूखी और बेजान हो सकती है.

दमा और सांस की बीमारी वालों के लिए खतरा

जिन लोगों को अस्थमा या सांस की समस्या है, उनके लिए हीटर का इस्तेमाल और भी खतरनाक साबित हो सकता है. ड्राई हवा और ऑक्सीजन की कमी से उनकी हालत बिगड़ सकती है. ऐसे मरीजों को हीटर का इस्तेमाल करते समय बेहद सावधानी बरतनी चाहिए.

सुरक्षित इस्तेमाल के टिप्स

  • हीटर चलाते समय कमरे में वेंटिलेशन जरूर रखें
  • सोने से पहले हीटर बंद कर दें
  • कमरे में एक कटोरे में पानी रख दें ताकि हवा में नमी बनी रहे
  • बच्चों और बुजुर्गों के कमरे में हीटर का इस्तेमाल सीमित समय तक ही करें.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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